पुस्तक समीक्षा : अद्भुत आत्म बलिदान

पुस्तक समीक्षा

अद्भुत आत्म बलिदान

अद्भुत आत्मबलिदान एक ऐतिहासिक उपन्यास है। जिसे हिंदी जगत के लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार दुर्गा प्रसाद माथुर द्वारा लिखा गया है। श्री माथुर के द्वारा अब से पूर्व में लगभग एक दर्जन ऐसी पुस्तकें प्रकाशित कराई जा चुकी हैं जो भारत के इतिहास के गौरवपूर्ण भक्तों को उजागर करते हैं। भारत के इतिहास के जिस उज्जवल पक्ष को चाटुकार इतिहासकारों ने भारत की आत्मा के साथ गद्दारी करते हुए अंधेरी कोठरी में कैद कर दिया है, उसे लोगों की नजरों के सामने किसी न किसी प्रकार लाने का जो लोग इस समय भागीरथ प्रयास कर रहे हैं। उनमें श्री दुर्गा प्रसाद माथुर जी का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है।

‘अद्भुत आत्म बलिदान’ प्राचीन ऐतिहासिक नगरी बूंदी के महा प्रतापी नरेश नारायण दास के जीवनवृत्त पर आधारित है । जिनका जीवन वास्तव में समरांगण से उठने वाले भीषण क्रन्दन का साक्षी रहा , किंतु इस सब के उपरांत भी वह एक निर्भीक व्याघ्र की भांति क्षा धर्म और युग धर्म का संपूर्ण समन्वय कर जीवन में अपने सही लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे और राजधर्म का उचित निर्वाह करते हुए मां भारती की अप्रतिम सेवा करते रहे । श्री माथुर ने ऐसे ही महान देशभक्त को अपने इस उपन्यास का महापात्र चयनित किया है।
पुस्तक की शब्दावली और देशभक्ति पूर्ण संवाद से यह स्पष्ट हो जाता है कि विद्वान लेखक ने भारत के प्राचीन गौरव को पुस्तक के 184 पृष्ठों में बड़ी सफलता के साथ गूँथने का प्रयास किया है।
उपन्यास पढ़ना हर पाठक के लिए तब और भी अधिक रोचक हो जाता है जब उसका मुख्य पात्र किसी ऐतिहासिक घटना या घटनाक्रम को अपने माध्यम से पाठकों के हृदय में उतारने का रोमांचकारी प्रदर्शन करता हो। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने अपने मुख्य पात्र के माध्यम से ऐसा ही रोमांचकारी संवाद और दृश्य प्रस्तुत किया है। जिससे पाठक निरंतर लेखक के साथ जुड़ा रहता है । यदि आप एक बार पुस्तक को पढ़ना आरंभ कर देते हैं तो फिर कहीं से भी छोड़ने को मन नहीं करता । शब्दों का तारतम्य और भावों की उत्कृष्टता को बहुत ही प्रवीणता के साथ लेखक ने पिरोया है और एक ऐसी सुंदर माला तैयार की है जिसे लेने के लिए हर पाठक लालायित हो उठता है।
श्री माथुर स्वयं पुस्तक के विषय में लिखते हैं कि प्रस्तुत उपन्यास अद्भुत बलिदान की संरचना में मेरे दो अभीष्ट रहे। एक तो मैं इसे उच्च कक्षाओं के स्तर के अनुरूप पाठ्यक्रम हेतु तथा दूसरा इसे उच्च भाषा तथा विशिष्ट शैली में लिख हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ तथा विद्वतजनों को ऐसी अनुपम सौगात भेंट करूं जिससे हिंदी का गौरव अभिवृद्धित हो सके। अतः इस उपन्यास के विशद कथानक की सृष्टि मैंने इन्हीं उद्देश्यों से की है। जिसमें राष्ट्रीयता, उच्च संस्कार, विकार रहित चरित्र संयमशील मानसिकताएं और सभी प्रकार के पावन आदर्श मोतियों की भांति समाहित हों तथा यही मेरा समग्र उद्देश्य था और पावन मंतव्य भी।
पुस्तक के संवाद सहज, सरल और उच्च भाव बोध को प्रकट करने वाले हैं । जिनमें साहित्य की उत्कृष्ट संवाद शैली तो दिखाई देती ही है साथ ही संवाद की ऊंचाई भी इस स्तर की है कि हर संवाद से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है । बस , यही किसी भी लेखक या उपन्यासकार की सबसे बड़ी विशेषता होती है कि वह अपने पत्रों के माध्यम से एक ऐसा अमर संदेश छोड़ने में सफल हो जो कालजयी हो। प्रस्तुत पुस्तक के विषय में निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि यह एक ऐतिहासिक उपन्यास ही नहीं एक कालजयी ग्रंथ भी है। जिसके लिए विद्वान लेखक के सार्थक प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है।
प्रस्तुत पुस्तक दुर्गा के प्रकाशक साहित्यागार, धामाणी मार्केट की गली ,चौड़ा रास्ता जयपुर हैं
पुस्तक प्राप्ति के लिए 0141 – 2310785 व 4022382 पर संपर्क किया जा सकता है ।
पुस्तक का मूल्य ₹300 है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

मुख्य संपादक, उगता भारत

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