लाला लाजपत राय के बलिदान ने दी थी स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति और ऊर्जा: अनिल आर्य

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गाज़ियाबाद ।,गुरुवार,28 जनवरी 2021,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “156 वें लाला लाजपतराय जन्मोत्सव पर जूम पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया।कोरोना काल में परिषद का 158 वां वेबिनार था।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और पंजाब के हजारों युवक आंदोलन में कूद पड़े।लाला जी का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के फिरोजपुर जिले के धूदिकी गांव में हुआ था।वे युवा अवस्था में आर्य समाज के आंदोलन से जुड़ गए।लाला लाजपत राय आजादी के मतवाले ही नहीं,बल्कि एक महान समाज सुधारक और महान समाजसेवी भी थे।यही कारण था कि उनके लिए जितना सम्मान गांधीवादियों के दिल में था,उतना ही सम्मान उनके लिए भगतसिंह और चन्द्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के दिल में भी था। स्वामी दयानन्द सरस्वती के अनुगामी लाला लाजपत राय ने आर्य समाज को पंजाब में लोकप्रिय बनाया।आर्य समाज आंदोलन की पंजाब में उस समय लहर थी।स्वामी दयानंद जी के देहावसान के बाद उन्होंने आर्यसमाज के कार्यों को पूरा करने के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा उनके बलिदान से प्रेरणा ग्रहण करें।

परिषद के राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने बताया कि केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के 43वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में दिनांक 29,30 व 31 जनवरी 2021 को जूम व फेसबुक पर ऑनलाइन “अंतरराष्ट्रीय आर्य बुद्धिजीवी महावेबिनार” के रूप में आयोजित किया जा रहा है जिसमे 10 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।सभी लोगों से उन्होंने बढ़ चढ़ कर भाग लेने के लिए आह्वान किया।

मुख्य अतिथि कालका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल डॉ अंजू मेहरोत्रा ने कहा कि लाला लाजपतराय का व्यक्तित्व एक क्रांतिकारी नेता का रहा,अपने तेजस्वी भाषणों से भारत की जनता में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने के लिए जोश फूंकने वाले लाला लाजपतराय का व्यक्तित्व अंग्रेजी हुकूमत के लिए हमेशा सिरदर्द बना रहा।
समारोह अध्यक्ष डॉ रचना चावला ने परिषद द्वारा निरंतर इस विकट कोरोना काल को अवसर में बदल कर 158 वेबिनरों का कुशल आयोजन कर सभी को बौद्धिक,शारीरिक व आध्यात्मिक रूप से सशक्त करने के लिए बधाई दी।

परिषद के प्रधान शिक्षक सौरभ गुप्ता ने कहा कि लाला लाजपत राय ने पंजाब में ‘दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज’ की स्थापना करने लिए अथक प्रयास किये।

गायिका करुणा चांदना,दीप्ति सपरा,किरण सहगल,रविन्द्र गुप्ता,प्रवीना ठक्कर,प्रतिभा कटारिया,जनक अरोड़ा,मृदुला अग्रवाल,वीना वोहरा,चन्द्रकान्ता आर्या,ईश्वर देवी आर्या,वेदिका आर्या,आशा आर्या,अनिता रेलन,उर्मिला आर्या,कुसुम आर्या,करुणा चांदना,सरिता डाबर,वीरेन्द्र आहूजा आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य रूप से आचार्य महेन्द्र भाई,आनन्द प्रकाश आर्य, यशोवीर आर्य,डॉ सुषमा आर्या, आर पी सूरी,विकास भाटिया, शिवम मिश्रा,राजेश मेहंदीरत्ता आदि उपस्थित थे।

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