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भारतीय संस्कृति

क्या हैं महामूर्ख के लक्षण

*महामूर्ख के लक्षण, ध्यान से पढ़िए। ऐसे लोग जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते। वास्तविक सफलता प्राप्त करना अलग बात है, और सफलता का प्रदर्शन करना, एक अलग बात है।*

*सफलता कोई सीमित उपलब्धि का नाम नहीं है, कि आपने बी ए, एम ए पास कर ली, आप सफल हो गए। और इसके बाद सफलता समाप्त हो गई। यह सफलता तो प्रतिमिनट प्रतिघंटे प्रतिदिन होती है, और जीवन भर चलती है।*
वास्तव में सफलता का अर्थ है, — *प्रतिदिन विद्या, उत्तम आचरण और सुख बढ़ना चाहिए; यदि विद्या, उत्तम आचरण और सुख बढ़ता जा रहा है। जीवन में आनंद शांति उत्साह निर्भयता निश्चिंतता सहनशीलता सेवा परोपकार निष्कामता आदि बढ़नी चाहिए। यदि ये सब बढ़ते जा रहे हैं। समाज के बुद्धिजीवी धार्मिक सदाचारी चरित्रवान ईश्वरभक्त आस्तिक ईमानदार लोगों में आप की प्रतिष्ठा बढ़नी चाहिए, यदि वह बढ़ती जा रही है। जीवन में दुख अशांति भय चिन्ता आदि घटनी चाहिए। यदि ये सब घटते जा रहे हैं। अविद्या, राग द्वेष मिथ्या आचरण लोभ क्रोध ईर्ष्या जलन असहिष्णुता झूठ छल कपट चालाकी धोखाधड़ी और दुख आदि कम होना चाहिए; यदि अविद्या, मिथ्या आचरण और दुख आदि ये सब कम होता जा रहा है। अर्थात जो जो प्राप्त होना चाहिए, उसे आप उत्तरोत्तर प्राप्त करते जा रहे हैं। तथा जिस जिस चीज से छूटना चाहिए, उससे आप उत्तरोत्तर छूटते जा रहे हैं। तो इसका नाम सफलता है।*
इस कसौटी पर अपने आपको कस कर देखें, तो वास्तव में आप को पता चलेगा, कि आप अपने जीवन में सफल हो रहे हैं, या असफल हो रहे हैं।
आजकल लोगों ने सफलता की परिभाषा बदल ली है। *परंतु किसी के द्वारा परिभाषा बदल लेने से वह वस्तु नहीं बदल जाती। बल्कि वह व्यक्ति स्वयं भ्रांति में पड़कर अधिक से अधिक दुख भोगता रहता है। और दूसरों को भी भ्रांति में डाल कर पाप का भागी बनता है।*
*कुछ लोग यदि सत्य की उपेक्षा करके झूठ को ही सत्य कहने लगें, तो उनके कहने से झूठ, सत्य नहीं बन जाता। कोई दुख को सुख कहने लगे, तो उसके कहने से, वह दुख, सुख नहीं बन जाता। दुख तो दुख ही रहेगा, और वह व्यक्ति को परेशान भी निश्चित रूप से करेगा ही।* इसी प्रकार से सफलता की परिभाषा बदल लेने से वास्तव में सफलता बदलती नहीं है, बल्कि व्यक्ति स्वयं को भ्रांति और धोखे में रखता है, और असफल होता रहता है। इसलिए भ्रांति में न रहकर सत्य को ही स्वीकार करना चाहिए।
*आजकल के लोगों की सफलता की परिभाषा* —
एक व्यक्ति को स्कूल कॉलेज में प्रवेश मिल गया। उसने पढ़ाई की। उसे अच्छी डिग्री मिल गई। कोई अच्छी नौकरी मिल गई, जिसमें अधिक वेतन हो। अथवा कोई अच्छा व्यापार जमा लिया जिसमें बहुत अच्छी धन की प्राप्ति होती हो। बड़ा सा बंगला बना लिया. 1 या 2 कारें खरीद ली। घर में नौकर चाकर हो गए। अधिक धन कमा लेने के कारण समाज में कुछ प्रतिष्ठा भी हो गई। कुछ बोलना सीख लिया, चालाकी से बोल बोल कर लोगों को प्रभावित करना / बहकाना सीख लिया। कुछ कमजोर व्यक्ति उस की चालाकी से डरने लगे। उसके सामने चुप रहने लगे, और ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति यदि ऐसा मानने लगे, कि *मैं तो सफल हो गया हूँ।* तो यह उसकी भ्रांति है। यह वास्तविक सफलता नहीं है। केवल झूठी सफलता का प्रदर्शन मात्र है। और वह भी आजकल की सफलता की गलत परिभाषा के अनुसार! क्योंकि यह आजकल वाली परिभाषा तो, कोई वास्तविक सफलता की परिभाषा ही नहीं है।
*मूर्खता की एक और पहचान — जो व्यक्ति कुछ थोड़ा बहुत पढ़ गया, कुछ डिग्रियाँ भी प्राप्त कर ली। वह यद्यपि वास्तव में पूरा विद्वान नहीं है, अनेक भ्रांतियों से युक्त है, और फिर भी सम्मान ऊंचे विद्वानों जैसा चाहता है। वह दूसरों के साथ बिना प्रसंग की बातें करता है। अन्यों पर झूठे आरोप लगाता है, छल कपट से उनका खंडन करता है। दूसरों को नीचा दिखाना चाहता है। स्वयं को ही सबसे ऊंचा विद्वान मानता है। स्वयं को बहुत बुद्धिमान तथा सफल मानता है। दूसरों को मूर्ख एवं असफल समझता है। ऐसा व्यक्ति स्वयं असफल एवं महामूर्ख है।* वह अपनी भ्रांतियों के कारण, जीवन के अनेक क्षेत्रों में असफल होता है। कुछ बुद्धिमान लोग उसे पहचान लेते हैं कि यह इतना बड़ा व्यक्ति नहीं है, जितना यह अपने आप को दिखाता है। उन बुद्धिमानों की दृष्टि में वह मूर्ख और असफल व्यक्ति कहलाता है।*
*यदि सामान लोग आपको बुद्धिमान एवं सफल व्यक्ति मानते हैं, तो इसे सफलता का वास्तविक प्रमाण पत्र न समझिएगा। यदि समाज के बुद्धिमान धार्मिक सदाचारी लोग आपको बुद्धिमान एवं सफल व्यक्ति मानते हैं, तो यही आपकी बुद्धिमत्ता और असफलता का वास्तविक प्रमाण पत्र है। ध्यान रहे, जनता का दिया हुआ प्रमाण पत्र मान्य नहीं होता, किसी प्रामाणिक विश्वविद्यालय आदि संस्था का दिया हुआ प्रमाण पत्र ही मान्य होता है।*
कृपया आप सब भी इन बातों के आधार पर अपना अपना परीक्षण निरीक्षण करें। अपने जीवन की दिशा और दशा को समझें, तथा तुलना करें, कि कहीं आप भी तो किसी अज्ञानी महामूर्ख व्यक्ति की नकल तो नहीं कर रहे हैं?
— *स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक।*🌞🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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