Categories
प्रमुख समाचार/संपादकीय

आज का चिंतन-01/05/2014

जरा संभल के ….
परशुराम सब देख रहे हैं

– डॉ. दीपक आचार्य
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com

 भगवानश्री परशुराम अन्य देवी-देवताओं की तरह नहीं हैं बल्कि चिरंजीव हैं। जब तक सूरज-चाँद और पृथ्वी रहेगी तब तक हमारे बीच में ही रहेंगे। इसलिए परशुराम कल भी हमारे बीच में थे, आज भी वे विचरण कर रहे हैं और कल भी रहेंगे। इस सत्य को उन लोगों को स्वीकार करने की जरूरत है जो ब्राह्मणों के नाम पर राजनीति करते रहे हैं और ब्राह्मणों को भ्रमित करते रहे हैंparshuram

साल भर गायब रहने वाले लोग परशुराम के नाम पर एक दिन जमा हो जाकर बड़ी-बड़ी डींगे हाँकते हैं, मंचों पर फबते हैं और ब्राह्मण होने का गर्व करते हुए जयकारों के साथ दिन गुजारते हैं।  एक दिन के धूमधड़ाके का फायदा उठाकर अपनी तस्वीरों और खबरों की चिरयुवा भूख और प्यास को पूरा करने का जतन करते हैं और अपने आपको ब्राह्मणों का मसीहा कहते हुए मंचिया-लंचिया गायन से सभी को भरमाते हैं।

दुर्भाग्य यह है कि ब्रह्मत्व और ब्राह्मणत्व के संस्कारों से हीन लोग साल भर ब्राह्मण प्रतिभाओं और समाज की उपेक्षा करते हैं, ब्राह्मणों के नाम पर संगठन बनाकर मंच और लंच का प्रबन्ध करते हैं और जहाँ ब्राह्मणत्व और संस्कारों के संरक्षण-संवद्र्धन की बात आती है वहाँ सिर्फ नामकमाऊ औपचारिकता का निर्वाह कर अपने कत्र्तव्य की इतिश्री कर लिया करते हैं।

ब्राह्मण होना अलग बात है और अपने आपको ब्राह्मण कहलाना अलग बात। ब्राह्मण के लक्षण जिनमें हों, जो ब्राह्मणत्व के संस्कारों से भरा पूरा हो, वही ब्राह्मण हो सकता है और उसी को परशुराम का जयकारा लगाने का या परशुराम जयन्ती मनाने का अधिकार है।  शराबियों, माँसाहारियों, विद्वेषियों, समाज के लिए आत्मघातियों, अभिनयबाजों, बहुरुपियों, वृहन्नलाओं की तरह हर आँगन में जाकर नाच-गान करने वालों,  सामाजिक प्रतिभाओं की किसी न किसी प्रकार से हत्याएं करने वालों, अपने छोटे-छोटे घृणित और नापाक स्वार्थों की पूर्ति के लिए दुर्जनों के कीचन से लेकर बाथरूम्स और अन्तःपुर तक पहुँच रखकर समाज के सज्जनों का गला घोंटने के गोरखधंधों में रमे रहने वाले ब्राह्मणों को मुनाफाखोर व्यापारियों से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाना चाहिए।

ब्राह्मणत्व के बीज और संस्कार आज भी विभिन्न क्षेत्रों में पूरी ऊर्जा और ताजगी के साथ मौजूद हैं। आज भी खूब सारे लोग ऎसे हैं जो ब्राह्मण संस्कारों का पूरा-पूरा परिपालन करते हैं लेकिन उनकी न कहीं कोई पूछ हो रही है, न ही वे दूसरे लोगों की तरह अपनी पहचान स्थापित करने को मोहताज हैं।

परशुराम ने जिस धर्म, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष किया, उसका कितना कुछ अंश हम कर पा रहे हैं, इस विषय पर थोड़ा सा भी चिंतन हम कर लें तो अपने आपको कटघरे में पाएंगे, हमारी आँखें शर्म के मारे झुक जाएंगी और सज्जनों के सामने सर उठाने की हिम्मत हम नहीं कर पाएंगे।

आज का दिन हमें यह सोचने के लिए विवश करता है कि आखिर परशुराम का नाम लेने का हमें क्या हक़ रह गया है जबकि हम काम सारे वे ही कर रहे हैं जिनके विनाश के लिए भगवान श्रीविष्णु को परशुराम अवतार लेना पड़ा था। यह सोचने की बात है कि जो इंसान रिश्वतखोर, मुनाफाखोर, हरामखोर,कमीशनबाज, भ्रष्ट, बेईमान और दस्यु प्रवृत्ति का है वह परशुराम का नाम कैसे ले सकता है।

जरा गौर से किसी स्वच्छ आईने के सामने खड़े होकर एक बार सोच लें कि हमारे भीतर कितने अंशों में ब्राह्मणत्व शेष रहा है। परशुराम समाज और देश के लिए समर्पित थे और हम सिर्फ अपने और अपने परिवार तक सिमट गए हैं।

आज कितने ही ब्राह्मण परिवार अभावों में जी रहे हैं, कितनी ही सन्नारियां वैधव्य और परित्यक्त जीवन जी रही हैं, कितनी ही प्रतिभाएं सुनहरे भविष्य को पाने की तमाम प्रतिभाओं के होने के बावजूद अवसरों के लिए मोहताज होकर हताश और निराश हैं। जिस भारतमाता और गौमाता की रक्षा के लिए परशुरामजी ने धरती हिला दी, हम उस मामले में मौन और नपुंसक बने हुए हैं। समाज और देश की हमें कोई चिंता नहीं है।

ब्राह्मणों के नाम पर ठेकेदारों, दलालों, माफियाओं की बाढ़ आयी हुई है। जो लोग माफियाओं सा काम कर रहे हैं, नाजायज धंधे चला रहे हैं, मेहनत और मजूरी छोड़कर कर हराम का खाने-पीने में जी जान ला रहे हैं, नालायकों के पीछे दुम हिलाते नज़र आते हैं, कमीनों का प्रशस्तिगान करते नहीं अघाते, अपने स्वार्थों के लिए कभी खुद पसर जाते हैं, कभी किसी और को मैनेज कर देते हैं,  अपात्रों से दान ले रहे हैं, पापियों के लिए पूजा-पाठ और अनुष्ठान-यज्ञ कर रहे हैं और सज्जनों तथा समाज की उपेक्षा कर रहे हैं।

एक जमाना था जब ब्राह्मण ऋषि की तरह किंगमेकर हुआ करता था, आज अपना ही पेट और घर भरने का आदी होता जा रहा है, समाज में फिजूलखर्चियां सारी सीमाएं लांघती जा रही हैं और हम हैं कि हर अच्छाई को छोड़ते जा रहे हैं और हर बुराई को अंगीकार। समाज का नेतृत्व कर मार्गदर्शन देने वाले हम लोग आज लोमड़ स्वभाव को अंगीकार कर भेड़ों की तर्ज पर सर झुकाये इधर-उधर भटक रहे हैं जहाँ हमें रेवड़ों की तरह ले जाया जा रहा है।

हमारे ही भीतर खूब सारे अच्छे और पवित्र, सादगीपूर्ण लोग भी हैं तो दूसरी ओर वे भी हैं जो गुटखों, तम्बाकू, भंग, चरस, गांजा और दारू की खुमारी और माँसाहार में दिन-रात जीते हुए ब्राह्मणों को लज्जित कर रहे हैं।

इन सभी किस्मों को लोगों को भले ही आज के दिन अपने आपको ब्राह्मण होने का ऊपरी गौरव बोध हो जाए मगर खुद परशुराम इन सभी को देख रहे हैं। यह हमारी शुचिताहीनता और मलीनता है कि हमें उनके दिव्य स्वरूप का कोई अनुभव नहीं हो पा रहा है, हो भी कैसे, हमारी मलीनता और आसुरी भाव इसमें आडे़ जो आ चुका है।

आज का दिन हमें सिर्फ इसी बात पर आत्मचिंतन करना होगा कि हम परशुराम जयन्ती मनाने लायक हैं भी या नहीं, अथवा सिर्फ ऊपरी मन से, भोले-भाले ब्राह्मणों को भरमाने और अपने बनाए रखने भर के लिए औपचारिकता के निर्वाह को धर्म मान बैठे हैं। एक दिन परशुराम जयन्ती पर ब्रह्मत्व का जयघोष कर लो, फिर ब्राह्मणों को भूल जाओ साल भर के लिए।

सभी विप्रवरों को परशुराम जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएँ ….

हमें यकीन करना ही होगा कि अच्छे दिन आने वाले हैं।

—000—

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
deneme bonusu
vaycasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
betpark giriş
betpark giriş
savoybetting giriş