शिवसेना का हुआ सत्ता से मोहभंग : यूपीए को बताया एक एनजीओ, कांग्रेस और विपक्ष के लिए कहा- उजड़े हुए गांव की जमीन्दारी

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शिव सेना के रुख को देख ऐसा आभास होता है कि शिव सेना का सत्ता से मोह भंग हो गया है। अपने प्रमुख पत्र के माध्यम से जिस तरह कांग्रेस ही नहीं बल्कि यूपीए को एनजीओ बताने के बाद भी यदि एनसीपी और कांग्रेस का शिव सेना को समर्थन जारी रखने का कोई मतलब नहीं रहता।
महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में अपनी ही सहयोगी पार्टी कांग्रेस और राहुल गाँधी पर निशाना साधा गया है। इस संपादकीय में देश के विपक्षी दलों को कमजोर और बिखरा हुआ बताया गया है। ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा है कि ‘लोकतंत्र के अधोपतन’ के लिए विपक्षी दल ही जिम्मेदार हैं और उन्हें आत्मचिंतन की आवश्यकता है। साथ ही लिखा है कि विपक्षी दलों को अभी एक सर्वमान्य नेता चाहिए, लेकिन इस मामले में वे दिवालिया हो गए हैं। 

इस संपादकीय में खासकर के कांग्रेस के गाँधी परिवार को निशाना बनाया गया है। लिखा है कि बीते 5 वर्षों में सरकार ने किसी भी आंदोलन को लेकर गंभीरता ही नहीं दिखाई, क्योंकि सरकार के मन में विपक्षी दलों का कोई अस्तित्व ही नहीं है। यही उनकी दुर्दशा है। शिवसेना ने कांग्रेस वर्किंग कमिटी के नेताओं को इस विषय पर चर्चा करने की सलाह दी है कि उनके ‘सर्वोच्च नेता को घोषित तौर पर अपमानित करने की हिम्मत सत्ताधीश क्यों दिखाते हैं?’

शिवसेना ने कांग्रेस को ‘सरकार पर टूट पड़ने’ में कमजोर करार देते हुए कहा कि कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल ‘किसान आंदोलन’ को धार नहीं दे पाए हैं। साथ ही पश्चिम बंगाल में क़ानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराया गया है। पूछा गया है कि कांग्रेस का नेतृत्व अब कौन करेगा? साथ ही उसने कांग्रेस को ये भी याद दिलाया कि उसके पास अमित शाह जैसे कोई ‘व्यवस्थापक’ भी नहीं है। संपादकीय में आगे लिखा है:

“कांग्रेस के नेतृत्व में एक ‘यूपीए’ नामक राजनीतिक संगठन है। उस ‘यूपीए’ की हालत एकाध ‘एनजीओ’ की तरह होती दिख रही है। ‘यूपीए’ के सहयोगी दलों द्वारा भी देशांतर्गत किसानों के असंतोष को गंभीरता से लिया हुआ नहीं दिखता। ‘यूपीए’ में कुछ दल होने चाहिए लेकिन वे कौन और क्या करते हैं? इसको लेकर भ्रम की स्थिति है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को छोड़ दें तो ‘यूपीए’ की अन्य सहयोगी पार्टियों की कुछ हलचल नहीं दिखती। शरद पवार का एक स्वतंत्र व्यक्तित्व है, राष्ट्रीय स्तर पर है ही और उनके वजनदार व्यक्तित्व तथा अनुभव का लाभ प्रधानमंत्री मोदी से लेकर दूसरी पार्टियाँ भी लेती रहती हैं।”

इंडिया फर्स्ट से साभार

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