हर कार्य उत्तम फल वाले होंगे ,एक बार नित्य प्रातः इस भाव के साथ आचमन तो करिए


*हर कार्य उत्तम फल वाले होंगे एक बार नित्य प्रातः इस भाव के साथ आचमन तो करिये*
अथ आचमन मंत्रा:
ओ३म्
1-अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा।।
2-अमृता पिधानमसि स्वाहा।।
3-सत्यं यशः श्रीर्मयि श्री: श्रयतां स्वाहा।।
*एक साथ संक्षिप्त, सरस, सरल, बोधगम्य काव्य*


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तुम्हीं उपस्तरणं, अपिधानं,
कहें बिछौना ओढ़ना।
अजर अमर अविनाशी भगवन,
मुझे स्वयं से जोड़ना।।
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भूल न जाऊँ तेरा आश्रय,
तव छाते की छांव को।
सत्य सुयश श्री शोभा धन हो,
पाने तेरे गांव (परमधाम) को।।
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रहूं आनंदित विमल मस्त हो,
परमानंद में जीता रहूं।
चारों ओर से सर्वसुरक्षित,
तव आँचल को पीता रहूं।।
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*विनय-*
हे सर्वरक्षक प्रभु! आप अजर, अमर, अविनाशी हैं। आप ही हम सब के आश्रय हो और आप की ही छत्र छाया में हम सब सर्वसुरक्षित रहते हैं।
यह आप के अमृत स्वरूप का बोध हमेशा बना रहे, यह बात अति प्रेमपूर्वक श्रद्धाभाव से समर्पण करते हुए सत्य कहता हूँ।
मुझे भी अपने सत्य पथ पर चलाइये, जिससे आपकी कृपा में उत्तम यश को प्राप्त करता हुआ, सांसारिक धन ऐश्वर्य से युक्त हो शोभा को पाता हुआ, आपके अजर, अमर, अनमोल धन परमानन्द को प्राप्त कर सकूँ, आज मैं यह सच्चे दिल से पुकार कर रहा हूँ।
मुझे मेरे व अपने अजर, अमर, अविनाशी स्वरूप का बोध कराइये, आ ही गया हूँ प्रभो!
मेरी पुकार सुनिए पुकार सुनिए👏🏻
-आचार्या विमलेश बंसल आर्या
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