Categories
उगता भारत न्यूज़ व्यक्तित्व

शून्य से शिखर के धनी भामाशाह : महाशय धर्मपाल आर्य

-विनोद बंसल

राष्ट्रीय प्रवक्ता-विहिप   

     कुछ लोग कर्म शील होते हैं तो कुछ धर्मशील। कोई विद्यावान होता है तो कोई गुणवान। कोई धनवान होता है तो कोई बलवान। कोई ज्ञानी होता है तो कोई दानी। किन्तु ये सभी गुण यदि कहीं एक साथ देखने को मिले तो वे थे महाशय धर्म पाल गुलाटी ‘आर्य’। माघ कृष्ण तृतीया अर्थात् तीन दिसंबर के ब्रह्म मुहूर्त में प्रात: 5.38 बजे 98 वर्ष की आयु में शरीर त्यागने वाले महाशय श्री धर्मपाल आर्य जी का सम्पूर्ण जीवन जन-जन के लिए प्रेरणा दाई है। शून्य से शिखर तक का उनका जीवन चरित्र प्रत्येक बाल, युवा, वृद्ध, व्यवसायी, उद्यमी सभी के लिए एक नई ऊर्जा का संचार करता है। व्यावसायिक कुशलताओं के कारण ही गत वर्ष उन्हें महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित भी किया गया था। देश भर में अनेक सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा संस्थाएं उन्हीं की प्रेरणा व सहयोग से चल रही हैं। वे वर्तमान में अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आर्य केन्द्रीय सभा दिल्ली के प्रधान थे। 

     27 मार्च, 1923 को सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे महाशय जी 1947 में देश विभाजन के बाद जब भारत आए, उनके पास मात्र 1,500 रुपये थे। सियालकोट में उनकी देगी मिर्च के नाम से दुकान थी तथा वे अपने पिता महाशय धर्मपाल गुलाटी के साथ ही व्यापार में हाथ बंटाते थे। लेकिन उनका वहां मन नहीं लगा और भारत-विभाजन  के बाद वे दिल्ली आ गए। विस्थापन के बाद परिवार ने कुछ समय अमृतसर में एक शरणार्थी शिविर में बिताया। तत्पश्चात वे काम की तलाश में दिल्ली आ गए।

     प्रारंभ में परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्होंने दिल्ली के कनॉट प्लेस और करोल बाग के बीच तांगा चलाना शुरू किया। फिर उन्होंने तांगा बेचकर 1953 में चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली। इस दुकान का नाम उन्होंने महाशियां दी हट्टी (MDH) रखा था। यहीं से प्रारंभ हुई इनकी मसालों के वैश्विक व्यापार की यात्रा। पहले उन्होंने चांदनी चौक के साथ-साथ दिल्ली के करोल बाग स्थित अजमल खां रोड पर भी मसाले की एक और दुकान खोली। 1959 तक दिल्ली के चांदनी चौक और करोल बाग में तीन दुकानो के बाद उन्होंने महाशियां दी हट्टी की निर्माण इकाई हेतु कीर्ति नगर में जमीन खरीदी। यहां से इनका व्यापार बढ़ने लगा।

     सिर्फ कक्षा पांचवीं तक पढे श्री धर्मपाल आर्य व्यापार जगत के मंझे हुए खिलाडियों में से एक थे। कारोबार में बड़े-बड़े दिग्गजों ने भी उनका लोहा माना है। कहते हैं कि वे एफएमसीजी सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले CEO थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में उन्हें 25 करोड़ रुपये का वेतन मिला। अपनी कमाई का 90% भाग वे दान करते थे। दर्जनों आश्रम, अनाथालय, विद्यालय, चिकित्सालय, गुरुकुल व आर्य समाज मंदिर उनकी प्रेरणा या प्रत्यक्ष दान से चलते थे। वनवासीय, जनजातीय तथा गिरिवासी क्षेत्रों में सेवा, शिक्षा तथा विकास कार्यों को बलवती बनाने में उन्होंने बड़ा योगदान दिया।

     उनके अपने परिश्रम से एक मसाले की दुकान से प्रारंभ हुआ उनका कारोबार धीरे-धीरे इतना फैला कि आज विश्व भर में उनकी मसाले की 18 फैक्ट्रियां हैं। एमडीएच अपने 62 उत्पादों के साथ आज उत्तरी भारत के लगभग 80 प्रतिशत बाजारों पर अपना प्रभुत्व जमा चुकी है। लंदन में कार्यालय के साथ आज 100 से ज्यादा देशों में एमडीएच मसालों की आपूर्ति होती है। वे उद्योग जगत के शायद ऐसे पहले व्यक्ति थे जो अपने उत्पादों का विज्ञापन खुद ही करते थे। “एमडीएच मसाला सच सच… एमडीएच एमडीएच” नामक विज्ञापन में उनका हंसमुख चेहरा दर्शकों के मानस पटल से कभी ओझल हो ही नहीं सकता। उन्हें विश्व का सबसे उम्रदराज ‘ऐड स्टार’ माना जाता है। वे आईआईएफएल हुरुन इंडिया रिच-2020 की सूची में शामिल भारत के सबसे बुजुर्ग धनी व्यक्ति थे। कभी मात्र 1500 रुपये वाले हट्टी की दौलत आज लगभग 5400 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उनके वारे में कहा जाता है कि वे जैसे कमाते थे वैसे ही समाज कल्याण हेतु लुटाते भी थे।    

     वे नियमित रूप से प्रात: 4 बजे उठकर योग, ध्यान, भ्रमण, व्यायाम, प्राणायाम, यज्ञ, दान, स्वाध्याय व सत्संग करते थे। संयमित दिनचर्या, आहार-विहार, जीवन शैली व शुद्ध-सात्विक शाकाहारी भोजन के साथ शरीर को पर्याप्त आराम देने में भी उन्होंने कभी कोई कोताही नहीं बरती। किसी ना किसी एक कारखाने में वे नित्य जाते थे। कुछ दिनों पूर्व कोरोना पॉजिटिव तो हुए थे किन्तु उससे वे उबर भी गए थे। लेकिन बाद में उनकी तबियत बिगड़ती चली गई. उनका इलाज दिल्ली के चनन देवी अस्पताल में चल रहा था.

     शून्य से शीर्ष तक की तप-पूर्ण जीवन यात्रा करने वाले उदारमना महाशय धर्म पाल आर्य द्वारा शरीर छोड़ने के समाचार ने एक झटका तो दिया किन्तु उस दानवीर भामाशाह ने एक बात सदैव के लिए स्थापित कर दी कि

“जब हम जन्मे जगत में, जग हंसा हम रोये। ऐसी करनी कर चलें, हम हंसें, जग रोय।।

     विश्व हिन्दू परिषद ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा है कि “पद्मभूषण महाशय धर्मपाल आर्य ऐसे महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने विस्थापन का दंश झेला, तांगे वाले से विश्व प्रसिद्ध मसाले वाले बने, दानवीरता में सबको पीछे छोड़ा, आर्य समाज व अन्य धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित रह कर आजीवन शारीरिक व मानसिक रूप से सक्रिय रहे”।

ओ३म् शांति: शांति: शांति:।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
betgaranti giriş
norabahis giriş
oslobet giriş
oslobet giriş
oslobet giriş
betnano
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
Betist
Betist giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
betpark giriş
betpark giriş
perabet giriş
perabet giriş
bahiscasino giriş
bahiscasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betnano giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
ikimisli giriş
betplay giriş
timebet giriş
roketbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
ikimisli giriş
betplay giriş
norabahis giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
betnano giriş
norabahis giriş
betnano giriş
vaycasino
vaycasino
betpark
betpark
Hitbet giriş
Bahsegel giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betnano giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
holiganbet giriş
vaycasino
vaycasino
realbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
realbahis giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
royalbet giriş
betnano giriş
celtabet giriş
betnano giriş
celtabet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betpark
betpark
betpark
betpark
norabahis giriş
norabahis giriş
timebet giriş
timebet giriş
roketbet giriş
roketbet giriş
vaycasino giriş
betplay giriş
betplay giriş