Categories
इतिहास के पन्नों से विश्वगुरू के रूप में भारत

भारत का गौरवपूर्ण अतीत : वेदों में वर्णित जल और नौका विज्ञान

 

कृपाशंकर सिंह

ऋग्वेद मे कुएँ का उल्लेख अनेक ऋचाओं में हुआ है। इससे पता चलता है कि ऋग्वेदिक काल में सिंचाई के साधनों में कुआँ का उपयोग भी होता रहा होगा। इसकी प्रप्ति कई़ ऋचायों मे चरस का नाम आने से भी होती है। सम्भवतः पीने के लिये भी कुएँ के पानी का उपयोग होता रहा होगा। नदियों के जल का उपयोग के लिये तो होता ही था।
पहले मंडल में कुत्स आंगिरस विश्वदेव गण की स्तुति करते हुये कुएं का उल्लेख एक अलग ही सन्दर्भ में करते है। उनका कहना है कि जैसे दो सौतंे दोनों और खड़ी होकर स्वामी को संताप देती है, वैसे ही कुएँ की दीवारे संताप दे रही है। हे शतक्रतो, जिस प्रकार चूहे माड़ी लगे धागों को काटता है, वैसे ही तुम्हारे इस स्तोता को (मुझे) मन की पीड़ा से सता रही हैं। हे द्यावा पृथिवी, मेरी प्रार्थनाओं के अभिप्राय को समझो। (1.105.8)


कुएँ में गिरकर त्रित ने अपनी रक्षा के लिये देवों का आहवान किया। बृहस्पति ने त्रित को पाप रूपी कुएँ से निकाल कर दुख से मुक्ति दिलाई। हे द्यावा पुथिवी, हमारी इस प्रार्थना पर ध्यान दो। (1.105.17) पहले मंडल के ही सूक्त 112 में अश्विद्वय की स्तुति करते हुए कुत्स आंगिरस कहते है – हे अश्विनी कुमारो, जिन उपायों से तुम दोनो ने असुरों द्वारा कुएँ में फंसे हुए और पाश में बॉधे हुए रेभ नामके ऋषि को डूबने से बचाया था, तथा बन्दन नामके ऋषि को भी जल में डूबने से बचाया था, और जिस प्रकार अंधकार में डाले गये कण्व ऋषि को बचाया था, उन्ही उपायों के साथ आओ। (1.112.5)
हे अश्विद्वय, कुएँ में डालकर अन्तक नाम के राजर्षि की जिस समय असुर हिंसा कर रहे थे, उस समय तुम दोनों ने जिन उपायों से उनकी रक्षा की थी, जिन नौका रूप उपायों से तुमने समुद्र में डूबते हुए तुग पुत्रा भुज्यु की रक्षा की थी, और जिन सब उपायों द्वारा असुरों के द्वारा सताये जा रहे कर्कन्धु और वय्य नाम के मनुष्यों की रक्षा की थी, उन संरक्षण साधनों के साथ आओ। (1.112.6)
ऋषि दीर्घतमा अश्विद्वय की प्रार्थना में कहते हैं – असुरो द्वारा पाश मे बॉधे गये कुएँ में दस रात, नौ दिन जल में पड़े रहने से दुख से संतप्त रेभ नामक ऋषि को तुम दोनों ने उसी प्रकार बाहर निकाला, जिस प्रकार अध्वर्यु सोम निकालता है। (1.116.24)
बृहस्पति की स्तुति करते हुए वामदेव ने कहा – हे बृहस्पति, दूरवर्ती प्रदेश में जो अत्यधिक उत्कृष्ट स्थान है, वहां से तुम्हारे अश्व यज्ञ में पधारते हैं। जिस प्रकार खोदे हुए कुएँ में चारों ओर से पानी चूता है, उसी तरह से तुम्हारे चारों ओर स्तुतियों के साथ पत्थरों द्वारा निचोड़ा गया सोम मधुर रस का सिंचन करता है। (4.50.3)
श्यावाश्व आत्रोय ने मरूद्गण द्वारा गौतम के लिये बनवाये गये कुएँ का उल्लेख किया है – छंदों द्वारा स्तृति करने वाले और जल की इच्छा करने वाले स्तोताओं के लिये तथा तृषित गौतम के लिये मरूताे ने कुआँ बनवाया। उनमें से कुछ मरूताे ने चोर के समान छिप कर हमारी रक्षा की थी, और कुछ ने साक्षात् दृष्टिगत होकर शरीर का बल साधन किया था। (5.52.12)
दसवें मंडल मे विमद ऋषि ने सोम की प्रार्थना करते हुए कुएँ से जल निकालने की बात कही है। हे सोम, घड़ा जल निकालने के लिये जैसे कुएँ के भीतर जाता है, वैसे ही हमारे सभी स्तोत्रा तुम्हारे लिये जाते हैं। हमारे जीवन की रक्षा के लिये इस यज्ञ को तुम सफल करो। तुम्हारी प्रसन्नता के लिये हम सोमरस के पेय पात्रों को समर्पित करते हैं, उसे तुम धारण करो। तुम महान् हो। (10.25.4)

वेदों में सरोवर
गोतम राहूगण ने इन्द्र की प्रशंसा करते हुये शर्यणावत् सरोवर का उल्लेख किया है। दधीचि के अश्व मस्तक को पाने की इच्छा से पर्वत के पीछे शर्यणावत सरोवर मे इन्द्र ने उस मस्तक को प्राप्त किया। (1.84.14)
आठवें मंडल की एक ऋचा में कहा गया है कि – प्रयोग के पुत्रा आसंग ने दस हजार गौओं को दान कर दिया, जिससे वे सारे दाताओं से दान देने मे आगे निकल गये। जैसे सरोवर से कमल नाल निकलते हैं, उसी प्रकार आसंग की गोशाला से सारे पशु निकल गये थे। (8.1.33)
वत्स काण्व ऋषि ने भी शर्यणावत सरोवर का उल्लेख किया है। हे इन्द्र, शर्यणावत सरोवर के पास ऋत्विको द्वारा सम्पन्न किये गये यज्ञ में तुुम तृप्त होवो। याजकों की स्तुतियों से प्रसन्न हो वो। (86.39)
प्रगाथ ऋषि ने इन्द्र की प्रार्थना मे कहा है – इन्द्र, यह सोमरस तुम्हें तृण वाले पुष्कर, सुषोमा (सोहान नदी) और आर्जीकीया के तट पर अधिक प्रमत्त करता है। (8.53.11)
नवें मंडल में भृगु पुत्रा जमदग्नि सोम की प्रशंसा में कहते हैं, जो सोम दूर या समीप के देश में इन्द्र के लिये अभिषुत हुये है, और जो शर्यणावत सरोवर में अभिषुत हुये हैं, वे हमे इष्ट फल दे। (9.65.22)
सोम की ही प्रशंसा में मारीच कश्यप ने कहा – शर्यणावत सरोवर में स्थित सोम को इन्द्र पीये जिससे वृत्राहंता इन्द्र श्रेष्ठ बल धारण करें। हे सोम, इन्द्र के लिये क्षरित होवो। (9.113.1)
बृहस्पति ऋषि ने ब्रह्मज्ञान के विषय में कहा है – देखने की शक्ति से सम्पन्न, सुनने की क्षमता से सम्पन्न, समान ज्ञान से युक्त सखा भी मन से अनुभवजन्य ज्ञान में उसी प्रकार एक समान नहीं होते, जिस प्रकार कुछ जलाशय मुख तक जल वाले, कुछ कटि तक जल वाले, और कुछ स्नान करने के उपयुक्त गम्भीर सरोवर होते हैं। (10.71.7)

वेदों में नाव
ऋग्वेद में सरिता, सागर, सरोवर और कूप के अलावा नौका का उल्लेख भी अनेक ऋचाओं में हुआ है। दीर्घतमा सौ डांडों वाली नौका का उल्लेख करते हुए कहते हैं – हे अश्विद्वय, तुम दोनों ने अति गहन समुद्र में डूबते हुए भुज्यु को सौ डांडो वाली नाव मे बैठाकर तुग्र के पास पहुंचाया था। (1.116.5)
अगस्त्य मैत्रावरूणि अश्विद्वय की महानता का वर्णन करते हुए कहते हैं – अश्विद्वय, तुग्र राजा के पुत्रा ‘भुज्यु’ के लिये तुमने समुद्र जल में तैरने वाली दृढ़ और डांडो वाली (पक्ष-विशिष्ट) नाव बनाई थी। उसी नाव पर तुमने भुज्यु को बचाया था। (1.182.5) समुद्र के बीच में तुग्र के पुत्रा भुज्यु को मुंह के बल नीचे गिराया गया था। अश्विद्वय द्वारा भेजी हुई चार नौकाओं ने उसे ऊपर उठाकर समुद्र के पार कर दिया। (1.182.6)
ऋषि इरीन्विठि ने आदित्यों की प्रार्थना करते हुये कहा है – हे सबको आवास देने वाले आदित्यों, तुम अपनी सुखद और सुन्दर नौका में हमे समस्त बुराईयों से पार कराओ। (8.18.17)
श्यावाश्व ऋषि मरूद्गण की स्तुति करते हुए कहते हैं – मरुतों के भय से धरती इस तरह कांपती है, जैसे प्राणियों से भरी हुई नौका जल के बीच में कम्पित होती है। मरुद्गण दूर से दिखाइ्र देने पर भी अपनी गति के कारण मालूम हो जाते है। ये नेता मरुद्गण द्यावा पृथिवी के मध्य में रह कर अधिक हव्य ग्रहण करने के लिये यत्न करते हैं। (5.59.3)
पवमान सोम की प्रार्थना करते हुए ऋषभ (विश्वामित्रा गोत्राज रेणु) ने कहा – हे सोम, युद्ध भूमि में भेजे गये घोड़े के समान तुम द्रोण कलश में जाओ। तुम इन्द्र के उदर में जाकर उन्हें तृप्त करो। जैसे नाविक नावों द्वारा मनुष्यों को नदी पार कराते हैं, वैसे ही सब कुछ के जानने वाले तुम हमें पापों के पार ले जाओ। तुम शूर के समान शत्राुओं को मारते हुये निन्दक शत्राुओं से हमें बचाओ। (9.70.10)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
deneme bonusu
vaycasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
winxbet giriş
winxbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
ikimisli giriş
safirbet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
safirbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betasus giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
hitbet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
ikimisli giriş
savoybetting giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
betorder giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpas giriş
betpas giriş
betorder giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betpas giriş
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
mariobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betper giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betnano giriş
betper giriş
betpark giriş
betpark giriş
savoybetting giriş