दीपावली के पटाखों से जब भड़के शाहिद तो लोगों ने याद दिलाई अजान

पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने रविवार (नवंबर 15, 2020) की सुबह तड़के 4:53 बजे ट्वीट कर के हिन्दुओं द्वारा दीपावली मनाने को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि सुबह के साढ़े 4 बजे किस किस्म के लोग पटाखे उड़ाते हैं? उन्होंने दावा किया कि उन्हें तब भी तेज़ आवाज़ में पटाखे छोड़ने की गूँज सुनाई दे रही थी। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब कोई फैसला लागू ही नहीं किया जा सकता है तो पटाखों को प्रतिबंधित करने का क्या फायदा?
सिद्दीकी साहब अब बात निकली है तो बहुत दूर तक जाएगी। वीणा के तारों को छेड़ने से पूर्व वीणा से निकलने वाले स्वरों को सुनने का साहस करना होगा।
वर्ष में एक बार आने वाली दीपावली पर आतिशबाज़ी पर अंकुश लगाए जाने के पीछे हिन्दुत्व के विरुद्ध किसी गहरी षड़यंत्र की बू आ रही। उसका कारण भी है। अभी कुछ दिन पूर्व अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्मित हेतु हुए शिलान्यास की ख़ुशी में कहीं हिन्दू अधिक आतिशबाज़ी न छोड़े। सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पराली की आड़ में कुठाराघात का आभास है। ये मुफ्तखोर दिल्लीवासियों की मेहरबानी से जब से अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बने हैं, तभी से पराली का इतना सियापा मचा हुआ है। केजरीवाल से पूर्व 15 वर्ष शीला दीक्षित(स्व), 5 वर्ष मदन लाल खुराना, 5 वर्ष राधारमण आदि ने राज किया, केंद्र में विरोधी पार्टी होते हुए भी इनमें से किसी के भी कार्यकाल में प्रदुषण की इतनी समस्या नहीं हुई, जितनी दिल्ली वालों को मुफ्तखोर बनाने वाले केजरीवाल के कार्यकाल में हो रही है, इस कटु सच्चाई को तुष्टिकरण की चादर को फेंक बिना किसी निस्संकोच से गंभीरता से सोंचना होगा। जितनी भी हिन्दू हितैषी पार्टियां हैं, सभी को एकजुट होकर इन तुष्टिकरण करने वालों के विरुद्ध  स्वर मुखरित कर इन्हे बेनकाब करना होगा। 
देश में तुष्टिकरण इस सीमा तक बढ़ गया है, मीडिया भी तुष्टिकरण करता है, यह आरोप नहीं कटु सत्य है। लॉक डाउन में कभी मीडिया ने नहीं दिखाया कि मुस्लिम क्षेत्र में किस तरह कंधे से कंधे रगड़ रहा होता था, लोग बिना मास्क के बाजार में खरीदारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, शाम के समय 7 बजे के बाद जामा मस्जिद आकर यहाँ की भीड़ दिखाने का किसी में साहस नहीं, क्यों?
भारत सरकार द्वारा खुले में मांस बेचना दंडनीय है, क्यों मुस्लिम क्षेत्रों में सुबह के समय खुले में किसी सब्ज़ी की भांति मांस बिकता है? कौन है इसका जिम्मेदार?

शाहिद सिद्दीकी ने दावा किया कि जो दिल्ली पहले से ही एक ‘जहरीला नरक’ बनी हुई थी, वो अब दीपावली की अगली सुबह अपने अधिकतर निवासियों के लिए मौत का एक जाल बन जाएगी। शाहिद सिद्दीकी द्वारा दीपावली और पटाखों को लेकर इस तरह ज्ञान दिए जाने के बाद कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की और पूछा कि सुबह-सुबह अजान की जो आवाज़ आती है, क्या उससे किसी की तन्द्रा नहीं भंग होती है?

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