Categories
महत्वपूर्ण लेख

असंतुलित विकास की कहानी कहती भारत की राजधानी दिल्ली

 

डॉ. राकेश राणा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घुसते ही आसमान में मंडराते चील-कौए-बाज आपका स्वागत करते मिलेंगे। बढ़ती जनसंख्या, बेतहाशा शहरीकरण और अंधाधुंध औद्योगिकीकरण ने दिल्ली के पर्यावरण को उसके पूरे पारिस्थितिकीय तंत्र को ध्वस्त कर दिया है। दिल्ली में मूलभूत समस्याओं आवास, यातायात, पानी व बिजली इत्यादि से निपटना अब चुनौती बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली का प्रदूषण के मामले में चौथा स्थान है दुनिया में। दिल्ली के प्रदूषण का 30 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों के कारण है तो 70 प्रतिशत वाहनों के कारण। दुनिया में जो 20 सबसे प्रदूषित शहर हैं उनमें 13 भारत के हैं और उनमें भी राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है।
शहरों के विकास को लेकर सरकारों की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि विकास अधिनियम 1951 में बनता है जिसके दिशा-निर्देशों के अंतर्गत 1962 का मास्टर प्लान दिल्ली के लिए अस्तित्व में आया। उसके अमल में लाने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की कल्पना को ठोस रूप प्रदान करने के लिए संस्थागत ढांचा विस्तार चाहता है। जिसके लिए राष्ट्रीय राजधानी प्लानिंग बोर्ड का गठन फरवरी 1985 को हुआ। यह गठन-संगठन की कवायद आजादी के बाद लगभग आधी सदी बीत जाने तक चलती रही। यह गठित बोर्ड राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना-2001 लेकर आया। योजना के केन्द्र में आर्थिक गतिविधियां और आवास व्यवस्था के विस्तार तथा प्रबंधन पर जोर था। जिसे जनसंख्या का उमड़ता सैलाब बनते-बनते बहा ले गया। एक अध्ययन के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या प्रति वर्ष 4 लाख बढ़ जाती है। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या मार्च 2018 तक बढ़कर 1.09 करोड़ हो गयी है। वही दिल्ली में आसपास के क्षेत्रों में पंजीकृत वाहनों की संख्या भी दिल्ली को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। दिल्ली के हालात भयावह परिदृश्य बना रहे हैं।
दिल्ली दूषित हवाओं का समन्दर बन चुकी है। प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 में दिल्ली में कैंसर से 5,162, टी.बी. से 3,656 और मधुमेह से 2,561 लोगों की मौत हुई है। यहां सांस की बीमारियां प्रतिदिन औसतन 27 दिल्ली वालों की मौत का कारण बन रही है। 2017 में ही श्वसन-तंत्र तथा इंट्रा-थोरैसिक अंगों के कैंसर के कारण दिल्ली में 551 लोगों की मौत हुई। जबकि साँस से संबंधित अन्य बीमारियों एवं संक्रमण की वजह से एक साल में 9,321 लोग मरे। इसके अलावा रिपोर्ट में दिल्ली वालों को दूषित हवा ही नहीं, विषाक्त भोजन और पानी भी उनके जीवन को लील रहा है। परिणाम गत दो वर्षों में पांच लाख से अधिक डायरिया के मरीज सामने आये हैं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार 2018-2019 के दौरान डायरिया के 5,14,052 मरीज अस्पतालों में इलाज के लिये पहुंचे हैं। वहीं स्वास्थ्य केन्द्रों में पहुंचने वाले मधुमेह रोगियों की संख्या 3,27,799 रही। ब्लड प्रेशर के मरीज 3,11,396, मियादी बुखार टाइफाइड के 51,266 गंभीर रोगी अस्पतालों में भर्ती किये गये।
रिपोर्ट के मोटे अनुमान से पता चलता है कि दिल्लीवासी अपनी आय का लगभग 10 प्रतिशत अपनी बिमारियों पर खर्च कर रहे हैं। इस परिदृश्य की व्यापक पृष्ठभूमि में प्रदूषण का मुख्य हाथ है। दिल्ली की वायु-गुणवत्ता नाजुक स्थिति में पहुंच चुकी है। नजीजतन प्रदूषण प्रतिदिन दिल्ली में औसतन 80 लोगों की जान ले रहा है। सी.एस.ई. की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में अधिकतर मौतें दिल की बीमारी और स्ट्रोक के कारण हो रही हैं। जिसकी बड़ी वजह दिल्ली का प्रदूषण है। यहां हवा में पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 की मात्रा प्रति घन मीटर 150 माइक्रोग्राम है। जो कि देश में निर्धारित सीमा का चार गुना और डब्ल्यू.एच.ओ. की तय सीमा का 15 गुना है।
थ्री-डी स्कैनिंग तकनीक से लिया गया एक अनुमान बताता है कि दिल्ली में गैरकानूनी रूप से 5,57000 टन नगरीय ठोस कचरा सड़कों के किनारे और खाली पड़े भूखंडों पर पड़ा रहता है। एसोचैम का अध्ययन कहता है कि दिल्ली एनसीआर में हर साल 5,900 टन मेडिकल कचरा पैदा होता है। इसके अलावा ई-वेस्ट की भारी मात्रा महानगरों की गंभीर समस्या है। इस ठोस कचरे के 83 प्रतिशत हिस्से का प्रबन्धन ही जमीन के अन्दर भराव के माध्यम से हो पाता है। इसमें 38,000 टन प्लास्टिक और 55,000 टन निर्माण क्षेत्र से पैदा हुआ कचरा तथा 87,00 टन काँच के टुकड़े एवं 4,55000 टन अन्य स्रोतों से पैदा हुआ कचरा गंभीर समस्या है। दिल्ली में प्रतिवर्ष पैदा होता है करीब 40 लाख टन कचरा जिसमें तेजी से वृद्धि हो रही है। यहां हर साल कचरे में दो फीसदी की वृद्धि दर्ज हो रही है। यह कचरा हवा, पानी व खाद्य पदार्थों को जहरीला बनाने में बड़ा गुनाहगार है और उससे भी बडे़ गुनाहगार इस कचरे को पैदा करने वाले लोग। कचरे का इतने बड़े स्तर पर पैदा होना किसी भी विकासशील सभ्य समाज के तिए अच्छा संकेत नहीं है।
संसाधनों का क्षय, बिगड़ता पारिस्थितिकीय संतुलन, विकास का पिछड़ापन, असुरक्षा, गरीबी, अभाव आदि इस तरह की तमाम समस्याओं के लिए एक वैश्विक मॉडल और क्षेत्रीय दृष्टिकोण विकसित करना आवश्यक है। शिक्षाविदों, शोधार्थियों स्वयंसेवी संगठन, संचार माध्यमों के द्वारा एक शांतिपूर्ण, सह-अस्तित्व और सहकार वाली क्षेत्रीय भावना का वातावरण बने, जिससे सतत् विकास की संस्कृति का स्फुरण हो सके और पूरी पारिस्थितिकीय व्यवस्था समग्रता में पल्लवित होकर स्थापित हो सके। शिक्षा, स्वास्थ्य, क्षेत्रीय पर्यटन तथा व्यवासयिक समूहों के तालमेल से क्षेत्रीय स्तर के सहयोग द्वारा सुलभ व्यवस्था बनायी जा सकती है। ईमानदार प्रयास से व्यक्ति-व्यक्ति के बीच तैयार की गयी क्षेत्रीय सहयोग की कड़ी और दृष्टिकोण इस दिशा में एक निर्णायक तत्व बन सकता है। जो सतत् विकास नीतियों की सफलता की शुभाकांक्षा के लिए श्रृंखला के तौर पर विकसित की जा सकती है।
सार्वजनिक यातायात व्यवस्था बनाने की हरसंभव कोशिश करनी होगी। ताकि आम आदमी अपने वाहनों के उपयोग की बजाय सार्वजनिक यातायात की ओर आकृष्ट हो। व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग कम से कम करें। विश्व के अधिकांश विकसित देशों में ऐसी व्यवस्था काफी समय से प्रचलन में है। परिणामतः उन देशों ने प्रदूषण की समस्या पर नियंत्रण पाया हुआ है। सार्वजनिक यातायात साधन की समुचित व्यवस्था और उसका सुचारू संचालन तथा एक समग्र सतत् समझ धीरे-धीरे समाज में एक पारिस्थितिकीय पोषण की संस्कृति विकसित करने में मदद करेगी। लाइफ-स्टेटस के लिए व्यक्तिगत वाहनों, संसाधनों और सम्पत्ति संग्रहण तथा उपभोग की भारतीय मानसिकता से समाज को ऊपर उठने के अभ्यास करने ही होंगे। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल गर्व से करें, देश बनाने में सहयोग करें, सच्चा और सकारात्मक राष्ट्रवाद तभी आ पायेगा। आपका यह जागरूक व्यवहार न सिर्फ राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बनेगा बल्कि आनेवाली पीढ़ियों और आप अपने बच्चों को प्रदूषण-मुक्त, स्वच्छ-सुन्दर शहर और स्वस्थ देश भी हम सौंप सकेंगे।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betlike giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betlike giriş
betparibu giriş
betebet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betnano giriş
parmabet giriş
piabellacasino giriş
betovis giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
casinomilyon giriş
milanobet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
betebet giriş
betgaranti mobil giriş
parmabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
savoybetting giriş
parmabet giriş
betlike giriş
betcup giriş
hitbet giriş
norabahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betcup giriş
betebet giriş
betnano giriş
betnano giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
nesinecasino giriş
pumabet giriş
pumabet giriş
nesinecasino giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betnano giriş
betticket giriş
betticket giriş
restbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
bahislion giriş
istanbulbahis giriş
istanbulbahis giriş
bahislion giriş
bahislion giriş
betebet giriş
betebet giriş
betebet giriş
betplay giriş
betebet giriş
rekorbet giriş
betnano giriş
romabet giriş
betpas giriş
betnano giriş
betebet giriş
betpas giriş
savoybetting giriş
betnano giriş
betpas giriş