‘ स्टेम सेल थैरेपी ‘ से कोरोना इलाज की एक नई तकनीक विकसित

योगेश कुमार गोयल

कुछ भारतीय शोधकर्ता भी ‘स्टेम सेल थैरेपी’ से कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर उत्साहित दिख रहे हैं। कई भारतीय डॉक्टरों का मानना है कि शरीर में पाई जाने वाली मिजेंकाइमल स्टेम सेल्स कोरोना संक्रमित रोगी के क्षतिग्रस्त अंगों को पुनः स्वस्थ कर सकती हैं।
कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए दुनियाभर के देश वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन सम्पूर्ण ट्रायल प्रक्रिया पूरी होने तथा वैक्सीन मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध होने में अभी समय लगेगा। कई देशों में कोरोना के इलाज के लिए कुछ संभावित दवाओं या उपचार पद्धतियों के क्लीनिकल ट्रायल हो रहे हैं और कुछ में शुरूआती सफलता भी मिलती दिख रही है। कुछ देशों में ‘स्टेम सेल थैरेपी’ से भी कोरोना मरीजों का इलाज करने के प्रयास चल रहे हैं। यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) में तो इसी उपचार पद्धति से 73 कोरोना वायरस संक्रमितों को ठीक करने की सुखद खबर भी सामने आई थी। वहां के विदेश मंत्रालय के स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस विभाग की निदेशक हेंड अल कतीबा के अनुसार ‘अबू धाबी स्टेम सेल सेंटर’ (एडीएससीसी) ने ‘स्टेम सेल थैरेपी’ के जरिये कोरोना के सभी 73 कोरोना मरीजों को ठीक करने में सफलता प्राप्त की।
अल कतीबा के मुताबिक इस रिसर्च सेंटर ने ‘स्टेम सेल थैरेपी’ से कोरोना इलाज की एक नई तकनीक ‘गेम-चेंजर’ विकसित की है, जिससे कोरोना संक्रमण को मात दी जा सकती है। इस नए इलाज में मरीज के रक्त से स्टेम सेल्स को निकाल कर उन्हें फिर से सक्रिय करके रोगी के फेफड़ों में डाला जाता है। इससे फेफड़ों की कोशिकाओं को पुनर्जीवित किया जाता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता पुनः बढ़ जाती है। यूएई की विदेश मंत्री हिंद अल ओतैबा के मुताबिक कोरोना महामारी से लड़ने में यह एक अभूतपूर्व कदम साबित हो सकता है। यूएई में जिन 73 मरीजों को यह उपचार दिया गया, उनमें से किसी भी मरीज ने तुरंत किसी साइड इफैक्ट्स की शिकायत नहीं की।
कुछ भारतीय शोधकर्ता भी ‘स्टेम सेल थैरेपी’ से कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर उत्साहित दिख रहे हैं। कई भारतीय डॉक्टरों का मानना है कि शरीर में पाई जाने वाली मिजेंकाइमल स्टेम सेल्स कोरोना संक्रमित रोगी के क्षतिग्रस्त अंगों को पुनः स्वस्थ कर सकती हैं क्योंकि स्टेम सेल्स का कार्य क्षतिग्रस्त टिश्यू की मरम्मत करना और नया टिश्यू बनाना है। भारतीय स्टेम सेल विशेषज्ञों के मुताबिक स्टेम सेल्स को रोगी या किसी स्वस्थ व्यक्ति से लेकर लैब में कल्चर कर एक निश्चित मात्रा में कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। ग्रेटर नोएडा के डॉ. मधन जया रमन तथा डॉ. रश्मि जैन सहित देशभर के कुल 8 डॉक्टरों के समूह ‘भारतीय स्टेम सेल स्टडी ग्रुप’ ने ‘स्टेम सेल थैरेपी’ पर शोध करने के बाद दावा किया है कि कोरोना के मरीज स्वयं के स्टेम सेल से ठीक हो सकेंगे। इनका कहना है कि प्लासेंटा, अंबीलिकल कॉर्ड तथा बोन मैरो से निकलने वाले स्टेम सेल से कोरोना मरीज का उपचार किया जा सकता है। स्टेम सेल तीन प्रकार के होते हैं, भ्रूण स्टेम सेल (एंब्रियोनिक स्टेम सेल्स), व्यस्क स्टेम सेल (एडल्ट स्टेम सेल) तथा कॉर्ड स्टेम सेल।
डॉ. मधन का कहना है कि चीन तथा इजराइल में हुए शोधों से पता चला है कि प्लासेंटा (गर्भ में बच्चा जिस झिल्ली में रहता है) तथा अंबीलिकल कॉर्ड (गर्भनाल) से स्टेम सेल निकाल कर कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीज की स्टेम सेल में कोरोना वायरस असर नहीं करता। इसीलिए स्टेम सेल्स ऐसे मरीज के रक्त में पहुंच कर बड़ी तेजी से अपनी तरह की कोशिकाओं को निर्मित कर मरीजों को ठीक कर सकते हैं। चीन में भी कुछ वैज्ञानिक कोरोना संक्रमित मरीजों के शरीर में मिजेंकाइमल स्टेम सेल्स डाल कर अध्ययन कर चुके हैं। उस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना संक्रमण के कारण जिन मरीजों को निमोनिया हुआ था, वे स्टेम सेल थैरेपी से उपचार के बाद स्वस्थ होने लगे। चीन के वुहान में स्टेम सेल थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. डॉन्गचेंग वू ने भी स्टेम सेल ट्रीटमेंट से कोरोना वायरस के सफल इलाज का दावा किया है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने जिस ‘स्टेम सेल’ थैरेपी की खोज की है, वह ऐसी थैरेपी है, जिससे बहुत से लाइलाज माने जाते रहे रोगों का इलाज संभव हो गया है। स्टेम सेल्स को शरीर की अनूठी कोशिकाओं के रूप में जाना जाता है, जिनमें टिश्यू (ऊतक) पुनर्जनन तथा मरम्मत की एक विलक्षण क्षमता होती है क्योंकि ये विशिष्ट सेल प्रकारों में स्वयं-नवीनीकरण तथा विभेद करने में सक्षम हैं। स्टेम सेल थैरेपी में स्टेम कोशिकाओं का उपयोग होता है, जो विभिन्न मूल से संबंधित विभिन्न कोशिकाओं में अंतर करने में सक्षम होती हैं। यह थैरेपी नए स्टेम कोशिकाओं के साथ घायल ऊतकों को बदलने पर केन्द्रित है। शरीर की रोगग्रस्त तथा क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का स्थान लेकर स्टेम सेल उनमें नए जीवन का संचार करते हैं। चीनी स्टेम सेल विशेषज्ञ डॉ. डॉन्गचेंग वू के मुताबिक कोरोना के इलाज में स्टेम सेल थैरेपी इसीलिए कारगर है क्योंकि स्टेम सेल शरीर के खराब टिश्यूज की मरम्मत करते हैं। इनकी विशेषता यह होती है कि ये दूसरे टाइप के सेल में बदलकर खराब टिश्यू को ठीक कर सकते हैं।
स्टेम सेल थैरेपी ऐसी विधि है, जो विभिन्न प्रकार के स्टेम सेल का उपयोग कर चोटों तथा अन्य स्वास्थ्य की स्थिति में रोगों की एक विस्तृत श्रृंखला का इलाज करती है। यह थैरेपी मुख्य रूप से स्वस्थ और अनिर्दिष्ट स्टेम सेल्स के साथ घायल टिश्यूज को बदलने पर केन्द्रित है। यह ल्यूकेमिया, टिश्यू ग्राफ्ट्स, कैंसर, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, सेरेब्रल पॉल्सी, पार्किंसंस डिजीज, मल्टीपल स्कलेरोसिस, विजुअल इंपेयरमेंट (आखों की बीमारी), ब्रेन इंजरी, मधुमेह, नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर, कार्डियाक मरीज, लकवा, हेपेटाइटिस, डीएनए डैमेज रिपेयर सहित कई असाध्य बीमारियों, चोटों तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के इलाज के लिए एक आशाजनक तरीका है। इसी स्टेम सेल थैरेपी का उपयोग कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में किया जा रहा है, जिसके प्रारंभिक नतीजे आशानुकूल रहे हैं। शोधकर्ताओं द्वारा उम्मीद जताई जा रही है कि अगले चरणों में इस थैरेपी के ट्रायल के सुखद नतीजे सामने आएंगे और यह कोरोना मरीजों के लिए कारगर साबित होगी।

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योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा कई पुस्तकों के लेखक हैं, उनकी हाल ही में पर्यावरण संरक्षण पर 190 पृष्ठों की पुस्तक ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ प्रकाशित हुई है)

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