Categories
विविधा

भारतीय संस्कृति और ‘ उड़ता ‘ बॉलीवुड

राकेश सैन

वास्तव में बॉलीवुड अगर एक बहुविध कलाकारों से भरी फिल्म है, तो इसमें नायक और खलनायक दोनों हैं। ड्रग्स बॉलीवुड की एक सच्चाई है, जिसकी सफाई इसलिए जरूरी है क्योंकि देश का नौजवान बॉलीवुड की चकाचौंध में अपने सपने तलाशता है।

”आपने मेरे भाई के बारे में पढ़ा है और मैंने अपने भाई को पढ़ा है।’ ‘हसीना पार्कर’ फिल्म की नायिका जो कुख्यात आतंकी दाऊद इब्राहिम की बहन हसीना की भूमिका में है, पुलिस वालों के समक्ष अपने भाई की महानता का बखान करती है। ये छवि सुधारक संवाद फिल्म के कथानक की मांग है? नहीं। ये प्रयास है दाऊद को रॉबिनहुड बताने, उसकी नई छवि गढ़ने का जो उसके खूंखार अंत:करण के विपरीत है। गुजरात के व्यापारियों से रंगदारी वसूलने वाले बदनाम तस्कर अब्दुल लतीफ पर बनी फिल्म ‘रईस’ में दंगों के दौरान फिल्म का नायक हिंदू-मुसलमान दोनों के लिए लंगर लगाते हुए दिखाया जाता है। इस फिल्म की कहानी के लेखक चाहे राहुल ढोलकिया हों परंतु कलम में स्याही किसी ओर ही की लगती है। देगची में रंधते हुए दलिये के दो-चार दाने ही पूरी देग का हाल बता देते हैं, जरूरी नहीं कि पूरी देग में हाथ डाल कर देखा जाए। फिल्म स्टार सुशांत राजपूत की मौत से शुरू हुए प्रकरण के मध्यांतर में कंगना रनौत और शिवसेना के टकराव की नई कहानी को आगे बढ़ाते हुए सदी के महानायक की धर्मपत्नी व समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने मुंबई फिल्म उद्योग की गंदगी का पटाक्षेप करने वाले भाजपा सांसद व अभिनेता रवि किशन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि-कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। जया जी थाली में छेद की बात करती हैं जो शायद मुंबईया फिल्मों के प्रारंभ की बात होगी, वर्तमान में तो छेद दर छेद से थाली छलनी हुई दिख रही है।

ऊपर बतायी गयी फिल्म हसीना पार्कर व रईस तो केवल उदाहरण मात्र हैं, अगर सभी छेदों का जिक्र मात्र ही किया जाए तो बॉलीवुड के स्याह पक्ष पर एक अच्छा खासा ज्ञानकोष तैयार हो सकता है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद देश का हर नागरिक इस सच को समझने लगा है कि बॉलीवुड दिखावटी मुखौटा पहन कर लोगों के सामने कुछ और है, इसके पीछे कुछ और। ऐसे में भाई-भतीजावाद, अश्लीलता, नक्सली-जिहादी गठजोड़, ड्रग्स के नशे में चूर बॉलीवुड का शुद्धिकरण किया जाना अब जरूरी हो गया है।

बॉलीवुड में महिला शोषण का तो खुद कंगना रनौत ने एक ट्वीट से पर्दाफाश कर दिया जिसमें उन्होंने लिखा कि, ‘कौन सी थाली दी है जयाजी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी जिसमें दो मिनट के रोल, आइटम नम्बर्ज और एक रोमांटिक सीन मिलता था वो भी हीरो के साथ सोने के बाद।’ अभी एक उभरती कलाकार पायल घोष ने ‘मी टू’ अभियान के तहत निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप पर उसका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। इस तरह के आरोप दसियों फिल्म स्टार व निर्माता निर्देशकों पर लग चुके हैं। यह अब खुला रहस्य है कि बहुत से कलाकारों को कई तरह के समझौते करके फिल्मों में रोल मिलता है न कि उनकी अभिनय क्षमता के आधार पर। खुद बॉलीवुड इस विषय पर कई फिल्में बना चुका है। शायद यही कारण है कि आज फिल्मों में अश्लीलता व भौंडेपन को कहानी की मांग, दर्शकों की पसंद, आइटम सॉन्ग आदि की आड़ में कवर फायर दिया जाता है।

इसी तरह ‘राम तेरी गंगा मैली’ फिल्म का वह दृश्य सभी को याद होगा जिसमें गंगा घाट के पंडे को बलात्कारी के रूप में दिखाया गया, परंतु क्या दर्शक किसी एक फिल्म का नाम बता सकते हैं जिसमें किसी पादरी या मौलवी को इस फूहड़ अंदाज में पेश किया गया हो? फिल्मों में शादी के दौरान होने वाले बवाल के समय सबसे पहले फेरे करवाने वाले पुजारी को भागते हुए दिखाया जाता है और कई बार तो उसके गिरेबान को भी पकड़ते हुए दृश्यों को मैंने देखा है परंतु इसके विपरीत सनी दयोल की फिल्म का वह दृश्य भी सबको याद होगा कि नमाजी की भूमिका में कई गुण्डे उस पर हमला कर देते हैं लेकिन ‘देसी हीमैन’ अपनी जगह से टस से मस तक नहीं होते। उदारवाद के नाम पर ‘पी.के.’ और ‘ओ माई गॉड’ जैसी हिंदू हृदय घातक फिल्में तो खूब बनती हैं परन्तु बॉलीवुड की यही उदारता खास उपासना पद्धति पर आस्था बन जाती है। कंगना ने राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद, वहां के पाखंड और सेकुलरवाद को लेकर जो बातें कही हैं उनको हवा में नहीं उड़ाया जा सकता। दरअसल बॉलीवुड में नक्सली व जिहादी गठजोड़ हावी है जो एजेंडा सामने रख कर फिल्मों का निर्माण करता है। यहां वही फलता-फूलता है, जो उसकी हां में हां मिलाता है।

अपने लेख में अजय खमेरिया ने ठीक ही लिखा है कि, देश के बौद्धिक विमर्श को दूषित करने में बॉलीवुड की एकपक्षीय भूमिका रही है। इसलिए इसे गहराई से समझने की आवश्यकता है। पूरा सिने जगत उसी बौद्धिक जिहाद को आगे बढ़ाने में संलग्न रहा है, जिसकी पटकथा वामपंथियों द्वारा लिखी गई है। 25 मई, 1943 को मुंबई के मारवाड़ी हाल में प्रो. हीरेन मुखर्जी ने भारतीय जन नाट्य संघ या इंडियन पीपल्स थियेटर एसोसिएश (इप्टा) की स्थापना के अवसर पर आह्वान किया, ‘लेखक और कलाकार आओ, अभिनेता और नाटककार आओ, हाथ से और दिमाग से काम करने वाले आओ और स्वयं को आजादी और सामाजिक न्याय की नई दुनिया के निर्माण के लिये समर्पित कर दो।’ प्रो. मुखर्जी के इस आह्वान का वामपंथियों ने खुल कर दुरुपयोग किया और पूरे फिल्म जगत पर अपने मोहरे बैठा दिए। बड़ी फिल्मों के निर्माण के लिए जरूरत पड़ी आकूत धन की जिसको कथित तौर पर पूरा किया पेट्रो डॉलर व जिहादी और तस्कर गिरोह ने। चाहे बलराज साहनी जैसे कलाकारों ने इप्टा को राजनीतिक दांवपेच से दूर रखने का प्रयास भी किया परंतु वामपंथी लोहावरण इतना मजबूत था कि वे उसे भेद नहीं पाए।

वास्तव में बॉलीवुड अगर एक बहुविध कलाकारों से भरी फिल्म है, तो इसमें नायक और खलनायक दोनों हैं। ड्रग्स बॉलीवुड की एक सच्चाई है, जिसकी सफाई इसलिए जरूरी है क्योंकि देश का नौजवान बॉलीवुड की चकाचौंध में अपने सपने तलाशता है। यहां का अंधेरा पूरी नस्ल को अंधा कर सकता है। नशों को लेकर ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म बनाने वाला बॉलीवुड खुद राकेट की गति पर हवा से बातें करता दिख रहा है। अफसोस की बात है कि सुशांत की मौत के कारण तलाशती हुई जांच एजेंसियां नशे के मकडज़ाल तक पहुंची, तो बॉलीवुड की थाली और दाल काली जैसी अनावश्यक चर्चाएं छेड़ कर नशे को खाद पानी देता दिख रहा है। बॉलीवुड को आईना दिखाना अब जरूरी हो गया है इसका एक मात्र उपाय यही है कि पूरे फिल्म उद्योग का शुद्धिकरण हो।छलनी हुई थाली के छेद भरने के प्रयायस होने चाहिए न कि उन पर पर्दादारी के।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
supertotobet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
supertotobet giriş
Bettilt Giriş
Supertotobet Giriş
Vdcasino Giriş
supertotobet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
betorder giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
betmatik
betkom
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betkom giriş
betmatik giriş
betpark giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betpark giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
kralbet giriş
kralbet giriş
betorder giriş
betine giriş
xslot giriş
timebet giriş
timebet
timebet
vaycasino giriş
bettilt giriş
betine giriş
betine giriş
xslot giriş
xslot giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
xslot giriş
Hititbet Giriş
timebet
meritking giriş
meritking
norabahis
norabahis
meritking giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
meritking giriş
pusulabet giriş
timebet
timebet
betpark giriş
betplay giriş
betpipo giriş
norabahis
norabahis
betnano giriş
vaycasino giriş
hititbet giriş