गौ-माता के प्रश्न को कल समय स्वयं हमसे पूछेगा

20 मई 1996 को तत्कालीन राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने संसद में जो भाषण दिया था उसके उस अंश पर ध्यान दिया जाना चाहिए था जिसमें उन्होंने भारतीय संविधान की धारा 51ए(जी) के इस प्राविधान का उल्लेख किया था कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्त्तव्य होगा कि वह वनों, झीलों, नदियों एवं वन्य जीवों सहित सारे प्राकृतिक वातावरण की रक्षा करे तथा उसका संवर्धन करे और प्रत्येक जीव से स्नेह करे। राष्ट्रपति ने आगे कहा था कि गौरक्षा को सुनिश्चित करने गौ और उसके वंशज के वध को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के लिए सरकार उपयुक्त कदम उठाएगी।
संविधान का उक्त अनुच्छेद भी गौवध निषेध को प्रोत्साहित करता है। इस अनुच्छेद का अर्थ स्पष्ट है कि मनुष्य को प्रकृति के निकट लाकर प्रत्येक प्राणी का संरक्षक बनाया जाए। जहां तक गाय का प्रश्न है तो वह तो आज भी लाखों परिवारों की आजीविका का साधन है। डेयरी इंडिया की रिपोर्ट (1987) के अनुसार देश में 49,000 ग्रामीण दुग्ध उत्पादन सहकारी संगठनों के लगभग पचास लाख से अधिक ग्वाला परिवार (एक परिवार में पांच सदस्य भी हों तो लगभग ढाई करोड़ लोग) दूध बेचकर अपनी आजीविका को चलाते हैं।
यदि देश के 25 लाख एम.बी.बी.एस. डॉक्टर या लगभग इतने ही अधिवक्ता या किसी अन्य विभाग के यूनियन कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में भारत बंद की घोषणा करें या किसी अन्य प्रकार से अपनी मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन करें तो उनकी आवाज को सरकार भी सुनती है और मीडिया भी उनकी ओर आकर्षित होता है, जबकि उनकी संख्या केवल कुछ लाख ही होती है। बस उनके पास एक ही चीज अधिक होती है कि वे संगठित होते हैं, परंतु ग्वाले ढाई करोड़ होकर भी संगठित नही हैं, इसलिए उनकी बात को कोई सुनने वाला नही है। लोकतंत्र में भी यदि संगठन की लाठी से न्याय मिले तो वह लोकतंत्र नही होता। लोकतंत्र तो उसकी आवाज होता है जो आवाज करना या बोलना नही जानता। लेकिन देखा ये जा रहा है कि शासन की ये उत्कृष्ट पद्घति जो बोलते नही हैं उन्हीं के गले को काटने का काम करते हुए अपनी निकृष्टता का प्रदर्शन कर रही है।
मनुष्य दिन प्रतिदिन गायों को काटते काटते कम कर रहा है जिससे बहुत बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार होते जा रहे हैं। लोगों की इस बेरोजगारी को सबसे अधिक कम्युनिस्टों ने बढ़ाया है, जो गाय को केवल एक पशु ही मानते हैं और उसे देश की अर्थव्यवस्था का एक आधार मानने को या लोगों की बहुत बड़ी जनसंख्या के जीवन का आधार मानने को तैयार ही नही हैं। यद्यपि लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा समता मूलक समाज की संरचना करने का सबसे अधिक ढिंढोरा ये कम्युनिस्ट ही पीटते हैं। परंतु इनकी निर्दयता लोगों के रोजगारों को छीनने वाली ही सिद्घ हुई है। आज भी यदि गौवंश का संवर्धन हो और पर्याप्त संख्या में गौवंश देश में उपलब्ध हो जाए तो देश के करोड़ों किसानों को अपनी खेती के लिए बैल मिल सकते हैं और पौष्टिक पदार्थों को उत्तम रीति से गाय के दूध आदि से प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन कम्युनिस्टों ने ‘टै्रक्टर क्रांति’ करके सारा मटियामेट कर दिया। संवेदनाहीन लोगों ने संवेदनाशून्य मशीनी युग का सूत्रपात कर संवेदनाशून्य मानव समाज की संरचना कर डाली। एक अनुमान के अनुसार देश में चार करोड़ छह लाख बीस हजार हल तथा ढाई करोड़ बैलगाड़ियां हैं। उनके अनुसार तीन करोड़ लोगों का जीवन यापन होता है। (अब यदि बैलगाड़ियां और बढ़ाकर दस करोड़ कर दी जाएं तो 12 करोड़ लोगों को और रोजगार मिल सकता है। क्योंकि बढ़ई आदि गांव में रूककर ही अपनी जीविका चला सकते हैं। लेकिन हमने ऐसा न करके रोजगार छीन-छीन कर बेरोजगारों की फौज तैयार कर दी है, और अब रो रहे हैं कि देश में इतने लोग बेरोजगार हो गये हैं। ये नहीं सोचा जा रहा है कि इन्हें बेरोजगार किसने किया है।) अब यदि गोबर गैस संयंत्र तथा नाडेय काका प्रणीत कम्पोस्ट खाद बनाने की पद्घति को भी लोकप्रिय बनाया जाए तो इससे भी करोड़ों लोगों को रोजगार मिल सकता है।
हमारा विचार है कि गायों के पालने के लिए देश की बड़ी जनसंख्या को प्रेरित किया जाए और उनसे दूध और दूध से बने पदार्थों को बड़ी संख्या में तैयार कराके उनका निर्यात किया जाए। डालर की बढ़ती कीमत अपने आप औंधे मुंह आ गिरेगी।
यह ठीक है कि शिक्षा मनुष्य के लिए आवश्यक है, परंतु परंपरागत आजीविका के साधनों के माध्यम से जीविका चलाने हेतु शिक्षा अनिवार्य भी नही है। भारत ने सदियों तक अशिक्षित समाज को भी जीविका चलाने के विषय में शिक्षित करके समाज को बेहतर ढंग से चलाया है। आज शिक्षा को अनिवार्य करके भी परंपरागत रोजगारों को बहाल करने की दिशा में कार्य करें तो बेरोजगारी, भुखमरी और गरीबी से देश को छुटकारा मिल सकता है। लेकिन दुर्भाग्य है इस देश का कि यहां की केन्द्र सरकारें भारत को विश्व का प्रमुख गोमांस निर्यातक देश बनाने के लिए कृतसंकल्प रही है। ‘फारेन ट्रेड बुलेटिन के फरवरी 1994 के अंक में पृष्ठ 18 पर मीट एक्टपोर्ट प्रोस्पेक्ट्स ब्राइट शीर्षक से समाचार छपा है कि ‘एग्रीकल्चरल एण्ड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डवलपमेंट अथारिटी’ की एक रिपोर्ट के अनुसार मांस व मांस उत्पादों का निर्यात जो वर्तमान में 230 करोड़ रूपया वार्षिक है, आधुनिकीकृत कत्लखानों के माध्यम से इस शताब्दी के अंत तक 1000 करोड़ रूपये वार्षिक से अधिक का हो सकेगा। रिपोर्ट के अंत में नये कत्लखाने तथा मांस निर्यातक परक इकाईयों के स्थापित करने की भी सिफारिश की गयी है। रिपोर्ट में देश में मौजूदा पशुधन के अनुसार पर अनुमान लगाया गया है कि पैंतीस लाख टन मांस का उत्पादन किया जा सकता है, जिसका मूल्य 8250 करोड रूपये लागत की आवश्यकता होगी जिसे लगाने के लिए प्राइवेट सेक्टर तथा विदेशी कंपनियों की भागीदारी की भी सिफारिश की गयी है। हमें हमारी सरकार सब्सिडी देती है, हमारी वोट खरीदने के लिए और सब्सिडी से उत्पन्न घाटे को पूरा किया जाता है गोवंश का मांस निर्यात करके। घाटा किसको हुआ? भविष्य किसका उजड़ा? और यदि गाय आदि पशु नही रहे तो कत्लगाहों को कल को काटने के लिए क्या कोई नेता या देश का कोई कर्णधार स्वयं को या अपने किसी बेटे को बलि के लिए पेश करेगा? आज तो गाय माता यह प्रश्न पूछ रही है-कल वक्त स्वयं पूछेगा। समय रहते सोचना ही आवश्यक है।

Comment:

grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betvole giriş
betvole giriş
fenomenbet
betvole giriş
betkanyon
betvole giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betvole giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
timebet giriş
maxwin
realbahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
vaycasino giriş
kulisbet giriş
mariobet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
grandbetting giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betvole giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
imajbet giriş
damabet
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betvole giriş
betpark giriş
betvole giriş
betpark giriş
celtabet giriş
betpipo giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
superbahis giriş
perabet giriş
perabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
mariobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
mariobet giriş
betvole giriş
mariobet giriş
safirbet giriş
safirbet giriş