चीन से अब हिसाब पाक साफ होना ही चाहिए

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भारत की सशस्त्र सेनाओं का मनोबल इस समय देखते ही बनता है । चीन जैसे विशाल दैत्याकार देश को इस समय हर मोर्चे पर भारतीय सेना बहुत भारी पड़ती जा रही है । चीन को पहली बार ऐसा लग रहा है कि उसने भारत को छेड़कर बड़ी गलती कर ली है । भारत को छेड़ने के पश्चात चीन की सांसें फूल गई हैं, उसका आर्थिक साम्राज्य की लड़खड़ा रहा है और सैनिक मनोबल पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त वैश्विक मंचों पर भी उसे अपमानित होना पड़ रहा है । सचमुच ,भारत की सेनाओं का और उसके मनोबल का कोई जवाब नहीं ।
देशवासियों के लिए सचमुच है उत्साहवर्धक खबर है कि लद्दाख में भारत के अप्रत्याशित रणनीतिक जवाब से चीन बुरी तरह से फंस गया है। इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के अतिक्रमण के बाद वह खुद को बालू के दलदल में फंसे जैसी स्थिति में पा रहा है। उसने उन स्थानों पर कब्जा किया है जहां पर आने वाले ठंड और बर्फबारी के मौसम में टिक पाना बहुत मुश्किल होगा। यह बात यूरोप के थिंक टैंक यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज ने कही है।
संस्था के अनुसार इस विवाद में भारत ने न केवल पैंगोंग सो झील के दक्षिणी किनारे के ऊंचाई वाली रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा ले लिया है बल्कि उत्तरी किनारे पर भी भारतीय सेना ने अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे वह चीन के कब्जे वाले पूरे इलाके में नजर रखने में कामयाब हो रहा है।
विवाद आगे बढ़ने पर चीन को इसका सीधा खामियाजा उठाना पड़ेगा। भारतीय सेना ऊंचे स्थानों पर कम तैनाती करके भी फायदे की स्थिति में रहेगी। हालात को भांपकर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) अब हैरान है और वह अब पैंगोंग सो झील के दक्षिणी किनारे के कुछ ऊंचाई वाले इलाकों पर कब्जे की फिराक में है। इस बाबत 29-30 अगस्त की रात और एक सितंबर को उसकी हरकतों को भारतीय सेना ने नाकाम किया। अपनी स्थिति में सुधार के लिए पीएलए अब पैंगोग सो के दक्षिण में चुशूल और स्पैंगुर दर्रे तक पहुंचने की फिराक में है। जाहिर है कि इलाके में पर्याप्त संख्या में मौजूद भारतीय सेना पीएलए के आगे बढ़ने के किसी भी प्रयास को रोकेगी, तभी दोनों में बड़ा टकराव शुरू होने की आशंका पैदा हो जाएगी।
29-30 अगस्त और एक सितंबर को इलाके में वास्तव में क्या हुआ, यह अभी स्पष्ट नहीं है। दोनों पक्ष खुलकर कुछ बताने से बच रहे हैं, लेकिन यह तय है कि दोनों दिनों की घटनाओं के बाद इलाके में तनाव और बढ़ा है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवाने वहां का दौरा कर इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। हालांकि दोनों देश बातचीत के जरिये समस्या का समाधान करने की बात कह रहे हैं और वार्ता के दौर भी चल रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदल रहे। चीन की सेना पीछे हटने को तैयार नहीं है, उलटे वह भारतीय सेना को पीछे जाने के लिए दबाव बना रही है।
इस सब के उपरांत भी हम भारत की सरकार से यही अनुरोध करेंगे कि उसे हर पग और हर पल पर सावधान रहना होगा। चीन जैसे राक्षस प्रवृत्ति के देश से कभी भी वफा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह एक ऐसा देश है जो दानवता की किसी भी सीमा को छू सकता है । इसका इतिहास बताता है कि धोखा और छल कपट इसके रग रग में समाया हुआ है। भारतीय सेनाओं के बढ़े हुए मनोबल को तोड़ने की भी आवश्यकता नहीं है । जैसा कि पूर्व में राजनीतिक नेतृत्व के द्वारा ऐसी गलतियां बार-बार की गई है कि बढ़ती सेनाओं को अचानक रोकने के आदेश देकर उनके मनोबल को तोड़ा गया है । अब चीन से हिसाब पाक साफ होना ही चाहिए।

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