Categories
व्यक्तित्व

28 अगस्त जयंती पर विशेष : मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू पर जब कसा था तंज , देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर छोड़ दी थी डिप्टी कलेक्टरी

‘बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं, तुझे ऐ जिंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं’…. मशहूर शायर रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी की ये पंक्तियां उनकी संजीदगी और वक्त के तकाजे को परखने की क्षमता को बयां करती हैं। अपनी बेबाकी के लिए भी मशहूर फिराक ने यह रचना पं. जवाहर लाल नेहरू से मिलने के बाद तंज कसते हुए रची थी। (आज) शुक्रवार को इनकी जयंती है।
बिना लाग-लपेट अपने विचार, एहसास और अनुभव का इजहार शायरी के जरिए प्रस्तुत करके फिराक साहब अदब की दुनिया के फनकार बन गए, लेकिन उनकी याद महफिलों व मुशायरे के मंचों तक ही सिमट कर रह गई है। विडंबना ही है कि गोरखपुर का नाम देश-दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने वाले शायर फिराक साहब की जयंती हो या पुण्यतिथि सिर्फ बातों में ही गुजर जाती है। हुक्मरान से लेकर अफसरान तक किसी को फुरसत नहीं जो उनकी याद में कोई ऐसा भव्य आयोजन करे, जो उनको सच्ची श्रद्धांजलि देने के साथ ही नई पीढ़ी को फिराक साहब के जीवन, संघर्ष और देश के लिए किए गए बलिदान से रूबरू करा सके।
बारिश के कारण कुछ दिन पहले फिराक साहब की पुश्तैनी मकान का कुछ हिस्सा गिर गया।
बारिश के कारण कुछ दिन पहले फिराक साहब की पुश्तैनी मकान का कुछ हिस्सा गिर गया। – फोटो : अमर उजाला।
रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी की जयंती यानी 28 अगस्त सामान्य तारीखों की तरह गुजर जाने का सबसे बड़ा मलाल गोला क्षेत्र के बनवारपार गांव के लोगों को रहता है। यह वही बनवारपार गांव की धरती है जहां मुंशी गोरख प्रसाद इबरत के पुत्र के रूप में उनका जन्म 28 अगस्त 1896 को हुआ था। इनके पिता इबरत साहब पेशे से वकील थे, लेकिन शायरी में भी उनका बड़ा दखल था। फिराक साहब ने इलाहाबाद अब प्रयागराज विश्वविद्यालय से से पढ़ाई पूरी की।
वर्ष 1930 में अंग्रेजी साहित्य से एमए करने के बाद फिराक साहब ने प्रयागराज विश्वविद्यालय में बतौर शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली। पिता से विरासत में मिली शायरी की खूबी इस कदर परवान चढ़ी कि अंग्रेजी पढ़ने और पढ़ाने वाले फिराक साहब ने कालजयी रचनाओं के लिए ज्ञानपीठ सहित कई बड़े सम्मान हासिल तो किए ही साथ ही आने वाली नस्लों को पढ़ने और मनन करने के लिए बहुत कुछ छोड़ गए। 86 वर्ष की अवस्था में 3 मार्च 1982 को फिराक साहब अंतिम सांस लेकर दुनिया से रुखसत हो गए। देश-दुनिया में गोरखपुर का माथा ऊंचा करने वाले फिराक साहब का उपेक्षित हाल में नजर आने वाला पैतृक आवास देखकर बनवारपार के लोगों को काफी मलाल और पीड़ा होती है। जयंती हो या पुण्यतिथि फिराक लाइब्रेरी के पास लगी उनकी प्रतिमा पर फिराक साहब सेवा संस्थान के अध्यक्ष छोटेलाल यादव सरीखे कुछ लोगों के अलावा कोई भी जिम्मेदार श्रद्धा के दो फूल तक चढ़ाने नहीं पहुंचता।

देशप्रेम की भावना में छोड़ी डिप्टी कलेक्टरी

प्रयागराज विश्वविद्यालय में पढ़ने के बाद फिराक साहब ने प्रशासनिक सेवा में भी सफलता का परचम लहराया था। वर्ष 1918 में उन्हें डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनाती मिली, लेकिन देश में धधक रही आजादी के आंदोलन की ज्वाला ने उनकी क्रांतिकारी तबियत को सरकारी नौकरी में रमने नहीं दिया। आखिरकार 28 नवंबर 1920 को उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया और आजादी के जंग में पूरी शिद्दत के साथ कूद पड़े। फिराक साहब गोरखपुर में असहयोग आंदोलन की अगुआई करने वाले बाबा राघवदास के हम कदम बन गए। इस दौरान चार महीने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें भाषण देने पर प्रतिबंध लगा दिया।
वर्ष 1921 में पंडित जवाहर लाल नेहरू के पूर्वांचल दौरे के समय धारा 144 लगाकर फिराक साहब को भाषण देने से रोका गया, लेकिन इसी क्रम में बस्ती में हुई विशाल जनसभा में फिराक साहब अध्यक्षता करने में सफल रहे। प्रयागराज में आजादी की जंग से जुड़ी बैठक में पूर्वांचल के नेतृत्व करते समय फिराक साहब को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। आजादी की जंग में कदम से कदम मिलाकर चलने वाले फिराक साहब को अंग्रेजी हुकूमत ने जेल तो भेज दिया लेकिन उनके अंदर से देश प्रेम की भावना को तितर-बितर नहीं कर सके। दु:खद यह है कि जिस फिराक साहब ने सक्रिय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की जिम्मेदारी के साथ ही अपनी कालजयी रचनाओं से विश्वपटल पर देश का नाम रोशन किया, उनका ही पैतृक गांव व आवास उपेक्षा का शिकार है।
अमर उजाला से साभार

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betvole giriş
betvole giriş
fenomenbet
betvole giriş
betkanyon
betvole giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
safirbet giriş
safirbet giriş
betvole giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
timebet giriş
maxwin
realbahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
timebet giriş
timebet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
vaycasino giriş
meritking giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
kulisbet giriş
mariobet giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
grandbetting giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betvole giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betwild giriş
betwild giriş
imajbet giriş
damabet
betnano giriş
betnano giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
vaycasino giriş
betvole giriş
betpark giriş
betvole giriş
betpark giriş
celtabet giriş
betpipo giriş
norabahis giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
superbahis giriş
perabet giriş
perabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
maxwin giriş
maxwin giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpas giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betplay giriş
betplay giriş