गतांक से आगे…

विद्वान मौलाना ने जानवरों के प्रति इस्लाम किस तरह से सजग है और दया का भाव रखता है, इसे कुरान की आयतों से और हदीसों से समझाने का प्रयास किया है।

मसअरी कहते हैं-इसलाम में जानवर को मारते समय कुछ सख्त हिदायतें दी गयीं हैं। मारते समय किस तरह और किन बातों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कम से कम कष्ट देकर मारा जाए। वे एक हदीस को उद्धृत करते हुए लिखते हैं कि रसूले खुदा पैगंबर साहब फरमाते हैं-दया हर जीव के साथ आवश्यक है। जो करो, ठीक और बिलकुल सही करो। इसलिए यदि तुम्हें किसी जानवर को मारना है तो उसे सबसे बेहतर तरीके से मारो। उसे काटना चाहते हो तो अपने औजार इतने तेज रखो कि जानवर को कम से कम तकलीफ हो।

1.134 पैगंबर साहब का कहना है कि किसी भी जानवर को मारने की प्रतीक्षा में रखना सख्त मना है।

1.135 पैगंबर साहब ने सख्ती के साथ इनकार किया है कि किसी चौपाए चार पैर वाले पशु, उड़ने वाले पक्षी अथवा किसी भी जानदार को खूंटे से बांधकर या पिंजरे में बंद करके मत मारो। मारने से पूर्व उसे स्वतंत्र करो।

1.36 एक व्यक्ति अपना चाकू एक पशु के सामने तेज कर रहा था, तब आपने फरमाया कि क्या तुम इस पशु को दो बार मारना चाहते हो?

1.37 हजरत अली फरमाते हैं कि एक भेड़ को दूसरी भेड़ के सामने मत काटो। भेड़ को अंग्रजी में शीप और अरबी में दुंबा कहते हैं।

1.38 हजरत उमर (द्वितीय खलीफा) ने एक बार एक आदमी को देखा, जो एक भेड़ को काटने जा रहा था, उसे पेट भर के पानी नही पीने दिया। हजरत उमर ने उस आदमी को अपने कोड़े से बहुत मारा और कहा-जाओ कमबख्त, इसे मारने से पहले ठीक से पानी पिलाओ। जानवर को प्यास मारना ईश्वर के सम्मुख अपराध है।

1.139 हजरत उमर के ही विषय में एक दूसरा उदाहरण है-एक आदमी अपने हाथों से चाकू तेज कर रहा था और अपने एक पांव से एक भेड़ को दबा रखा था। हजरत उमर ने उस व्यक्ति को अपने कोड़े से इतना पीटा कि वह जमीन पर गिर पड़ा और भेड़ उसके चंगुल से भाग निकली।

पैंगंबर साहब जानवर को केवल शारीरिक कष्ट से ही नही बचाते थे, बल्कि उस पर किसी तरह का मानसिक त्रास न हो, इसका भी पूरा ध्यान रखते थे। आप हमेशा कहा करते थे कि अनेक पशु और पक्षी इनसान के साथ रहते हैं। इनमें कुत्ते, बिल्ली और वे जानवर भी शामिल हैं, जो हमें दूध देते हैं। परिंदे में हम पोपट और कबूतर जैसे पक्षी पालते हैं। वे सब हमारे समाज के अंग हैं, इसलिए मनुष्य को चाहिए कि उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह रखे। जो गली और मौहल्लों में घूमते हें, उनके साथ कोई मारपीट न हो। यदि आप इनकी रक्षा न करेंगे तो मानव कहलाने योग्य नही रहेंगे।

पैगंबर साहब अपने घोड़े से बड़ा प्रेम करते थे। उसे परिवार के सदस्य की तरह से पालते थे। एक बार आपकी पत्नी हजरते आइशा ने ऊंट के साथ सख्ती की तो आपने उन्हें रोका था। आपने घोड़े के सामने के बाल और उसकी पूंछ काटने की सख्ती से मनाही की है। जो व्यक्ति यह कृत्य करता है उस पर  आपने लानत अभिशाप भेजी है।

एक बार कुछ लोग पैगंबर साहब के साथ यात्रा कर रहे थे। उनकी अनुपस्थिति में कुछ लोगों को एक चिड़िया, जिसे हुमारा कहा जाता है, उसके दो बच्चों के साथ दिखाई पड़ी। साथ में यात्रा कर रहे लोगों ने उसके बच्चे ले लिये। अब चिड़िया उन लोगों के सिर पर मंडराने लगी, जो उसके बच्चे उठा लाए थे। पैगंबर साहब जब वापस आए तो आपने पूछा कि इस चिड़िया का दिल किसने दुखाया है? मालुम पड़ने पर आपने कहा, उसके बच्चे जहां से लाए थे वहीं रख आओ। इसी प्रकार की एक घटना एक घोंसले से अंडे चुरा लेने की भी है।

जब आपको मालूम हुआ तो कहा-फौरन जाकर उसके अंडे घोंसले में रख आओ। आप हमेशा फरमाते थे-इम इनसानों जैसा दिल इन प्राणियों का भी है। उन्हें दुखी मत करो, बल्कि उनके दुख में शामिल होकर उन्हें सांत्वना प्रदान करो।

क्रमश:

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