दूध शाकाहार या मांसाहार

शरीर ,स्वास्थ्य, सौंदर्य पर महत्वपूर्ण लेख
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दूध को क्या माना जाये? शाकाहार या मांसाहार| शाकाहार का मतलब है जो पेड़ पौधे फूल पत्तियों से प्राप्त किया जाए| मांसाहार, मांस के रूप में जानवरों से प्राप्त किया जाता है जानवरों के अंग उत्तक आदि से | गाय भैंस का दूध जानवरों से ही मिलता है पेड़ पौधों से प्राप्त नहीं होता, इसी को दृष्टिगत रखते हुए दूध को मांसाहारी आहार मानने वाले पक्ष के व्यक्ति दूध के मांसाहारी आहार होने के संबंध में चार सिद्धांत मुख्य तौर पर देते है | हम समीक्षा करते हैं क्या उनके तर्क वाजिब है ?क्या दूध मांसाहारी उत्पाद है?|

(1) दूध जानवरों से प्राप्त होता है इसलिए दूध मांसाहार है|

( 2) दूध में वसा होती है जो मांस में भी होती है इसलिए दूध मांसाहार है|

(3) दूध में अमीनो एसिड विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व होते हैं वह मांस मे भी होते हैं|

(4) दूध में पस सेल्स होती हैं, जो मांस में भी होती हैं|

दूध को मांसाहार कि श्रेणी में गिनने वाले लोगों के उपरोक्त चार बहु प्रचलित तर्कों की बिंदुवार समीक्षा करते हैं| जिस से भलीभांति स्पष्ट हो जाएगा दूध मांसाहार है या शाकाहार | दूध जानवरों से प्राप्त होता है इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन दूध जानवरों के मांस से प्राप्त नहीं होता, मांसाहार में जानवरों के किसी अंग को आहार के रूप में खाया जाता है इसके लिए पशु को मारा जाता है| लेकिन दूध प्राप्ति के लिए जानवर को मारने की आवश्यकता नहीं पड़ती किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं है| दूध जानवरों के शरीर का ऐसा हिस्सा है जिसे आहार के रूप में प्राप्त करने से जानवरों की शारीरिक संरचना बायोकेमिस्ट्री पर कोई स्थाई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.. बल्कि समय पर पशुओं का दूध ना निकाले तो जानवरों को असहजता होती है| दूध में केसीन जैसी प्रोटीन लेक्टोज जैसी प्राकृतिक शर्करा होती है जो मांस में नहीं पाई जाती… दूध, शाकाहारी दूध देने वाले जानवर की मांसपेशियों रक्त का सार नहीं है, अपितु जानवर जो चारा दाना आदि खाता है उसका सार है| दूध देने वाले पशुओं के दूध से जो वह खाता है उसी चारे आदि की गंध आती है ना कि मांस रक्त की गंध| दूध के हेमेटोलॉजी लैबोरेट्री टेस्ट में आज तक दूध में जानवर के रक्त की लाल रक्त कणिकाएं नहीं पाई गई… दूध में वसा की मात्रा पशु के शरीर में उसके अंगों के अनुपात में नाम मात्र की होती है….. प्राकृतिक दूध आदि के माध्यम से वसा का सेवन अपने आप में मांसाहार नहीं है…. रही बात दूध में amino acid vitamin B12 यह सभी पोषक तत्व अपने आप में मांसाहार नहीं है| वसा आदि की तरह आहार का प्रमुख हिस्सा है जो दूध के माध्यम से ही किसी भी शिशु को उसकी माता से मिलता है…. दूध को मांसाहारी मानने वाले लोग कहते हैं दूध में कुछ विशेष सेल्स पाई जाती है… सच्चाई तो यह दूध में अंडा मांस आदि की तरह बायोसेंस cells नहीं है अर्थात जिनके सेवन से प्रत्यक्ष तौर पर जीवन चलता हो… जैसे अंडे कि तरुण जर्दी से पक्षी चूजा पोषण प्राप्त करता विकसित होता है |असल समस्या यहां से शुरू होती है अंग्रेजी की इन दो शब्दों से शुरू होती है शाकाहार को वेजिटेरियन ,मांसाहार को नॉन वेजिटेरियन कहा जाता है इन दो शब्दों से ही हम अन्य आहार को परिभाषित करते हैं अर्थात जो पेड़ पौधों से प्राप्त नहीं होता वह सब मांसाहार है | जबकि यह कोरा भ्रम है यही प्रथम व अंतिम सत्य है विज्ञान दूध को लेक्टो वेजिटेरियन कहता है अर्थात शिशु आहार( Baby food)दूध को मानता है| आहार की ऐसी अनोखी श्रेणी जो प्राथमिक प्रत्यक्ष तौर पर पेड़ पौधों से प्राप्त नहीं होता लेकिन पोषक तत्वों से भरा हुआ संपूर्ण आहार है किसी भी जीवधारी के शारीरिक मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी है किसी भी आयु में जिसका सेवन किया जा सकता है, जो जानवरों से तो प्राप्त होता है लेकिन मांसाहार की श्रेणी में नहीं है| हम जब दूध के सेवन की बात करते हैं तो गाय भैंस भेड़ बकरी आदि के दूध की बात करते हैं| इन सभी दूध देने वालों पशुओं के दूध में वसा प्रोटीन विटामिन मिनरल अन्य पोषक तत्व अलग-अलग अनुपात में पाए जाते हैं| दुनिया में सर्वाधिक गाय के दूध का सेवन किया जाता है, पूर्वी एशियाई देशों में दक्षिण एशियाई देशों में गाय से अधिक भैंस के दूध का सेवन किया जाता है…. प्राचीन काल में भारत में केवल गाय का ही दूध का सेवन किया जाता था गाय का दूध जितना बुद्धि आरोग्य बलवर्धक है उतना भैंस का दूध नहीं है भैंस के दूध को हमारे यहां तामसिक माना जाता था| दूध केवल शाकाहारी जंतुओं का ही सेवन किया जाता है उसमें भी कुछ खास चुनिंदा जानवर है इसमें भी गाय भेड़ बकरी ऊंटनी आदि के दूध की अलग-अलग तासीर व शरीर पर प्रभाव है आयुर्वेद की दृष्टि से, लेकिन सभी में यही उभयनिष्ठ है कि दूध संपूरक आहार है दूध मांसाहार नहीं है, दूध शाकाहार खाने वाले शाकाहारी जानवरों से प्राप्त एक सफेद अमृत है जिसमें भगवान ने सभी पोषक तत्व कूट-कूट कूट कर भर दिए हैं| जैसा जानवर खाएगा वैसा ही दूध में प्रभाव आएगा यही कारण है मांस खाने वाले मांसाहारी जंतु के दूध का सेवन नहीं किया जाता| शाकाहारी दूध देने वाले जंतुओं में भी गाय का दूध हमारे पूर्वजों ने सर्वश्रेष्ठ माना जिसे आज पूरी दुनिया मान रही है, क्योंकि गाय जब जंगल में में चरती है तो अन्य घास फूस खाने वाले जंतुओं की अपेक्षा बहुत ही बुद्धिमता चुन चुन कर बल वीर्य तेज आरोग्य वर्धक दायक जड़ी-बूटियों घास फूस को ही खाती है , जबकि भैंस भेड़ बकरी हानि प्रद चारे घास फूस को भी चट कर जाती है, वैसा ही प्रभाव उनके दूध पर आता है| शाकाहारी जानवरों के दूध में सर्वाधिक मूल्य गाय के दूध का ही है जापान की विशेष गाय के दूध जिसे नाकाजवा मिल्क बोला जाता है उसका मूल्य ₹8000 प्रति लीटर है जिसका दूध सप्ताह में केवल एक बार लिया जाता है वह भी सुबह के समय उस दूध में Melatonin नामक प्राकृतिक हार्मोन विशेष मात्रा में होता है जो चिंता तनाव अवसाद को दूर करता अच्छी नींद के लिए जिम्मेदार होता है |

इस लेख का निष्कर्ष निकालते हुए मूल विषय की और लौटते हैं तो दूध पूरी तरह से शाकाहारी जानवरों से प्राप्त शाकाहार के समान सात्विक स्वास्थ्य वर्धक प्रभाव लिए हुए एक संपूर्ण आहार है , जो जानवरों के रक्त मांस का सार नहीं अपितु जानवर जो रसीला पोस्टिक चारा दाना खाता है उसका सार है जो उसकी दूध ग्रंथियों में बनता है तथा secretion होता है|

*आर्य सागर खारी*✍✍✍

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