Categories
देश विदेश

चीन मोदी को लेकर बेचैन तो है

 

वर्तमान दौर में पूरा विश्व कोरोना से पैदा हुई परिस्थितियों व संकटो से छुटकारा पाने के लिए संघर्षरत है, वहीं दूसरी ओर चीन अपनी विस्तारवादी सोच को लेकर जगह जगह अपनी सैन्य गतिविधियों को संचालित कर रहा है .चीन भारत से सटी पूर्वी और उत्तरी पूर्वी सीमाओं पर कई बार हरकत कर चुका है ,कुछ दिन पहले ही चीन ने गलवान घाटी में शांति भंग की थी ।चीन अपने कई पड़ोसी देशों पर अपना हुक्म जताना चाहता है ।ऐसा करके वह अपनी वैश्विक शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है। दक्षिण चीन सागर में भी चीन की दखलांदाजी लगातार बढ़ रही है ।इस क्षेत्र पर वह अपना दावा ठोकना चाहता है। इस क्षेत्र से संबंधित देशों के समक्ष दोहरी चुनौती पेश कर रहा है। जो पूरी दुनियां के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
2020 के शुरुआती महीनों में चीन के द्वारा इस संवेदनशील क्षेत्र में सैन्य अभ्यास के आयोजन के साथ ही बड़े पैमाने पर सैन्य टुकड़ियों की तैनाती की गई। तब वियतनाम के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कुछ दिन पूर्व ही चीन के तटरक्षक बल के एक पोत द्वारा दक्षिण चीन सागर के पार्सल द्वीप समूह में वियतनाम की मछली पकड़ने वाली नौकाओं को डुबाने का प्रयास किया गया। निश्चित रूप से चीन की यह हरकत वियतनाम की संप्रभुता का उल्लंघन कर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली है।

दक्षिणी चीन सागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम कारोबारी इलाक़ा है. दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फ़ीसदी हिस्सा यहां से गुज़रता है.
विदित है कि दक्षिण चीन सागर  दुनिया का सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक है और यह व्यापार तथा परिवहन के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। दक्षिण चीन सागर में स्थित विभिन्न देशों  के बीच इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करने को लेकर तनाव व्याप्त है। चीन से लगे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों और उनके द्वीपों को लेकर भी चीन और वियतनाम , इंडोनेशिया , मलेशिया, ब्रूनेई दारुसलाम, फिलीपींस, ताइवान , स्कार्बोराफ रीफ आदि क्षेत्रों को लेकर विवाद है। लेकिन मूल विवाद की जड़ है दक्षिण चीन सागर में स्थित स्पार्टली और पार्सल द्वीप, क्योंकि यह दोनों द्वीप कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से परिपूर्ण हैं।

सिंगापुर से लेकर ताइवान की खाड़ी तक लगभग 3.5 मिलियन वर्ग किमी क्षेत्र में फैला दक्षिण चीन सागर का दक्षिणी भाग चीन की मुख्य भूमि को स्पर्श करता है, तो वहीं इसके दक्षिण–पूर्वी हिस्से पर ताइवान की दावेदारी है।दक्षिण चीन सागर का पूर्वी तट वियतनाम और कंबोडिया को स्पर्श करते हैं। पश्चिम में फिलीपींस है, तो दक्षिण चीन सागर के उत्तरी इलाके में इंडोनेशिया के बंका व बैंतुंग द्वीप हैं।

विवादित दक्षिण चीन सागर

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, पूरे दक्षिणी चीन सागर पर जापान का क़ब्ज़ा था. लेकिन विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद चीन ने इस पर अपना अधिकार जताया ,
चीन गणराज्य की कुओमितांग सरकार ने 1947 में पहली बार  ‘इलेवन डैश लाइन’ के माध्यम से दक्षिण चीन सागर में अपने दावों को प्रस्तुत किया था।चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा मुख्य भूमि चीन पर अधिकार करने और वर्ष 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का गठन करने के बाद टोंकिन की खाड़ी को इलेवन डैश लाइन से बाहर कर दिया गया। परिणामस्वरूप इलेवन डैश लाइन को अब ‘नाईन डैश लाइन’
के नाम से जाना जाने लगा।  ये सभी नौ  रेखाएं आभासी है। चीन द्वारा वर्ष 1958 के घोषणापत्र में नाईन डैश लाइन के आधार पर दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर अपना दावा किया गया।चीन के इस दावे से वियतनाम के स्पार्टली और पार्सल द्वीप समूह नाईन डैश लाइन के अंतर्गत समाहित हो गए, जो चीन और वियतनाम के बीच विवाद का मुख्य कारण है। इसी प्रकार नाईन डैश लाइन के अंतर्गत फिलीपींस का स्कारबोरो शोल द्वीप, इंडोनेशिया का नातुना सागर क्षेत्र शामिल है।वर्ष 1949 से ही चीन नाइन-डैश लाइन के माध्यम से दक्षिण चीन सागर के लगभग 80 प्रतिशत भाग को अपना मानता है।

अमरीका से नहीं टकराता चीन ?

चीन को प्राकृतिक तेल की आपूर्ति मध्य पूर्व के देशों द्वारा मलक्का जलडमरुमध्य के रास्ते से होती है। अक्सर अमेरिका चीन को चेतावनी देता है कि वह मलक्का जलडमरुमध्य को बंद कर देगा जिससे चीन की ऊर्जा आपूर्ति रुक जाएगी। यही कारण है कि चीन को दक्षिण चीन सागर में अपने भू-आर्थिक और भू-सामरिक हित दिखाई देते हैं । दक्षिण चीन सागर में 11 बिलियन बैरल प्राकृतिक तेल के भंडार हैं, 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस के भंडार है , जिसके 280 ट्रिलियन क्यूबिक फीट होने की संभावना व्यक्त की गई है।यह क्षेत्र ऐसा हैं जहाँ से हर वर्ष 5 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार होता है। यहाँ  स्थित महत्त्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों के जरिये अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सुगमता होती है।यह जानना भी जरूरी है कि सिर्फ़ तेल और गैस ही नहीं, दक्षिणी चीन सागर में मछलियों की हज़ारों नस्लें पाई जाती है। दुनिया भर के मछलियों के कारोबार का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा या तो दक्षिणी चीन सागर से गुज़रता है, या वहाँ पाया जाता है। इसलिये चीन इस प्रकार के क्षेत्रों में विशेष रुचि रखता है।

दक्षिण चीन सागर विवाद में भारत की भूमिका

भारत साफतौर यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी , 1982’ के सिद्धांतो के आधार पर दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र व निर्बाध जल परिवहन का समर्थन करता है।
दक्षिण चीन सागर विवाद को भारत के लिये पूर्वी एशियाई पड़ोसियों के साथ रिश्ते सुधारने के महत्त्वपूर्ण मौके के रूप में देखा जाता रहा है।

अमेरिका के साथ मिलकर भारत इस क्षेत्र के लोगों की क्षमताओं में वृद्धि करने में सहायता कर  सकता है तथा इस प्रकार इस क्षेत्र में चीन की बढ़ रही आक्रामक भूमिका को संतुलित करने में भारत-अमेरिका का महत्त्वपूर्ण भागीदार बन सकता है।
दक्षिण चीन सागर विवाद ने इस विवाद में शामिल क्षेत्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है, इन देशों का चीन के साथ व्यापार प्रभावित हुआ है।  यदि इस क्षेत्र में तनाव इसी प्रकार जारी रहा तो शिपिंग और आर्थिक गतिविधियाँ बाधित हो जाएंगी।पूर्वी एशिया में अमेरिका की व्यापक सुरक्षा प्रतिबद्धताएँ हैं।अमेरिका ने इस क्षेत्र के कई देशों जैसे फिलीपींस, सिंगापुर और वियतनाम के साथ सुरक्षा गठबंधन भी कर रखा है। इसलिये इन देशों का चीन के साथ कोई भी विवाद अमेरिका को सीधे प्रभावित करता है।

भारत को चीन और पूर्वी एशियाई देशों विशेषकर दक्षिण चीन सागर विवाद में उलझे देशों के साथ मधुर संबंध रखते हुए कूटनीतिक दृष्टि से अत्यधिक सावधानी बरतते हुए इन देशों के मामलों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप किये बिना अपने आर्थिक और राजनीतिक हितों को साधते हुए इस क्षेत्र में स्वयं को एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है।

कोई भी देश इस क्षेत्र की पेट्रोलिंग में अमरीका का साथ नहीं देता, एक बार ब्रिटेन ने दिया था, लेकिन अन्य देश बस अमेरिका को सैद्धांतिक सहमति ही देते हैं. साल 2015 में जब ओबामा भारत आए थे तब एक साझा बयान में भारत ने कहा था कि वो दक्षिणी चीन सागर में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है,”

चीन ने इस बयान के बाद आक्रोश दिखाया था. भारत  सीधे तौर पर चीन का नाम ना लेकर विस्तारवादी सोच को इशारों इशारों में कह देता है ।  चीन द्वारा गलवान घाटी में की गई हिंसक झड़प को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को इशारों इशारों के दो टूक से समझा दिया. कई बार भारत ने बिना नाम लिए चीन के विस्तारवाद की बात की है और दक्षिण चीन सागर की तरफ़ इशारा किया है.

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betbox giriş
betbox giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
rinabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
sekabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
romabet giriş
romabet giriş
betnano giriş
sekabet giriş
sekabet giriş
nitrobahis giriş
nitrobahis giriş
winxbet giriş
yakabet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
batumslot giriş
batumslot
batumslot giriş
galabet giriş
galabet giriş
betplay giriş
betplay giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
galabet giriş
galabet giriş
betamiral giriş
betamiral giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
galabet giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
Betgar güncel
Betgar giriş
Betgar giriş adresi
betnano giriş
galabet giriş
betnano giriş
betnano
betnano giriş
norabahis giriş