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आरपी एजुकेशन सोसायटी रोहतक और सहयोगी संस्था गढ़ी सापला के संयुक्त तत्वाधान में “कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन : चुनौतियां और अवसर” विषय पर हुई वेबीनार संपन्न

रोहतक। ( संवाददाता ) 4 जुलाई 2020 आर पी एजुकेशन सोसायटी रोहतक और सहयोगी संस्था गढ़ी सांपला के संयुक्त तत्वावधान में ‘कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन : चुनोतियाँ एवम् अवसर’ विषय पर वेबिनार का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया । सभी विशेषज्ञों व प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए आर पी एजुकेशन सोसायटी के निदेशक डॉ सतीश कुंडू ने विषय को आंकड़ो सहित प्रस्तुति के साथ कंप्यूटर उपलब्धता इन्टरनेट कनेक्टिविटी व बिजली आपूर्ति आदि को रेखांकित किया।
वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए समाजशास्त्र के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर डॉ जितेंदर प्रसाद ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न विशेषज्ञों – शिक्षा, मनोविज्ञान, अध्यापक, अभिभावक व छात्र पक्ष रखने के लिए आमन्त्रित किया।

रिटायर्ड प्रोफेसर हेमंत लता शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन के कारण हर घर ने कक्षा का रूप ले लिया है तथा बच्चों ने घर पर रहकर ही अपनी पढ़ाई जारी रखी हुई है । साथ ही प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि हमें ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन एजुकेशन का समन्वय करके ही आगे बढ़ना होगा।

डॉ सोनिया मलिक विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक ने मुख्य तौर पर बच्चों की समस्याओ, काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य, रूचि पैदा करने आदि विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला व अभिभावकों तथा छात्रों से आह्वान किया कि वे ये गुणवत्तापरक समय अच्छे से बिताये जुडकर रहें व हम सब मिलकर ही इस समस्या से निजात पा सकते हैं। उन्होंने विभाग द्वारा शुरू की गयी टेलीकाउंसलिंग सुविधा के बारे में विस्तार से बताया।
प्रोफेसर आशीष दहिया होटल टूरिज्म प्रबंधन संस्थान महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक ने कोविड -19 का परिणाम दायरा रहित शिक्षा का प्रचलन बताया उन्होंने शिक्षाविदों व अध्यापकों को भी तकनीक से जुड़ने का आह्वान किया तथा ऑनलाइन एजुकेशन को अपनी शिक्षण प्रणाली का हिस्सा बनांने पर जोर दिया और विभिन्न मंचों पर ऑनलाइन एजुकेशन की सार्थकता को सुदृढ़ करने को रेखांकित किया । प्रोफेसर दहिया ने ऑनलाइन एजुकेशन के लिए रेगुलेटरी बॉडी बनाने की ज़रूरत पर बल दिया।
इसी कड़ी में मॉडल संस्कृति स्कूल संघी के प्राचार्य जयपाल दहिया ने अपने उद्बोधन में सरकारी स्कूलों में वैकल्पिक साधनों के द्वारा कैसे गाँव के बच्चों को इस प्रकार शिक्षण विधि से जोड़ा जा रहा है, पर ध्यानाकर्षण किया । पाठ्यक्रमों को अभिनव तरीके से प्रस्तुत करके कुछ अध्यापक बहुत ही सराहनीय कार्य कर रहे हैं । उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ऐसे अनुभवो का लाभ अन्य स्थानों पर भी लिया जा सकेगा ताकि पढ़ाई को रुचिकर बनाया जा सके।
क्रॉस एंड क्लाइंब की निदेशक व गत 20 वर्षों से अध्यापन क्षेत्र से जुडी सुनीता कुंडू ने ऑनलाइन एजुकेशन से जुडी चुनोतियों को अवसर के रूप में लेने पर बल दिया । सुनीता ने अपना अनुभव साझा करते हुए उनके संस्थान के एक मेधावी छात्र का लिखित परीक्षा में सफल होने के बावज़ूद ऑनलाइन की अनभिज्ञता के चलते ऑनलाइन साक्षात्कार में अनुतीर्ण होने के सबक को सुनहरे अवसर में ऑनलाइन एजुकेशन का ज्ञान होना, की संज्ञा दी ।
वेबिनार में कुल 96 प्रतिभागी जिनमें मुख्यतः अभिभावक, अध्यापक, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सत्यपाल खोखर, बल्ले राम, सरपंच सुशील, श्रीभगवान पहल, सुमन, दादरी से रामचंदर पुनिया, लन्दन से शोधार्थी उमंग, अमृतसर से काउंसेलर नेहा, बलविंदर कौर, ज्योति, प्रवीन, नीरज दहिया, सत्येंदर मान, विकास त्रिवेदी, गौरव व अन्य प्रबुद्धजन रहे।
सभी विशेषज्ञों के व्याखयान के उपरांत प्रश्नोतर काल काफी अच्छा रहा तथा उसमें भी अध्यापकों के साथ -2 अभिभावकों की भी ऑनलाइन एजुकेशन के दौरान भूमिका पर जिम्मेवारी की चर्चा सुर्ख़ियों में रही वरिष्ठ प्रोफेसर जितेंदर प्रसाद ने अपने अध्यक्ष भाषण को सार रूप देते हुए कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन को ही शिक्षा जारी रखने का एकमात्र विकल्प बताया।
वेबिनार के समापन से पहले संस्था के परियोजना प्रमुख सुनील कुमार तोमर ने सभी आमंत्रित विशेषज्ञों, अध्यापक, छात्र व अभिभावकों का धन्यवाद किया व वेबिनार के सफल आयोजन के लिए आर पी एजुकेशन सोसायटी, सहयोग व क्रॉस एंड क्लाइंब टीम के प्रति अपना आभार प्रकट किया।

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