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डॉ सोमदेव शास्त्री द्वारा ननोरा मध्यप्रदेश में तीन दिवसीय सामवेद पारायण यज्ञ का आयोजन

ओ३म्

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आर्यसमाज वेद वर्णित ईश्वर, जीव, प्रकृति व सृष्टि के नियमों में विश्वास रखता है। वह ऋषि प्रणीत विस्तृत वैदिक साहित्य जो वेदानुकूल है, उसे स्वीकार कर उसका भी प्रचार प्रसार करता है। वैदिक साहित्य में प्रमुख ग्रन्थों में 6 दर्शन, उपनिषद तथा विशुद्ध-मुनस्मृति ग्रन्थ आदि अनेक प्रसिद्ध हैं। इनके अतिरिक्त ऋषि दयानन्द के सभी ग्रन्थ यथा सत्यार्थप्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, संस्कारविधि, आर्याभिविनय, ऋग्वेद-यजुर्वेद भाष्य आदि भी वेदानुकूल वैदिक साहित्य में सम्मिलित हैं। वेदों से ईश्वर, जीवात्मा, प्रकृति व सृष्टि का सत्य ज्ञान प्राप्त होता है। वेद ईश्वरोपासना तथा अग्निहोत्र-यज्ञ का विधान भी करते हैं। ऋषियों की मान्यता है कि मनुष्य को स्वर्ग अथवा सुखों की प्राप्ति के लिये यज्ञ वा अग्निहोत्र करना चाहिये। यज्ञ करने वाले मनुष्य को आरोग्य, सुख, समृद्धि व ज्ञानवृद्धि आदि अनेक लाभ होते हैं। प्राकृतिक वैदिक विधानों के अनुसार ब्राह्मण का प्रथम आवश्यक कर्तव्य है कि वह अपने घर पर यज्ञ करे तथा अपने यजमानों के घरों पर भी यज्ञ व संस्कार आदि कराये। सृष्टि के आरम्भ से अग्निहोत्र यज्ञ होता आ रहा है। महाभारत काल के बाद इसमें कुछ वेदविरुद्ध कृत्य किये जाने लगे थे। बहुत से लोगों ने इन अवैदिक कृत्यों का विरोध किया था। इस कारण से यज्ञ के प्रचार में कुछ अड़चने आयी। ऋषि दयानन्द की कृपा से वह सब अड़चने दूर हो गईं और यज्ञ-अग्निहोत्र का वेदानुकूल सत्यस्वरूप पुनः उपलब्ध एवं प्रचारित हुआ। आज आर्यसमाज और इसके अनुयायियों द्वारा देश विदेश में दैनिक, साप्ताहिक व पाक्षिक यज्ञ किये जाते हैं। समय समय पर अनेक लोग व आर्य संस्थायें वेद पारायण यज्ञ आयोजित करते रहते हैं जिसमें बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित होते हैं। आर्यसमाज ने स्त्री व शूद्रों को भी वेद पढ़ने व पढ़ाने तथा सुनने व सुनाने का अधिकार भी दिलाया है। आर्यसमाज में स्त्रियां न केवल यज्ञ करती हैं अपितु यज्ञों की ब्रह्मा भी बनती हैं। वह वेदोपदेश देती हैं और देश में अनेक गुरुकुल चला रही हैं जहां से संस्कृतज्ञ वेद विदुषी युवतियां देश व समाज को हर वर्ष मिलती हैं। आर्यसमाज के गुरुकुलों में जन्मना दलित बन्धुओं के बच्चे भी वेद पाठ करते तथा वैदिक विद्वान बनते हैं। अनेक लोग विश्वविद्यालयों में आचार्य एवं आर्यसमाजों में पुरोहितों का कार्य भी करते हैं। आर्यसमाज एक क्रान्तिकारी संस्था है जिसने वैदिक धर्म के पुनरुद्धार सहित समाज सुधार, शिक्षा के प्रचार-प्रसार, गोरक्षा के प्रचार सहित देश की आजादी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रसिद्ध आर्य विद्वान डा. सोमदेव शास्त्री, मुम्बई से सारा आर्यजगत परिचित है। डा. सोमदेव शास्त्री जी देश भर में आयोजित किये जाने वाले वेद पारायण यज्ञों के ब्रह्मा बनते हैं। अब तक वह लगभग शताधिक वेद पारायण यज्ञों के ब्रह्मा बन चुके हैं। वह वैदिक परम्परा के शास्त्रज्ञ विद्वान हैं और आर्यजगत् के उच्च कोटि के शास्त्रज्ञ विद्वान पं. युधिष्ठिर मीमांसक जी के शिष्य रहे हैं। पं. युधिष्ठिर मीमांसक जी वेद एवं यज्ञों के मर्मज्ञ विद्वान थे। उन्होंने संस्कृत व्याकरण, ऋषि के ग्रन्थों का सटिप्पण सम्पादन सहित यज्ञों पर प्रभूत साहित्य भी लिखा है। डा. सोमदेव शास्त्री द्वारा आर्यसमाज में अनेक नये महनीय कार्य हुए हैं। आर्यसमाज के सिद्धान्तों व वैदिक परम्पराओं के वह रक्षक है। उन्हें आर्यसमाजों में यज्ञ के ब्रह्मा बनने एवं व्याख्यानों से जो दक्षिणा प्राप्त होती है उसे वह अपने निजी कार्यों में प्रयोग न कर आर्यसमाज के सार्वजनिक कार्यों व वेदपारायण यज्ञों में व्यय करते हैं। डा. सोमदेव शास्त्र जी का जन्म स्थान मध्यप्रदेश का ननोरा गांव हैं। यहां विगत 31 वर्षों से आप प्रत्येक वर्ष वेद पारायण यज्ञों का आयोजन कर रहे रहें हैं। देश के प्रसिद्ध विद्वानों व भजनोपदेशकों सहित ऋषिभक्तों को इस आयोजन में आमंत्रित किया जाता है। कई दिनों का कार्यक्रम होता है। सबके निवास एवं भोजन आदि की व्यवस्था उनके द्वारा की व कराई जाती है। अब तक वह अपने गांव ननोरा में 31 वेद पारायण यज्ञ करवा चुके है। इस वर्ष 32 वां वेद पारायण यज्ञ होना है। वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण यातायात एवं सार्वजनिक कार्यक्रम बन्द है। सीमित लोगों की उपस्थिति में ही कोई आवश्यक कार्य किया जा सकता है। डा. साहब ने इस स्थिति पर विचार किया और 50 या इससे कम सीमित लोगों की उपस्थिति में सामवेद पारायण यज्ञ का तीन दिवसीय आयोजन दिनांक 28 जून से 30 जून, 2020 तक अपने ग्राम ननोरा में करवा रहे हैं। इसकी प्रेरणा उन्हें जून, 2020 में सम्पन्न गुरुकुल पौंधा-देहरादून के वार्षिकोत्सव एवं इस अवसर पर सम्पन्न वेद पारायण यज्ञ से मिली है जिसे सोशल डिस्टेंशिंग के नियमों का पालन करते हुए फेसबुक द्वारा देश विदेश में लाइव प्रसारित किया गया था। इस उत्सव में अनेक विद्वानों सहित डा. सोमदेव शास्त्री जी के अनेक व्याख्यान कराये गये थे। नरोरा में आयोजित आगामी वृहद वेद पारायण यज्ञ में डा. सोमदेव शास्त्री जी ने निकटवर्ती विद्वान श्री प्रियवर्धन शास्त्री जी तथा आचार्य दयासागर जी को आमंत्रित किया है। भजन स्थानीय आर्य बहिनों व भाईयों के द्वारा सम्पन्न किये जायेंगे। हम आशा करते हैं कि डा. साहब इस आयोजन को फेसबुक आदि द्वारा लाइव प्रसारण करायेंगे जिसकी जानकारी हम उपलब्ध होने पर अपने मित्रों व पाठकों को उपलब्ध करायेंगे।

आगामी 28 से 30 जून, 2020 तक आयोजित किया जाने वाला सामवेद पारायण यज्ञ डा. सोमदेव शास्त्री द्वारा अब तक कराये गये वेद पारायण यज्ञों की श्रृंखला में बत्तीसवां पारायण यज्ञ होगा। डा. साहब का यह भी कहना है कि यज्ञ कराने का अधिकार अथवा यज्ञ का ब्रह्मा बनना उसी विद्वान के लिये उचित होता है जो गृहस्थी हो और जो अपने निवास पर भी यज्ञ करता हो। इस परम्परा व विधान से प्रेरणा लेकर ही आप अपने ग्राम में वेद पारायण यज्ञ कराते हैं। हमारे मित्रों से हमें जानकारी मिली है कि ननोरा गांव के अधिकांश लोग वैदिक विचारधारा को मानते हैं और वेद पारायण-यज्ञ में पधारने वाले अतिथियों को अपने निवास पर रखकर उनका आतिथ्य करते हैं। हमें यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि अतीत में इन पारायण यज्ञों में कीर्तिशेष स्वामी ओमानन्द सरस्वती, पं. युधिष्ठिर मीमांसक जी तथा डा. डा. भवानीलाल भारतीय जी आदि सम्मिलित हो चुके हैं। स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती जी भी अक्सर ननोरा के आयोजनों में सम्मिलित होते रहते हैं।

हम डा. सोमदेव शास्त्री जी को ननोरा में इन विपरीत परिस्थितियों में वृहद सामवेद पारायण यज्ञ का आयोजन करने के लिये शुभकामनायें देते हैं। ईश्वर उनके इस यज्ञ के आयोजन को सफल करें। यज्ञ से जो लाभ होते हैं वह सब डा. सोमदेव शास्त्री जी व उनके परिवार सहित इस यज्ञ में भावनात्मक रूप व भौतिक रूप से सम्मिलित स्थानीय सभी लोगों को भी प्राप्त हो। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

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