Categories
धर्म-अध्यात्म

हमें मनुष्य जन्म किस उद्देश्य एवं लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मिला ?

ओ३म्

============
हम मनुष्य के रुप में जन्में हैं। हमें यह जन्म हमारी इच्छा से नहीं मिला। इसका निर्धारण सृष्टि के रचयिता परमात्मा ने किया। परमात्मा ने अपनी सृष्टि व व्यवस्था के अनुसार हमारे माता-पिता के द्वारा हमें जन्म दिया है। हमारे माता-पिता व उनके सभी पूर्वजों सहित सभी प्राणियों को भी परमात्मा ही जन्म देता आया है। परमात्मा सच्चिदानन्दस्वरूप सत्ता है। उसका कोई कार्य अकारण व बिना प्रयोजन के नहीं होता है। उसने सप्रयोजन ही इस सृष्टि को बनाया है और हमें भी सप्रयोजन ही जन्म दिया है। माता-पिता अपनी सन्तानों को सुख देते हैं व उनके कल्याण व उन्नति की कामना करते हैं। परमात्मा भी सभी जीवों व सन्ततियों का माता व पिता है। अतः उसने हमें मनुष्य जन्म हमारे सुख व कल्याण के लिये ही दिया है। सुख व कल्याण की प्राप्ति के साधन शरीर को तो परमात्मा ने हमें दे दिया परन्तु हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने शरीर से अपनने जीवन में सुख व कल्याण को प्राप्त करने का प्रयत्न करें। परमात्माएक न्यायकारी सर्वशक्तिमान सत्ता है। वह सर्वान्तर्यामी होकर हमारे सभी कर्मों की साक्षी होती है और हमारे प्रत्येक कर्म का फल हमें प्रदान करती है। अतः परमात्मा का हमें मनुष्य जन्म देना तभी सफल हो सकता है कि जब हम अपने शरीर का सदुपयोग करते हुए अपने जन्म के कारण व उद्देश्य को जाने और साथ ही अपने लक्ष्य व उसके साधनों को जानकर उन्हें सिद्ध करने के लिये प्रयत्न व पुरुषार्थ करें।

मनुष्य जन्म लेकर हमें सर्वप्रथम जन्म के कारण पर विचार करना आवश्यक एवं उचित है। शास्त्रों में जन्म का कारण जीवात्मा के कर्मों को बताया गया है। कर्म आत्मा व शरीर से ज्ञान व स्वतन्त्रतापूर्वक की गई क्रियाओं को कहते हैं। यह मनुष्य जन्म हमारी जीवात्मा का प्रथम जन्म नहीं है। यदि प्रथम होता तो हम मनुष्य कदापि न बनते। कारण के बिना कार्य नहीं होता। जन्म हुआ है तो जन्म का कारण हमारे पूर्वजन्म के कर्म ही सिद्ध होते हैं। इस सिद्धान्त से जीवात्मा व मनुष्य का पूर्व व पुनर्जन्म भी सिद्ध होता है। शास्त्रीय ग्रन्थों को पढ़ने व विचार करने पर यह रहस्य विदित होता है कि हमारे मनुष्य जन्मों के सभी कर्मों का फल भोगने तथा दुःखों की पूर्ण निवृत्ति सहित सुख व मुक्ति प्राप्ति के लक्ष्य को सिद्ध करने के लिये ही इस शरीर को साधन बना कर कर्म करने के लिये परमात्मा से हमें मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है। यह भी ज्ञात होता है कि पूर्वजन्म में हमारे पाप व पुण्य बराबर अथवा पुण्य अधिक थे। मनुष्य जन्म तब होता है जब मनुष्य के पुण्य कर्म उसके पाप कर्मों से अधिक होते हैं। हम भाग्यशाली हैं कि हमें परमात्मा को बिना कोई मूल्य दिये सभी योनियों में श्रेष्ठ मनुष्य योनि में जन्म प्राप्त हुआ है। मनुष्य जन्म में सुख व दुःख का विवेचन करने पर सुखों की मात्रा अधिक और दुःखों की मात्रा कम पाई जाती है। इसके विपरीत मनुष्येतर सभी योनियों में दुःख व सुख समान व दुःख अधिक होते हैं। पशु व इतर योनियों में कुछ व अनेकानेक विशेषतायें भी होती हैं जो मनुष्य को सुलभ नहीं हैं परन्तु मनुष्य को सुख व उन्नति करने के साधन अन्य सब योनियों में सबसे अधिक उपलब्ध हंै। इसका एक कारण मनुष्य शरीर की आकृति है जिसमें वह दो पैरों पर खड़ा होकर चलता है तथा उसके दो हाथ भी हैं जिससे वह अपने ज्ञान के अनुरूप अनेकानेक कर्मों को करता है। मनुष्य के पास बुद्धि भी है जैसी व जितनी अन्य प्राणियों के पास नहीं है। अपनी बुद्धि वह ज्ञान प्राप्त कर उस ज्ञान के अनुरूप आचरण कर आध्यात्मिक, आधिभौतिक एवं आध्यात्मिक अनेकानेक दुःखों से अपनी रक्षा करता है तथा दुःखों से रहित मुक्ति के लिये प्रयत्न करते हुए उसे प्राप्त भी कर सकता है। जो मनुष्य मोक्ष प्राप्ति के लिये प्रयत्न करते हैं यदि उन्हें एक जन्म में मोक्ष न भी मिले तो भी परजन्म में उन्हें श्रेष्ठ स्थिति में मनुष्य का जन्म प्राप्त होता है जहां उसे ज्ञान प्राप्ति एवं सुख के अनेकानेक साधन प्राप्त होते हैं जो संसार के सभी जीवों से उत्तम सुख की स्थिति होती है।

मनुष्य को कर्तव्य व अकर्तव्य का बोध कराने के लिये सभी जीवों व सृष्टि के स्वामी परमात्मा ने सृष्टि के आरम्भ में ही वेदभाषा सहित उसके सभी कर्तव्यों का ज्ञान दिया था। वेदों की भाषा विश्व की सर्वोत्तम भाषा है तथा वेदों का ज्ञान भी दोष व न्यूनता से रहित पूर्ण व सर्वोत्कृष्ट ज्ञान है जिससे मनुष्य की सर्वांगीण उन्नति होती है। यह निष्कर्ष दिव्य व अलौकिक गुणों से युक्त हमारे सभी ऋषियों सहित ऋषि दयानन्द सरस्वती जी का भी है। उन्होंने लिखा है कि वेद ईश्वर का दिया हुआ ज्ञान हैं तथा सब सत्य विद्याओं की पुस्तक हैं। वेदों का अध्ययन करने व ज्ञानी बन कर ब्राह्मणत्व को प्राप्त करने का भी सभी ज्ञानी व अज्ञानी मनुष्यों को पूर्ण अधिकार है। उनके प्रयत्नों से ही आज देश व विश्व के सभी मनुष्यों को वेदाध्ययन का अधिकार प्राप्त है। देश विदेश में कोई भी मनुष्य वा स्त्री-पुरुष-क्षत्रिय-वैश्य-शूद्र आदि वेदों का ब्राह्मणों के समान अध्ययन कर सकते हैं। ऋषि दयानन्द के प्रयत्नों से ही देश व समाज को सभी वर्णों से वेदों के उच्च कोटि के विद्वान प्राप्त हुए हैं। आज सभी वर्णों के लोग वेदों से विषय चुन कर विभिन्न विश्वविद्यालयों से शोध उपाधि पी.एच-डी. आदि प्राप्त कर रहे हैं तथा गुरुकुलों व सरकारी महाविद्यालयों में संस्कृत व शास्त्रीय ग्रन्थों को पढ़ते व पढ़ाते हैं। परमात्मा ने वेदों का ज्ञान देकर अपने कर्तव्य का पालन किया। यदि वह ऐसा न करता तो सारा संसार अज्ञान में फंसा रहता। किसी को पता न होता है कि ईश्वर है या नहीं, है तो कैसा है, उसकी स्तुति, प्रार्थना व उपासना का उचित विधि भी किसी को ज्ञात न होती तथा आत्मा का सत्य स्वरूप व उनके अनादित्व व अमरत्व का सिद्धान्त भी किसी को पता न होता। ईश्वर ने मनुष्य को वेदों का ज्ञान देकर उसे उसके उद्देश्य व लक्ष्य सहित मोक्ष प्राप्ति के साधनों से भी परिचित कराया है। समस्त मनुष्य जाति व जीवात्मायें परमात्मा के उपकारों के लिये उसकी कृतज्ञ हैं। सबको उसकी उपासना करनी चाहिये तथा उसके बताये हुए वेद मार्ग कर चलना चाहिये।

मनुष्य का आत्मा अनादि, नित्य, अमर, अविनाशी, कर्म के बन्धनों में फंसा हुआ तथा जन्म-मरण धर्मा है। अनादि काल से इसका अस्तित्व है तथा अनन्त काल तक इसका अस्तित्व रहेगा। इस कारण से ईश्वर जीवात्माओं को मनुष्य जन्म के कर्मों के अनुसार इन्हें उपयुक्त योनियों में जन्म देकर इनके कर्मों का भोग कराते रहेंगे। हम इस जन्म में मनुष्य हैं एवं हमारे इस जन्म के कर्म ही हमारे मृत्योत्तर जन्म में निर्णायक होंगे। इस जन्म के कर्मों के आधार पर ही हमारी आगामी योनि व सुख-दुःखों का निर्धारण होगा। हमारा इसी बात में हित व कर्तव्य है कि हम दुःखों के कारण अशुभ व पाप कर्मों को जानें और उनका किंचित व कदापि सेवन न करें। इसके लिये हमें अपने ज्ञान को बढ़ाना होगा। ईश्वर, जन्म, कर्म, पाप-पुण्य, उपासना, यज्ञ, माता-पिता-आचार्य-अतिथि-वृद्धों की सेवा, मोक्ष के साधनों आदि का ज्ञान हमें वेद, सत्यार्थप्रकाश, उपनिषद, दर्शन आदि ग्रन्थों से प्राप्त होता है। हमें अपने जीवन में इन ग्रन्थों का नित्य प्रति स्वाध्याय करना चाहिये। इन विषयों के शीर्ष आचार्यों की संगति करने सहित उनके उपदेशों व ग्रन्थों का अध्ययन भी करना चाहिये। इससे ईश्वर व धर्माचरण सहित हमारे सांसारिक ज्ञान में भी वृद्धि प्राप्त होगी और हमें अभ्युदय एवं निःश्रेयस की प्राप्ति हो सकती है।

हमें मत-मतान्तरों के ग्रन्थों व उनकी शिक्षाओं से भ्रमित नहीं होना है। हमें मत व सम्प्रदायों की किसी भी बात व मान्यताओं को बिना परीक्षा व समीक्षा किये स्वीकार नहीं करना चाहिये। संसार में कौन सज्जन है और कौन स्वार्थी, इसका ज्ञान भी विवेक बुद्धि और परीक्षा के द्वारा ही होता है। अतः सत्यार्थप्रकाश का अध्ययन कर हमें सत्यासत्य की परीक्षा की अपनी योग्यता को बढ़ाना चाहिये। इससे हम अपना कल्याण कर पायेंगे और दूसरों का भी मार्गदर्शन कर सकेंगे। ईश्वर की उपासना से हमें अपने दोषों को दूर करते हुए ज्ञान वृद्धि का कार्य करना है और ईश्वर का सहाय प्राप्त करना है। हमारे सभी पूर्वज व ऋषि मुनि ऐसा ही करते रहे हैं और हमें इसकी प्रेरणा करते रहें हैं। वेद भी हमें स्वाध्याय करने, सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग करने सहित श्रेय मार्ग पर चलते हुए अपनी व संसार की उन्नति करने की प्रेरणा देते हैं। इसी में हमारा निजी लाभ तथा विश्व का कल्याण निहित है। ऐसा करते हुए हम अपने जीवन को सत्य मार्ग पर चला कर सुख व कल्याण को प्राप्त होंगे और जीवन के लक्ष्य ‘‘मोक्ष” की प्राप्ति के निकट पहुंचेंगे व उसे प्राप्त कर सकेंगे। ओ३म् शम्।

-मनमोहन कुमार आर्य

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betsilin giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet
grandpashabet
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
meritking güncel giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betasus giriş
betpark giriş
betasus
betasus
betasus giriş
betasus
meybet giriş
meybet giriş