नरेंद्र मोदी को फेक न्यूज़ फैलाकर हराएं : शेखर गुप्ता

Screenshot_20200517-121256_Chrome

वीके सिंह शेखर गुप्ता
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार
जबसे 2014 में मोदी सरकार बनी है, मोदी विरोधियों की नींद हराम हो चुकी है। और 2019 चुनावों ने जले पर नमक डाल दिया है। अब इनका उद्देश्य फर्जी खबरें चलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को बदनाम करने फर्जी ख़बरों का सहारा लेने के लिए कुछ सम्पादकों और पत्रकारों को मालपुए खिला रहे हैं।
शुक्रवार (मई 15, 2020) को ‘द प्रिंट’ ने सारी बेशर्मी को पार करते हुए अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया। जिसका लब्बोलुबाब यह था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए विपक्ष फेक न्यूज फैलाए।
इस लेख में मुख्यत: इस बात पर जोर दिया गया कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में किस प्रकार फेक न्यूज को बढ़ावा देना चाहिए। इस लेख में अपनी बातों को सही ठहराने के लिए द प्रिंट ने अमेरिकी थिंक-टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के लिए लिखे गए क्रिस्टोफर पॉल और मिरियम मैथ्यूज के एक लेख का हवाला दिया है।
प्रिंट के लेख में तर्क दिया गया कि पूरे विश्व में आज झूठ को तेजी से फैलाना प्रोपेगेंडा फैलाने का सबसे शक्तिशाली उपकरण बनता जा रहा है। इसलिए जो लोग इस प्रोपेगेंडा को हराना चाहते हैं, उन्हें अपने झूठ को आग की तरह फैलाना होगा।
मोदी सरकार के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने की सलाह देने पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने लगाई शेखर गुप्ता को लगाई लताड़
सत्तारुढ़ भाजपा के खिलाफ कॉन्ग्रेस के इकोसिस्टम द्वारा फेक न्यूज फैलाए जाने के प्रपंच को सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने आड़े हाथों लिया। उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ फर्जी न्यूज फैलाने को बढ़ावा दिए जाने को लेकर प्रकाशित लेख पर एडिटर्स गिल्ट ऑफ इंडिया के प्रमुख शेखर गुप्ता को लताड़ लगाई।
रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा कि जब आप किसी ऐसे आर्टिकल को शेयर करते हैं, जिसमें सरकार पर सवाल उठाया गया हो, तो ये आपका लोकतांत्रिक अधिकार है। इसी तरह अगर आप दुनिया में घटित होने वाले किसी अन्य घटनाओं को रिट्वीट करते हो तो ये भी आपका लोकतांत्रिक अधिकार है।
शेखर गुप्ता पर हमला करते हुए सिंह ने कहा कि जब कोई शख्स एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष के रुप में किसी आर्टिकल को रिट्वीट करता है, जिसमें न केवल सरकार पर सवाल उठाया गया हो, बल्कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में फेक न्यूज को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया हो, तो यह उनकी बिरादरी को भी अपमानित करता है।
शेखर गुप्ता ने खुद भी उस विवादित आर्टिकल को रिट्वीट किया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री की यह तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। वीके सिंह ने शेखर गुप्ता पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘कूप्ता’ भी कहा।
सोशल मीडिया पर शेखर गुप्ता के लिए कूप्ता शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन्होंने जनरल वीके सिंह के सेना में रहने के दौरान शेखर गुप्ता ने फर्जी तख्तापलट की कहानी प्रकाशित की थी। शेखर गुप्ता उस समय इंडियन एक्सप्रेस में कार्यरत थे। वीके सिंह ने उनसे कहा कि भले ही वे अपने पेशे के प्रति ईमानदार नहीं हो सकते, लेकिन अपने संपादक पद के प्रति ईमानदार रहें।

जनरल वीके सिंह ने शेखर गुप्ता के लिए ‘बिके हुए’ पत्रकार शब्द का इस्तेमाल करते हुए फर्जी खबरों को फैलाने, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने व राजनैतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने के आह्वान के साथ ही तख्तापलट की झूठी खबर को प्रकाशित करने को लेकर मजाक उड़ाया।
शेखर गुप्ता के खिलाफ हमला ऐसे समय में हुआ है, जब हाल के दिनों में ‘द प्रिंट’ एक कुख्यात फर्जी खबर फैलाने वाले वेबसाइट के रुप में उभरा है। मुख्यधारा मीडिया जो पिछले काफी समय से फर्जी की खबरें फैला रहे हैं, वे केवल राजनीति के एक धड़े को फायदा फहुँचाने के लिए है।
जाहिर है वो धड़ा भाजपा का नहीं है। इस काम में पिछले कुछ समय में शेखर गुप्ता का द प्रिंट सबसे आगे रहा है और अब तो इसके पीछे की वजह भी साफ हो गई है।
द प्रिंट तमाम झूठ फैलाने के बाद अपनी नैतिक श्रेष्ठता पर इतना आश्वस्त है कि लेख से ऐसी बातें बताने की कोशिश कर रहा है कि विपक्ष के पास राजनैतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए फेक न्यूज फैलाने की आज़ादी है और वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

द प्रिंट, मोदी, फेक न्यूज
कपिल सिबल के साथ शेखर गुप्ता 

नरेंद्र मोदी को फेक न्यूज फैलाकर हराएँ: शेखर गुप्ता
पिछले कुछ समय में फर्जी खबरों को फैलाने में मुख्यधारा मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि फेक न्यूज फैलाने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य द्वेष के अतिरिक्त कुछ नहीं हेता। द प्रिंट ने आज इसी बात को साबित करते हुए अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया है। जिसका लब्बोलुबाब यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए विपक्ष फेक न्यूज फैलाए।
इस लेख में मुख्यत: इस बात पर जोर दिया गया कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में किस प्रकार फेक न्यूज को बढ़ावा देना चाहिए। इस लेख में अपनी बातों को सही ठहराने के लिए द प्रिंट ने अमेरिकी थिंक-टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के लिए लिखे गए क्रिस्टोफर पॉल और मिरियम मैथ्यूज के एक लेख का हवाला दिया है।
प्रिंट के लेख में तर्क दिया गया कि पूरे विश्व में आज झूठ को तेजी से फैलाना प्रोपेगेंडा फैलाने का सबसे शक्तिशाली उपकरण बनता जा रहा है। इसलिए जो लोग इस प्रोपेगेंडा को हराना चाहते हैं, उन्हें अपने झूठ को आग की तरह फैलाना होगा। जैसे हिंदी में कहते हैं कि लोहा ही लोहे को काटता है। जब जनता के मत को फर्जी खबरों और झूठों से बरगलाया जा रहा है, उस समय विपक्ष फैक्ट चेक करके पूरा खेल नहीं जीत सकता।
इस लेख में हालाँकि, अपनी सारी बातें द प्रिंट ने सकारात्मक रूप से दर्शाने की कोशिश की है। लेकिन वास्तविकता में उनका क्या मतलब है इस बात को अच्छे से समझा जा सकता है।
द प्रिंट का ये लेख इतने बिंदुओं पर नहीं खत्म होता। लेख में अंत तक आते-आते अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने व राजनैतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने का आह्वान की बात शामिल कर ली जाती है। साथ ही इस लेख में विपक्षियों को सुझाव दिया जाता है कि वे अपने विरोधियों के झूठ की श्रृंखला पर प्रहार करें।
लेखक चरणबद्ध तरीके से समझाता है कि कैसे विपक्षियों को हराया जा सकता है। वह कहता है कि अगर विपक्षी शासित राज्य अपने राज्यों में फर्जी खबरों और सांप्रदायिक घृणा फैलाने वालों पर शिकंजा नहीं कस रहे तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।
अब ये ध्यान देने वाली बात है कि ‘हेट स्पीच’ का मतलब जरूरी नहीं एक व्यक्ति के लिए जो हो, वहीं दूसरे व्यक्ति के लिए भी हेट स्पीच कहलाए। दरअसल, हर व्यक्ति अपने मतों के हिसाब से किसी की बातों को हेट स्पीच कहता है और सरकार भी अपना राजनैतिक पलड़ा देखते हुए इसकी परिभाषा तय करता है।
उदाहरण के लिए अर्नब गोस्वामी के केस में यही हुआ। जहाँ कॉन्ग्रेस पॉर्टी ने सोनिया गाँधी पर सवाल उठाए जाने को कम्यूनल वॉयलेंस यानी साम्प्रदायिक हिंसा करार दे दिया। साथ ही जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस शासित राज्य थे, वहाँ उन पर शिकायत दर्ज हो गई और कार्रवाई की माँग उठने लगी। आज शेखर गुप्ता का द प्रिंट अपने इस लेख के जरिए जिन बातों को तर्कों में गढ़कर समझा रहा है, उसका निष्कर्ष यही है कि कैसे राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नरेंद्र मोदी के समर्थकों को दबाया जाए।
यहाँ स्पष्ट तौर पर बता दें कि मुख्यधारा मीडिया जो पिछले समय से फर्जी की खबरें फैला रहा है, वे केवल राजनीति के एक धड़े को फायदा फहुँचाने के लिए है। जाहिर है वो धड़ा भाजपा का नहीं है। इस काम में पिछले कुछ समय में शेखर गुप्ता का द प्रिंट सबसे आगे रहा है और अब तो इसके पीछे की वजह भी साफ हो गई है।
द प्रिंट तमाम झूठ फैलाने के बाद अपनी नैतिक श्रेष्ठता पर इतना आश्वस्त है कि लेख से ऐसी बातें बताने की कोशिश कर रहा है कि विपक्ष के पास राजनैतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए फेक न्यूज फैलाने की आज़ादी है और वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vipslot giriş
vipslot giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
aresbet giriş
aresbet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
Grandpashabet Giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
vipslot giriş
vipslot giriş
orisbet giriş
orisbet giriş