Categories
आर्थिकी/व्यापार

आर्थिक प्रगति आँकने के पैमाने में नागरिकों की प्रसन्नता को भी आँकना चाहिए

आज विश्व के कई विकसित देशों में मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसा संभवत: इन देशों द्वारा आर्थिक प्रगति हेतु अपनाए गये पूँजीवादी मॉडल के कारण हो रहा है। हर व्यक्ति को केवल अपनी चिंता है और केवल “कमाने वाला खाएगा” के सिद्धांत पर ही इन देशों की जनता आगे बढ़ रही है। उक्त सिद्धांत के अंतर्गत हर व्यक्ति को अपनी कमाई पर निर्भर रहना होता है। पुत्र, माता-पिता को कमाकर नहीं खिलाता बल्कि माता-पिता को अपने गुज़र बसर के लिए या तो स्वयं की आय अर्जित करनी होती है अथवा सरकारी सहायता पर आश्रित रहना होता है। हर व्यक्ति केवल अपनी आय बढ़ाने हेतु कार्यशील है, उसे अपने परिवार के सदस्यों अथवा समाज की अधिक चिंता नहीं है। जैसे हर व्यक्ति अपने आप के लिए जी रहा हो। इसलिए, इन देशों में मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। युवा पीढ़ी के बच्चे भी इस बीमारी से ग्रस्त नज़र आने लगे हैं।

जबकि, भारतीय जीवन पद्धति उक्त सिद्धांत के सर्वथा विपरीत है। हम लोगों का सोच है कि “कमाने वाला खिलाएगा”। इस सिद्धांत के अंतर्गत परिवार का मुखिया आय का अर्जन करता है एवं परिवार के बाक़ी सभी सदस्य उस कमाई गई राशि से मिलकर गुज़र बसर करते है। परिवार में आपस में एका एवं भाईचारा रहता है। परिवार के सभी सदस्य इस कारण से आपस में जुड़ें रहते हैं एवं सामाजिकता बनी रहती है, इसलिए भारतवर्ष में मनोरोग नामक रोग तुलनात्मक रूप से बहुत कम पाया जाता है।

आज के कई विकसित देशों ने अपने आर्थिक विकास हेतु पूँजीवादी मॉडल को चुना था। इस मॉडल के अंतर्गत सकल घरेलू उत्पाद एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को ही विकास को नापने का मुख्य पैमाना बनाया गया। इससे कम्पनियाँ जहाँ येन-केन-प्रकारेण अपने उत्पाद में वृद्धि करने हेतु प्रेरित हुईं वहीं प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय बढ़ाने की ओर लालायित रहने लगा। इसके लिए चाहे उन्हें किसी भी प्रकार का ग़लत कार्य क्यों न करना पड़ा। समाज में कई प्रकार की बुराइयों ने अपने पैर पसारना प्रारंभ कर दिया। जैसे – कम्पनियों ने अपने लाभ में वृद्धि करने के उद्देश्य से कर्मचारियों का उत्पीड़न करना प्रारम्भ किया, अपने उत्पादों को बाज़ार में सफल बनाने के लिए और अपनी बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से तथा इनके द्वारा उत्पादित की जा रही वस्तुओं की माँग उत्पन्न करने हेतु विज्ञापनों का सहारा लिया, चाहे इन विज्ञापनों में कही गई सभी बातें तथ्यात्मक नहीं रहीं हों। आकर्षक विज्ञापनों के सहारे लोगों को भौतिकवादी बना दिया गया। लोगों में आज जीने की प्रवर्ती पसरती चली गयी अर्थात आज जियो कल किसने देखा। विज्ञापनों ने फ़िज़ूल खर्ची को भी बढ़ावा दिया। नए नए उत्पादों का विज्ञापन कुछ इस प्रकार से किया जाने लगा कि लोगों को महसूस हो कि इस उत्पाद का उपयोग यदि मैंने नहीं किया तो मेरा जीवन तो जैसे अधूरा ही रह जाएगा। वास्तव में चाहे उस उत्पाद की आवश्यकता हो या नहीं, परंतु विज्ञापन देख कर उस उत्पाद को ख़रीदने हेतु मन में प्रबल विचार उत्पन्न किए गए, ताकि लोग इन उत्पादों को ख़रीदें और कम्पनी की बिक्री बढ़े। कुल मिलाकर लोगों को एकदम भौतिकवादी बना दिया गया।

अधिक से अधिक लाभ कमाने की होड़ ने भी समाज में कई बुराइयों को जन्म दिया। वस्तुतः आर्थिक प्रश्नों का विचार करते समय नैतिक मूल्यों पर विचार करना भी आवश्यक है। परंतु, विकसित देशों की परम्परायें भिन्न होने के कारण ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि नैतिक मूल्यों की तिलांजलि दे दी गयी। अधिक से अधिक बुराइयाँ समाज में पैर पसारने लगी, जिसका परिणाम नागरिकों में कई तरह की मानसिक बीमारियाँ होने की परिणिती के तौर पर हुआ। लोगों में तनाव बढ़ने लगा, बैचेनी बढ़ने लगी तथा अंततः मनोरोग ने घर कर लिया।

भारत स्थिति कम्पनियों में भी उक्त वर्णित प्रवर्ती का विस्तार देखने को मिल रहा है। येन-केन-प्रकारेण कम्पनी के उत्पादों की बिक्री किस प्रकार से बढ़ाई जाय एवं अधिक से अधिक लाभ कैसे कमाया जाय, चाहे इसके लिए किसी प्रकार का ग़लत कार्य क्यों न करना पड़े। इस प्रवर्ती को भारतीय कम्पनियों में पनपने से रोकने के लिए कुछ प्रयास किए जाने की आज आवश्यकता है।

इस संदर्भ में निम्न प्रकार के सुझाव दिए जा सकते हैं –

(1) “कमाने वाला खिलाएगा” के सिद्धांत का पालन करते हुए नैग़मिक सामाजिक उत्तरदायित्व (कोरपोरेट सोशल रेस्पोन्सिबिलिटी – सीएसआर) योजना को समस्त कम्पनियों एवं व्यक्तियों पर लागू किया जाना चाहिए। अभी उक्त योजना उन कम्पनियों पर लागू है जिनकी वार्षिक आय रुपए 1000 करोड़ प्रतिवर्ष हो अथवा वार्षिक लाभ रुपए 5 करोड़ प्रतिवर्ष हो अथवा वार्षिक कुल मूल्य (नेट वर्थ) रुपए 500 करोड़ हो। इन कम्पनियों को पिछले तीन वर्षों के औसत लाभ का 2 प्रतिशत हिस्सा सीएसआर योजना के तहत समाज की उन्नति/भलाई हेतु बनाई गयी योजनाओं पर ख़र्च करना होता है। इस योजना का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए। समस्त लाभ अर्जित करने वाली कम्पनियों एवं उच्च कुल मूल्य (हाई नेट वर्थ) व्यक्तियों को सीएसआर के दायरे में लाया जाना चाहिए। समाज की उन्नति/भलाई हेतु अधिक से अधिक योजनाओं के चलाए जाने से न केवल देश के विकास को गति मिलेगी बल्कि रोज़गार के भी कई नए अवसर उत्पन्न होंगे एवं ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों के जीवन स्तर में भी तेज़ी से सुधार होगा। हाँ, सीएसआर के अंतर्गत योजना बनाने की छूट सम्बंधित कम्पनियों एवं व्यक्तियों को दी जा सकती है। भारतवर्ष में उच्च एवं मध्यम आय वर्ग के लोग धार्मिक संस्थाओं को नियमित रूप से धर्म के कामों में अपनी मदद करते ही हैं परंतु इस मदद को यदि ग़रीब लोगों के लिए आर्थिक उन्नति के साथ जोड़ दिया जाय तो इस वर्ग के लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसरों का सर्जन किया जा सकता है। केंद्र एवं राज्य सरकारों को भी इस महान (नोबल) कार्य के लिए योजना बनाने में अपनी मदद करनी चाहिए ताकि इस कार्य को सुसंगठित एवं सुचारू रूप से किया जा सके।

(2) सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के साथ-साथ मानव पूँजी पर भी विशेष ध्यान देने की आज आवश्यकता है। देश में अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति जब तक सम्पन्न और ख़ुश नहीं है तब तक सरकार की नीतियाँ सफल नहीं है, एसा माना जाना चाहिए। देश के समस्त लोगों के लिए रोज़गार के उचित अवसर उत्पन्न कराना सरकार का मुख्य दायित्व होना चाहिए  बल्कि मैं तो यहाँ तक कहूँगा कि देश में निवास कर रहे समस्त देशवासियों के लिए सरकार की और से रोज़गार की गारंटी होनी चाहिए। देश की आर्थिक नीतियाँ भी इसी प्रकार की बनाई जानी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक रोज़गार के अवसर उत्पन्न हों एवं अंतत्तोगतवा देश के नागरिक ख़ुश रहें।

(3) किसी भी देश की आर्थिक नीतियों की सफलता का पैमाना, वहाँ के समस्त नागरिकों में ख़ुशी का संचार, ही होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति सामान्यतः ख़ुशी तभी प्राप्त कर सकता है जब उसकी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हो जाती हो। शुरुआती दौर में तो रोटी, कपड़ा और मकान की प्राप्ति ही सामान्य जन को ख़ुश रख सकती है। परंतु यह अंतिम ध्येय नहीं हो सकता है। राष्ट्र तेज़ी से तरक़्क़ी करे एवं सम्पूर्ण विश्व में एक आर्थिक ताक़त बन कर उभरे तथा इसके नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय में तीव्र गति से वृद्धि हो, इन लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ साथ भौतिकवाद एवं अध्यात्मवाद दोनों में समन्वय स्थापित करना भी आवश्यक है। अतः आर्थिक प्रगति का पैमाना सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के साथ-साथ प्रसन्नचित मानव सूची (हैपी ह्यूमन इंडेक्स) को भी बनाया जाना चाहिए। देश के शासकों का मुख्य उद्देश्य अंततः देश में निवास कर रहे लोगों की ख़ुशी में वृद्धि होने का भी होना चाहिए। अतः प्रसन्नचित मानव सूची को भी नापा जाना चाहिए जिससे पता चले कि देश के कितने नागरिक सरकार की वर्तमान नीतियों से ख़ुश है। इस प्रकार की सूची (इंडेक्स)को भूटान देश में बहुत सफलता के साथ लागू किया गया है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि व्यवसाय में केवल आर्थिक लाभ पर ध्यान केंद्रित करना ठीक नहीं है। उच्च आचार-विचार (एथिक्स) का पालन करना भी अति आवश्यक है। इससे व्यवसाय में नैतिक मूल्यों की स्थापना की जा सकेगी। वस्तुतः आर्थिक प्रश्नों का विचार करते समय नैतिक मूल्यों पर विचार करना भी आवश्यक है, जिससे देश के नागरिकों को प्रसन्न रखने में मदद हो सकती है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
onwin
grandpashabet giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
betgaranti
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
onwin giriş
onwin giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
grandpashabet giriş
kolaybet giriş
Kolaybet giriş
kolaybet giriş
kolaybet
betgaranti giriş
sahabet giriş
sahabet
sahabet
marsbahis giriş