संघ व कट्टरपन्थी हिंदुओं का आर्य समाज के प्रति दृष्टिकोण

RSS-PTI

संघ के संस्थापक डॉ.हेडगेवार सच्चे देशभक्त थे | उन्होंने राष्ट्र के संगठन के लिये जो कार्य किये उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है | उनके उत्तराधिकारी श्री गोलवलकर गुरूजी ने संघ को जो विस्तार दिया,शक्ति बढ़ाई, वह भी अच्छी बात है | परन्तु डॉ.हेडगेवार से हटकर गुरूजी में जो बात थी वह यह कि वे मूर्तिपूजा व अवतारवाद में विश्वास करने वाले परम्परावादी हिन्दू थे | वे प्रारम्भ से रामकृष्ण मठ के अनुयायी थे | जबकि डॉ.हेडगेवार आर्यसमाजी पृष्ठभूमि से थे | गुरूजी के आने के बाद संघ पौराणिक, कट्टर मूर्तिपूजक व अवतारवादी हिन्दू बन गया । विवेकानन्द संघ के आदर्श बन गये और संघ स्वामी विवेकानन्द का प्रवक्ता बन गया | स्वतंत्रता के बाद अंध परम्परावादी हिन्दुत्व को संघ के रूप में मंच मिल गया, और संघ ने इसी हिन्दुत्व का प्रचार अपना ध्येय बना लिया | संघ के पास कोई निश्चित दार्शनिक सिद्धांत, विचार और मान्यता नही है, और न हो सकती है | जो सबको ठीक कहता हो, वो किसी को गलत नही कह सकता | वर्तमान उदाहरण ‘संथारा प्रथा’ पर कोर्ट के रोक सम्बन्धी आदेश की आलोचना करने से देखा जा सकता है | जबकि आर्य समाज निश्चित दार्शनिक सिद्धांत विचारधारा रखता है, तो वहां खंडनमंडन स्वाभाविक है | संघ के इसी हिन्दुत्व के परिणाम स्वरुप संघ ने आर्यसमाज का विरोध नही किया परन्तु समाज की एकता की दुहाई देकर आर्यसमाज को चुप कराने का प्रयास सदैव करता रहा | संघ में जिन लोगो की पृष्ठभूमि आर्य समाज की थी उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कुछ सहयोग तो किया, परन्तु संघ के पौराणिक लोगों ने सदा आर्य समाज का विरोध ही किया ।

आर्य समाजियों का सिद्धांत उन्हें मूर्ति पूजा व अन्य मतमतांतरों का खण्डन करने नहीं देगा। ये लोग पांच दस रुपए महीने का चन्दा देकर आर्य समाज के सदस्य बन गए, मूर्तियाँ लेकर आर्यसमाजो में घुस गये और उसके प्रधान मंत्री तक बन गए। राष्ट्र और संस्कृति के लिये कार्य करना अच्छी बात है, परन्तु संस्कृति के नाम पर अन्ध-रूढ़ियों को आर्यसमाज कैसे स्वीकार कर सकता है ?? एक उदहारण से संघ में बैठे पौराणिक प्रवृति के लोगो का आर्य समाज के प्रति दृष्टिकोण समझा जा सकता है- “संघ ने एक कार्यक्रम ‘हिन्दू रक्षा निधि’ के नाम पर अभियान चलाया था, और डॉ.कर्ण सिंह के नेतृत्व में करोड़ो की राशि एकत्र की गयी थी | उसके लिये एक समारोह दिल्ही के वोट क्लब में आयोजित किया गया था | इस समय दयानन्द संस्थान के संस्थापक महात्मा वेद भिक्षु जी ने भी ‘हिन्दू रक्षा समिति’ गठित कर हिन्दू समाज में जागृति लाने का कार्य किया था, वे भी डॉ.कर्ण सिंह के साथ मंच पर मौजूद थे | मंच के पास घूमते हुए आयोजन के कर्ता-धर्ताओं में से एक ने मंच पर मौजूद महात्मा धर्म भिक्षु जी की ओर इशारा करते दुसरे से पूछा कि ‘इन आर्य समाजियों को यहाँ क्यूँ बैठाया है ?’ तब दुसरे ने उत्तर दिया “बैठाया ही तो है, भाषण तो नही दिलाया |” तब पहले ने कहा—हां, ये इसी लायक हैं, इनसे काम लेना चाहिए, पर इनको महत्व नही देना चाहिए | आर्यसमाज की अनेक संपत्तियों पर हिन्दुत्व के नाम कब्ज़ा किया जा चुका है । संघ और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं , इनकी सोच आर्यसमाज विरोधी है, उपर से कुछ भी कहते रहें परन्तु भीतर से आर्यसमाज के शत्रु हैं । भाजपा समर्थकों के ऐसे सैंकड़ों ग्रुप हैं जिनमें ऋषि दयानंद व सत्यार्थ प्रकाश पर कीचड उछाला जाता है, आर्य समाज का समूल नाश करने की प्रतिज्ञाऐं की जाती हैं । इनका मानना है कि मुसलमान राक्षस हैं और आर्य नमाजी पिशाच हैं, दोनों सत्य सनातन के विरोधी हैं, दोनों जहा मिले काट दो। ऐसे सैंकड़ों अश्लील लेख व पुस्तकें हैं जो ऋषि दयानंद व आर्य समाज के विरुद्ध छप रही हैं, बंट रही हैं। ये कट्टरपंथी हिन्दू आर्यसमाजियों को मुसलमानों से अधिक नीच व खतरनाक बताते हैं।

हिन्दू वास्तव में दो प्रकार के होते हैं- उदारवादी और कट्टरपंथी। उदारवादी हिन्दू बुद्धिमान होते हैं, सहयोग भी करते हैं और बदल भी जाते हैं। परन्तु जो कट्टरपंथी हैं वे आज भी स्वामी दयानंद के बारे में विष उगलते हैं, उन्होंने ही बार बार विष देकर ऋषि को मार डाला था। ऐसे कट्टरपंथी हिन्दू स्वामी अग्निवेश पर भी कई बार जानलेवा हमले कर चुके हैं। ये कट्टरपंथी सब संघी या भाजपाई होते हैं इसमें किसी को कोई सन्देह नहीं होना चाहिए। मूर्तिपूजा व शिवलिंग का खण्डन करने पर ये कट्टरपंथी हिन्दू मां बहन की गालियां निकालते हैं, जान से मारने की धमकियां देते हैं, सत्यार्थ प्रकाश के विरोध में गन्दा गन्दा साहित्य छाप कर बांटते हैं और छलकपट से आर्यसमाज की सम्पतियों पर कब्जा करते हैं । ऐसे लोगों को आप क्या कहोगे ? हमारा विरोध केवल और केवल ऐसे कट्टरपंथी लोगों से है। इन कट्टरपंथी मूर्तिपूजकों की दुष्टता के कारण हम अल्पायु में ही भारत मां के महान सपूत व वीतराग संन्यासी देव दयानंद को खो बैठे । ऐसे लोगों की दुष्टता समाप्त होने की अपेक्षा बढ़ती जा रही है। यह बहुत चिन्ता का विषय है और आर्यों को ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
norabahis giriş
vdcasino giriş
betpark giriş
milanobet giriş
maritbet giriş
maritbet giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vipslot giriş
vipslot giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
aresbet giriş
aresbet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
Grandpashabet Giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
vipslot giriş
vipslot giriş
orisbet giriş
orisbet giriş
bahiscasino giriş
bahiscasino giriş
perabet giriş
perabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş