Categories
विधि-कानून

सेवा के नाम पर गोरखधंधा चला रहे हैं कुछ एनजीओ

ललित गर्ग

भारत में जितने भी गैरसरकारी संगठन हैं, सभी ऊंचे मूल्यों को स्थापित करने की, सेवा एवं परोपकार की आदर्श बातों के साथ सामने आते हैं पर धन उगाहने की होड़ में सभी एक ही स्वार्थ एवं जेब भराई की संस्कृति को अपना लेते हैं।

हम इतिहास की सबसे भयंकर, दुखद एवं मानव विनाशक घटना के गवाह बन रहे हैं। इस महामारी से लड़ने के लिए जहां एकजुटता एवं संकल्प की जरूरत है, वहीं सेवा-प्रकल्प भी जरूरी है। अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं गैरसरकारी संगठन आज लाखों गरीबों को हर रोज खाना दे रहे हैं, लॉकडाउन के दौरान मानव सेवा के विविध जनकल्याणकारी कार्यों जुटे हैं, लेकिन देश में ऐसे भी गैर सरकारी संगठन हैं, जो सेवा के नाम पर अपना स्वार्थ सिद्ध करने, शोषण एवं कमाई करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे ही स्वार्थी, अमानवीय एवं लोभी संगठनों पर निगरानी के लिये गृहमंत्रालय ने अपनी नजर को पैनी की है। जो एनजीओ संदेह के घेरे में हैं, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध है, जिनके कामकाज में पारदर्शिता नहीं है, उन पर गृह मंत्रालय ने सख्ती बरतते हुए कहा है कि वे कोरोना वायरस महामारी से जूझने के लिए किए जा रहे प्रयासों से हर माह सरकार को अवगत कराएं। जिन गैरसरकारी संगठनों को एफसीआरए के प्रावधानों के अनुरूप विदेशों से फंड मिलता है, उन्हें कोरोना महामारी पर अपनी गतिविधियों की आनलाइन रिपोर्ट देनी होगी। क्योंकि इन गैरसरकारी संगठनों की मूल्यहीनता एवं बेईमानी से कोरोना पीड़ितों की सहायता की बजाय खुद की जेब भराई का षडयंत्र ही दृष्टिगोचर हो रहा है।

भारत में जितने भी गैरसरकारी संगठन हैं, सभी ऊंचे मूल्यों को स्थापित करने की, सेवा एवं परोपकार की आदर्श बातों के साथ सामने आते हैं पर धन उगाहने की होड़ में सभी एक ही स्वार्थ एवं जेब भराई की संस्कृति को अपना लेते हैं। मूल्य की जगह मनी और सेवा मुद्दों की जगह शोषण करने लगते हैं। जब एक अकेले व्यक्ति का जीवन भी मूल्यों एवं पारदर्शिता के बिना नहीं बन सकता, तब एक राष्ट्र गैरसरकारी संगठनों की मूल्यहीनता एवं बेईमानी में कैसे शक्तिशाली बन सकता है? गृहमंत्रालय की इन गैरसरकारी संगठनों पर सख्ती बरतना औचित्यपूर्ण है। कोरोना महामारी पीड़ितों की सहायता एवं सेवा की प्रक्रिया को गैरसरकारी संगठनों ने अपने स्तर पर भी कीचड़ भरा कर दिया है। क्योंकि इन एनजीओ की शक्ति धन जुटाने के लिये झूठे हाथ जोड़ने में, झूठे दांत दिखाने में, फोटो खिंचवाने व प्रचार-प्रसार पाने में लग जाती है। ऐसे एनजीओ लोक कल्याण की सोचेंगे या स्वकल्याण की?

इन तथाकथित एनजीओ को प्राप्त धन से कुछ लोगों ने अपने बड़े एम्पायर खड़े कर लिए हैं और उनके लिये कोरोना कहर सच्ची सेवा का नहीं बल्कि अपने साम्राज्य को विस्तार देने एवं उसे शक्तिशाली बनाने का अवसर है। कई मामलों में गैर सरकारी संगठन देश विरोधी कामों तक में लिप्त पाए गए तो कई ऐसे संगठन भी हैं जिनका संचालन किसी निजी कम्पनी से भी गया-गुजरा है। सेवा, परोपकार, मानवता के कल्याण के नाम पर देश-विदेश से दान में लिये धन का इस्तेमाल ये अपनी भलाई और मलाई का जुगाड़ करने के लिए कर रहे हैं। एनजीओ के गोरखधंधे में बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं इसलिए इन पर हाथ डालना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन गृहमंत्रालय ने इस चुनौती का स्वीकार किया है तो इससे इन एनजीओ में पारदर्शिता आने की, जनता के दान में दिये धन के सही उपयोग होने एवं जरूरतमंदों की वास्तविक सहायता एवं सेवा होने की संभावनाओं को बल मिला है। कोरोना महामारी फैलने से पहले ही इन संदिग्ध एनजीओ पर कठोर कार्रवाही होने लगी थी, हजारों एनजीओ के लाइसैंस इसीलिए रद्द किये गये थे। अन्यथा ”जैसा चलता है- चलने दो” की पूर्व सरकारों की मानसिकता और कमजोर नीति ने इन एनजीओ के हौसले बढ़ा दिये और वे खुलकर इनकी आड़ में दान के धन को व्यक्तिगत उपयोग में लेने लगे, काले धन को सफेद करने लगे।

देश में एनजीओ का मकड़जाल चरम पर पहुंच चुका है, यह एक कालाधंधा बन चुका है। इस समय देशभर में लगभग तीस लाख एनजीओ पंजीकृत हैं। ये एनजीओ सरकारी अनुदान (ग्रान्ट) और सामाजिक दान व चन्दा लेकर अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं। देश में इन पंजीकृत एनजीओ में से कई लाख एनजीओ ऐसे भी हैं, जो विदेशों से बड़ी संख्या में पैसा हासिल कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर तो आयकर रिटर्न भी नहीं भरते हैं और उनका हिसाब भी कोई लेने वाला नहीं है। पिछले पांच वर्षों के दौरान गृह मंत्रालय ने ऐसे ही 14,500 एनजीओ का पंजीकरण रद्द किया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान 6,600 संगठनों का लाइसैंस एफसीआरए के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर रद्द किया जा चुका है। एफसीआरए के तहत इन पंजीकृत एनजीओ को कई सौ लाख करोड़ विदेशी फंड के रूप में प्राप्त हुआ है।

एनजीओ के नाम पर अनेक लोगों ने मोटी कमाई की है, तबलीगी जमात जैसे संगठनों ने इस धन का उपयोग देश को तोड़ने के कामों में किया हैं। कुछ ने धर्मांतरण का खेल खेला। मानवाधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाले संगठन मानव के ही सबसे बड़े शोषक बन कर उभरे। महिला-बालिका कल्याण, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, बेसिक शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण-संरक्षण, वृक्षारोपण आदि के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों में अनियमितताओं का बोलबाला रहा। ऐसा नहीं है कि सभी एनजीओ भ्रष्ट एवं काले-कारनामों में लिप्त है, कुछ संगठनों का काम काफी सराहनीय रहा क्योंकि उनका काम बोलता भी है और दिखाई भी दे रहा है और वे ही एनजीओ होने की सार्थकता सिद्ध करते हैं। तभी कोरोना की त्रासद स्थितियों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वे भूखों को भोजन देने, जानवरों को अनाज देने, बेरोजगार लोगों, बेघर दिहाड़ीदार मजदूरों को शैल्टर और सामुदायिक रसोई स्थापित कर उनके लिए भोजन की व्यवस्था करने में सहयोग करें। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अनेक एनजीओ सहायता करने के लिए आगे भी आए हैं। व्यक्तिगत रूप से भी लोग यथासम्भव सहायता कर रहे हैं। स्पष्ट है कि महामारी से लम्बी लड़ाई कोई भी सरकार अकेले नहीं लड़ सकती, उसे समाज का सहयोग चाहिए, जिनमें वास्तविक एनजीओ की भूमिका उपयोगी है। शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, सेवा, परोपकार और सहयोग से ही कोरोना पीड़ितों की उम्मीदों को साकार किया जा सकेगा।

कहने की आवश्यकता नहीं है कि अनेक एनजीओ कोरोना पीड़ितों की सेवा के नाम पर गोरखधंधा कर रहे हैं। ऐसे एनजीओ पर निगरानी रखने के साथ अंकुश लगाने की भी आवश्यकता है। देश में ऐसे ठेकेदार भी बहुत मालामाल बने हुए हैं जो इन एनजीओ के पंजीकरण से लेकर प्रोजेक्ट बनाने तक का ठेका लेते हैं और बदले में मुंहमांगी रकम ऐंठते हैं। बेहद आश्चर्य की बात तो यह है कि ये ठेकेदार प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में पंजीकृत संस्था की वार्षिक गतिविधियों से लेकर उसके खर्च तक के दस्तावेज भी तैयार करके देते हैं, भले ही संस्था ने किसी को मटके का एक गिलास पानी तक न पिलाया हो। ऐसे शातिर लोग अपने पूरे परिवार और सगे संबंधियों के नाम पर दर्जनों एनजीओ का संचालन इसी तरह कागजों में करते रहते हैं। ऐसे ही एनजीओ ने कोरोना की महामारी के समय भी सारी मानवीय मर्यादाओं को ताक पर रखकर लोगों को ठगने एवं गुमराह करने की गतिविधिया उग्र कर रखी है, उनके लिये यह समय दानवीर एवं उदार लोगों की मानवीयता को भुनाने एवं उनकी जेबें खाली कराने का स्वर्णिम अवसर है। ये एनजीओ एवं उससे जुड़े शातिर लोग कोरोना पीड़ितों की सेवा के नाम पर करोड़ों रूपया देश-विदेश से सामाजिक दान के रूप में हासिल करने में सफल भी रहे हैं। भारत में ये एनजीओ न केवल कोरोना मुक्ति के प्रयत्नों में बल्कि राष्ट्रीय हितों में घातक बन रहे हैं। देश भर में ऐसे एनजीओ पर पैनी नजर रखना जरूरी है। सरकार किसी के काम में बाधक नहीं है लेकिन एनजीओ को अपना काम ईमानदारी, पारदर्शिता एवं सेवाभावना से करना चाहिए। काम किया है तो सामने आना ही चाहिए और प्रोत्साहन भी मिलना ही चाहिए। गृहमंत्रालय की पहल से एनजीओ जब अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट सरकार को देंगे तो इस बात का आकलन हो जाएगा कि क्या उन्होंने वास्तव में कोरोना संक्रमण में सेवा एवं मानव कल्याण के कार्य किए हैं या फिर अपनी जेब भरी।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
xslot giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot
xslot
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
imajbet giriş
betpark giriş
imajbet giriş
imajbet giriş