Categories
समाज

फैलाया जा रहा है रावण के नाम पर बौद्धिक प्रदूषण

 

– कार्तिक अय्यर

जूठ को हज़ार बार चिल्लाओ सत्य लगने लगेगा। यही काम आज अम्बेडकरवादी ,भीमसैनिक, ओशोवादी, वामपंथी जैसे कि सुरेंद्रकुमार अज्ञात व राकेश नाथ, पेरियार समर्थक आदि कर रहे हैं। रावण को खूब महान बताते है। किसी किसी ने तो दशहरे के अवसर पर रावण के दहन पर रोक लगाने के लिए न्यायालय में याचिका भी दाखिल की हैं। उनका कहना है कि रावण उनके महान पूर्वज थे। उनके पुतले का दहन करना उनका अपमान हैं। इसलिए दशहरे पर रावण दहन पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए। प्रथम तो दलित समाज द्वारा रावण को अपना पूर्वज बताना मिथक है क्यूंकि रावण ब्राह्मण कुल में पैदा हुआ ऋषि पुलस्त्य पौत्र था। कमाल है दलित समाज का पूर्वज ब्राह्मण कुल मैं पैदा हुआ था। यह अविष्कार तो अनोखा ही कहा जायेगा। चलो मान भी ले रावण दलित समाज का पूर्वज भी था तथापि भी अगर किसी के कुल में किसी का पूर्वज अगर शराबी हो व्यसनी हो व्यभिचारी हो तो क्या वह आदर्श कहलायेगा? नहीं। तो पहले रावण को जान तो लो।

रावण का चरित्र हम वाल्मीकीय रामायण से प्रस्तुत करते हैं। पाठकगण समझ जायेंगे कि रावण कितना “चरित्रवान” था:-

(क) रावण यहां वहां से कई स्त्रियां हर लाया था:-

रावण संन्यासी का कपट वेश त्यागकर सीताजी से कहता है:-

बह्वीनामुत्तमस्त्रीणामाहृतानामितस्ततः ।
सर्वासामेव भद्रं ते ममाग्रमहिषी भव ॥ २८ ॥

मैं यहां वहां से अनेकों सुंदर स्त्रियों को हरण करके ले आया।उन सबमें तू मेरी पटरानी बन,इसमें तेरी भलाई है।।२८।।

(अरण्यकांड सर्ग ४७/२८)

परस्त्रीगमन राक्षसों का धर्म है:-

रावण ने सीता से कहा: –

स्वधर्मो रक्षसां भीरु सर्वथैव न संशयः ।
गमनं वा परस्त्रीणां हरणं संप्रमथ्य वा ॥ ५ ॥

“भीरू! तू ये मत समझ कि मैंने तुझे हरकर कोई अधर्म किया है।दूसरों की स्त्रियों का हरण व परस्त्रियों से भोग करना राक्षसों का धर्म है-इसमें संदेह नहीं ।।५।।”
( सुंदरकांड सर्ग २०/५)

लीजिये महाराज! रावण ने खुद स्वीकार किया है कि वो इधर उधर से परस्त्रियों को हरकर उनसे संभोग करता है। अब हम आपकी मानें या रावण की? निश्चित ही रावण की गवाही अधिक माननीय होगी, क्योंकि ये तो उसका अपना अनुभव है और आप केवल वकालत कर रहो हैं।वाल्मीकीय रामायण से इस विषय पर सैकड़ों प्रमाण दिये जा सकते हैं।

मंदोदरि का रावणवध के बाद विलाप करते हुये रोती है तथा कहती है।

धर्मव्यवस्थाभेत्तारं मायास्रष्टारमाहवे ।
देवासुरनृकन्यानां आहर्तारं ततस्ततः ।। ५३ ।।

आप(रावण) धर्मकी व्यवस्था को तोड़ने वाले,संग्राम में माया रचने वाले थे। देवता,असुर व मनुष्यों की कन्याओं यहां वहां से हरण करके लाते थे।।५३।।
( युद्धकांड सर्ग १११)

लीजिये, अब रावण की पटरानी,बीवी की गवाही भी आ गई कि रावण परस्त्रीगामी था।

यही नहीं, रावण ने वेदवती,पुंजिकास्थिलिका नामक अप्सरा और बहुत सी नारियों से बलात्कारपूर्वक भोग किया था।

बहुत सी नारियों से बलात्कारपूर्वक भोग किया था। ये बात आपके दादागुरु ललईसिंह यादव ने पेरियार की बात के समर्थन में कही है। देखिये, पेरियार ने सीताजी पर आक्षेप करते हुये नंबर ३६ में कहा है:-

आक्षेप- सीता स्वयं रावण पर मोहित हो गई थी। सीता ने रावण के प्रचि विषयेच्छा का अनुसरण किया था।सीता के मोहित न होने की दशा में वो उसको छू तक नहीं सकता था क्योंकि उसे शाप था-“वह किसी स्त्री को उसके इच्छा के विरुद्ध स्पर्श करेगा चो उसका सिर टुकड़े-टुकड़े हो जायेगा। ।

ललईसिंह ने इस पर पेरियार का समर्थन लिखा है

१:-युद्धकांड १३.१३-१५:- रावण ने पुंजिकास्थिलिका नामक अप्सरा से शक्ति पूर्वक संभोग किया तब ब्रह्मा जी ने उसको शाप दिया कि किसी स्त्री से यदि वो बलपूर्वक संभोग करेगा तो उसके सर के टुकड़े हो जायेंगे ।

२:- उत्तरकांड २५/५५-५६ का प्रमाण देकर लिखा है कि रावण ने नलकूबर की स्त्री से बलपूर्वक संभोग किया तब उसको शाप मिला कि वो किसी स्त्री से बल पूर्वक संभोग करेगा तो उसका सर फट जायेगा।

ऐसे कई प्रमाण रामायण से दर्ज किये जा सकते हैं जहां रावण परस्त्रीगामी ,बलात्कारी और लंपट सिद्ध होता है। जब हद पार हो गई, तब ब्रह्माजी ने उसे शाप दिया कि यदि वो फिर आगे से किसी स्त्री से बलात्कार करेगा, तो उसका सर फोड़ देंगे।

अंततः जब उसने देवी सीता को चुराया, तो उसकी सीताजी पर भी गंदी दृष्टि थी। पर जीते जी उनसे व्यभिचार न कर सका और उन पतिव्रता देवी के पातिव्रत्य तेज से जलकर खाक हो गया! देखिये, मंदोदरि के शब्दों में:-

ऐश्वर्यस्य विनाशाय देहस्य स्वजनस्य च ।
सीतां सर्वानवद्याङ्गीं अरण्ये विजने शुभाम् ।
आनयित्वा तु तां दीनां छद्मनाऽऽत्मस्वदूषणम् ।। २२ ।।
अप्राप्य तं चैव कामं मैथिलीसंगमे कृतम् ।
पतिव्रतायास्तपसा नूनं दग्धोऽसि मे प्रभो ।। २३ ।।

प्राणनाथ! सर्वांगसुंदरी शुभलक्षणा सीता को वन में आप उनके निवास से , छल द्वारा हरकर ले आये,ये आपके लिये बहुत बड़े कलंक की बात थी।मैथिली से संभोग करने की जो आपके मन में कामना थी,वो आप पूरी न कर सके उलट उस पतिव्रता देवी की तपस्या में भस्म हो गये अवश्य ऐसा ही घटा है।।२२-२३।
( युद्धकांड सर्ग १११)

ऐसे व्यभिचारी, व्यसनी, बलात्कारी, शराबी, अधर्मी व्यक्ति रावण को अपना महान पूर्वज बताने वालों को यह प्रमाण पढ़कर तत्काल सत्य को स्वीकार कर लेना चाहिए। ऐसे दुष्ट का नाश करने वाले मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम ही हमारे लिए वर्णीय और आदरणीय हो सकते है।

source – facebook.com/arya.samaj

सलंग्न चित्र- डॉ कोलते द्वारा लिखी गई पुस्तक “महात्मा रावण” जिसमें रावण का महिमामंडन करने का असफल प्रयास किया गया है।

← Back

Thank you for your response. ✨

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
Kolaybet Giriş
Betgaranti Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betnano
Hititbet Giriş
kralbet
betnano
kralbet
Hititbet App
hititbet giriş
hititbet
kralbet
kralbet
betnano
betnano
kralbet
kralbet
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
grandpashabet
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
sahabet
sahabet
betorder giriş
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
kralbet
kralbet
betnano
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
betpas giriş
goldenbahis giriş
goldenbahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
klasbahis giriş
goldenbahis giriş
goldenbahis giriş
interbahis giriş
interbahis giriş
atlasbet
atlasbet
betnano
betnano
kralbet
xslot giriş
xslot giriş