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अखिल भारत हिंदू महासभा का स्थापना दिवस : सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को करना होगा नई परिभाषा के साथ पेश : संदीप कालिया

नई दिल्ली ( सत्यजीत कुमार ) अखिल भारत हिंदू महासभा के स्थापना दिवस 13 अप्रैल पर जारी एक संदेश में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया ने कहा है कि अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को नए अर्थों और संदर्भों के साथ प्रस्तुत करने की आवश्यकता है । श्री कालिया ने कहा कि अखिल भारत हिंदू महासभा का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का दर्शन वैसे तो स्वतंत्रता आंदोलन के समय में भी देश व समाज का मार्गदर्शन व नेतृत्व करता रहा । परंतु अब वर्तमान परिस्थितियों में इसे नए संदर्भ में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश इस समय विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है और सर्वत्र राष्ट्रवाद व राष्ट्रीयता की परिभाषा को लेकर सेकुलर पार्टी हो हल्ला कर रही हैं । जिनके राष्ट्रवाद और राष्ट्रीयता की परिभाषा ने देश का भारी अहित किया है। जिसके परिणाम स्वरूप देश में पृथकतावादी लोग सर्वत्र दिखाई दे रहे हैं। समय आ गया है कि अब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई परिभाषा के अनुसार भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं निश्चित की जानी चाहिए । देश के लिए कुछ भी गलत बोल देना दंडनीय अपराध निर्धारित होना चाहिए। संविधान की भावना का सम्मान करते हुए देश के प्रतीकों का सम्मान करना भी अनिवार्य किया जाना चाहिए । साथ ही शिक्षा वैदिक संस्कारों के अनुसार लागू किया जाना भी नए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अनिवार्यता घोषित की जानी चाहिए।
श्री कालिया ने कहा कि कोरोनावायरस को फैलाने में चीन की लापरवाही सीधे-सीधे जिम्मेदार है । जिसने कोरोनावायरस को फैलाने के लिए अपने लोगों को विश्व के अनेक देशों में भेजा और जहां जहां उसने अपने ऐसे नागरिकों को विशेष रूप से भेजा वहीं वहीं आज हम कोरोना का भयंकर परिणाम सामने आता देख रहे हैं ।इसलिए इस वायरस को कोरोनावायरस न कहकर वुहान वायरस का नाम दिया जाना आवश्यक है । श्री कालिया ने कहा कि कोरोना वायरस के बारे में चीन शुरुआत में लोगों को भ्रम में डालता रहा। इसका फैलाव आदमी से आदमी में नहीं होता परंतु बाद में पता चला कि इसका फैलाव आदमी से आदमी के द्वारा ही होता है । चीन की ऐसी गतिविधियां उसे मानवता का शत्रु बनाने के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि देश के लोगों ने जिस प्रकार प्रधानमंत्री श्री मोदी की अपील पर लॉक डाउन में अपना भरपूर सहयोग दिया है उससे हम इस महामारी को अपने देश में नियंत्रित करने में सफल रहे हैं । यद्यपि कुछ समाज विरोधी और देशद्रोही लोगों ने इसको फैलाने का हर संभव प्रयास किया है परंतु इसके उपरांत भी हमारे सुरक्षा बलों , प्रशासन और शासन के द्वारा इसे हम रोकने में सफल रहे । निश्चित रूप से यह एक शुभ संकेत है जो हमारे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को प्रबल करता है । हमें भविष्य में भी ऐसी स्थिति को बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। जिससे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की यह प्रवृत्ति स्थाई रूप से हमारा एक राष्ट्रीय संस्कार बन जाए । क्योंकि राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सामाजिक एकता और मानव की मानव के प्रति व अपने देश के नेतृत्व के प्रति इसी प्रकार की निष्ठा का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संगठन के 105 वें स्थापना दिवस पर हम देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई परिभाषा को गढ़ने के लिए शासन प्रशासन पर दबाव बनाने का संकल्प लेते हैं और देशवासियों से भी अपेक्षा करते हैं कि नए परिवेश में नई चुनौतियों के लिए अपने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई परिभाषा के साथ सब खड़े हों , जिससे सावरकर और पंडित मदन मोहन मालवीय जी के सपनों का भारत बनाया जा सके।

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