जब महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी कमर नंगी कर दी थी कोड़ा खाने के लिए

महाराजा रणजीत सिंह की माता श्रीमती राज कौर व पिता महा सिंह थे। इनका जन्म 13 नवम्बर 1780 को हुआ गुजरांवाला के पास हुआ था ।जन्म का नाम बुध सिंह था। महाराजा रणजीत सिंह बचपन में चेचक में बाईं आंख खो बैठे थे। गुरुकुल गुजरावाला में इनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। लेकिन जब 10 वर्ष के थे तो पिता का देहांत हो गया। वर्ष 1796 ई0 में मेहताब क़ौर से शादी की। उनकी सास का नाम सदा कौर था ।

सदाकोर की महाराज की आपकी प्रारंभिक विजय अभियानों में विशेष भूमिका होती थी। रणजीत सिंह की अल्पायु को देखकर अहमद शाह अब्दाली के पौत्र शाहशुजा ने लाहौर पर कब्जा करने की कई बार असफल कोशिश की । यही नहीं शाहशुजा से कोहिनूर हीरा भी वापस लिया था । जिस हीरा ने कभी धर्मराज युधिष्ठिर के ताज की शोभा बढ़ाई थी और जो भारत का सर्वोच्च हीरा माना जाता था और प्रतीक चिन्ह माना जाता था। जो बाद में अंग्रेजों द्वारा प्राप्त करके इंग्लैंड भेज दिया गया था।

सन 1801 में पहला पुत्र रतन की प्राप्ति हुई। तथा इसी वर्ष 12 अप्रैल को महाराजा की उपाधि दी गई। हरि सिंह नलवा उनके प्रमुख सेनापति थे ।जिनके किस्से हमने बहुत सुने हैं । इसलिए 13 नवंo2001 को उनके शासन की द्वितीय सती राज्याभिषेक समारोह मनाया गया था। 1799 ई0 से से 1939 ई0 तक 58 वर्ष की आयु तक राज्य किया। उनकी अस्थि अवशेष लाहौर में उपलब्ध हैं । क्योंकि उन्होंने लाहौर एवं पंजाब जो विभाजन से पूर्व का पंजाब था तथा आसपास के क्षेत्र पर शासन किया था। जिन राज्यों को जीता उनके राजाओं को हटाया नहीं बल्कि स्वस्थ्य प्रबंधन को कह कर अपने साथ जोड़ा। उनको शेर-ए-पंजाब कहा जाता है उन्होंने करीब चार दशकों तक पंजाब पर राज्य किया और अफ़गानों को भारतवर्ष से खदेड़ कर बाहर किया उनके समय में अफ़गानों की या अन्य विदेशियों की हिम्मत भारत की तरफ देखने की नहीं थी।

27 जून 2019 को उनकी प्रतिमा लाहौर के किले में पाकिस्तान सरकार द्वारा स्थापित की गई है।उनके उत्तराधिकारी महाराजा खड़क सिंह हुए ।व्यक्तिगत चरित्र बहुत ऊंचा था ।संस्कार बहुत ऊंचे थे एक मुस्लिम नर्तकी मोरा नाम की से उनके संबंध हो गए और जब यह बात जनता को मालूम पड़ गई तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसको स्वीकार किया और अकाल तख्त की मर्यादा को बहाल रखते हुए अकाली फूला सिंह के समक्ष नंगी कमर कोड़े खाने को कर दी थी।

ये थे महाराजा रणजीत सिंह जिन्होंने राजा होते हुए प्रजा की सजा स्वीकार की थी। और एक उच्च आदर्श स्थापित किया था ।

विश्व में आपको ऐसा कोई उदाहरण दूसरा मिल नहीं सकता जहां राजा ने प्रजा से सजा खाई हो। ऐसे थे हमारे राजा ऐसे थे हमारे पूर्वज।

देवेंद्र सिंह आर्य

चेयरमैन : उगता भारत

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