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वर्ष प्रतिपदा को आर्य समाज की स्थापना दिवस पर विशेष

तर्ज . आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं

युगों युगों तक याद रखेंगे

युगों युगों तक याद रखेंगे ॠषि दयानन्द तेरा यह काज।
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
जय देव दयानन्द .2
1.सो थे गहरी निद्रा में अंधकार था बहुत घना।
सत्य ध्वनि वेदों की सुनकर, भागा मिथ्या स्वप्न बना।
पोप और पाखण्डी, मुल्ला, थर.2 काँपे सुन आवाज़।
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
2.चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिनए ॠ षिवर ने बहु उपकार किया
कर आर्य समाज की स्थापनाए दस नियमों का उपहार दिया।
सत्यार्थ प्रकाश आदि रचकर के वैदिक विमल बजाया साज।
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
3.बता वेद में अवनि अघ्न्या गौ को जीवन दान दिया।
नारी को कह सीता.सुलभ भारत माँ का सम्मान किया।
आँसू पोंछे गौ माता के, नारी के सिर धर दिया ताज॥
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
4.नास्तिक गुरुदत्त को आस्तिक सच्चा ईश्वर भक्त बनाया।
जगाकर श्रद्धा श्रद्धानन्द में शुद्धि आन्दोलन चलवाया।
दिखा दिया हमको भी मार्ग, नमन तुम्हें करते ॠ षिराज॥
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
5.लुट जाते और मिट जाते हे ॠ षिवर यदि तुम न आते।
जान न पाते वैदिक संस्कृति गौरव गाथा कैसे गाते।
तेरी खातिर आज मिला हैए हमको अपना पूर्ण स्वराज॥
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
6.जाति, भेद, मत, पंथ भुलाकर एक सूत्र में बंध जाएं।
सच्चे आर्य वीर बनकर के तेरा उपवन महकाएं।
वैदिक वर्ण व्यवस्था पर चलए करें सुखी परिवार समाज॥
किया पुनर्जीवित हम सबको आर्य बनाया आर्य समाज।
विमलेश बंसल आर्या

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