ग्रेटर नोएडा (विशेष संवाददाता) स्वर्गीय प्रोफेसर श्री विजेंद्र सिंह आर्य की धर्मपत्नी श्रीमती शीला आर्या की अरिष्टी के अवसर पर शांति यज्ञ का आयोजन किया गया।
स्मरण रहे कि श्रीमती शीला आर्या का विगत २३ जनवरी को देहान्त हो गया था। दिनांक २८ जनवरी को सुबह उनके निवास स्थान ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 37 के कम्युनिटी सेंटर में १० बजे से ११ बजे तक वैदिक विधि से विद्वान पुरोहित आचार्य विक्रम देव ने शान्ति यज्ञ किया। शान्ति यज्ञ के पश्चात श्रद्धांजलि सभा में हजारों की संख्या में दूर-दूर से आए सम्मानित महानुभावों ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी।
स्वर्गीय श्रीमती शीला देवी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर राकेश कुमार आर्य ने बताया कि उन्होंने 1973 में पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था। जैसा नाम था वैसे ही गुण कर्म स्वभाव की धनी श्रीमती शीला आर्या माता सत्यवती अकैडमी राजेंद्र नगर दादरी की प्राचार्य के रूप में भी कार्य करती रही । परिवार की उन्नति में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा का समाज के उत्थान में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शांति यज्ञ के अवसर पर स्वर्गीय श्रीमती शीला आर्या के गुण, कर्म, स्वभाव को याद किया गया । स्वर्गीय श्रीमती शीला आर्या ने अपने परिवार को जो उत्तम संस्कार दिए और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान की सभी ने प्रशंसा की। शीला आर्या जी के बेटे के समान सबसे छोटे देवर डॉ राकेश कुमार आर्य ने बताया कि हमारी भाभी मां लम्बे समय से अस्वस्थ थीं। डॉ आर्य ने बताया कि परिवार के लोगों ने उनकी देखभाल के लिए एक नर्स सेविका रखने के लिए कहा लेकिन भाभी मां की छोटी पुत्र वधु कविता आर्या ने उस प्रस्ताव को ठुकरा कर स्वयं सासु मां की सेवा करके एक सभ्य और सुसंस्कार वान बेटी का कर्तव्य निभाया। श्रद्धांजलि सभा में आए हुए सभी लोगों ने कविता बेटी की सराहना करते हुए ऐसे लोगों के लिए एक उदाहरण बताया जो अपने माता-पिता व सास ससुर को वृद्ध आश्रम या अनाथ आश्रम में छोड़ देते हैं। सागर आर्य जी ने कहा कि संस्कारों का बीजारोपण परिवार के मुखिया आदरणीय स्वर्गीय श्री राजेन्द्र सिंह बाबूजी ने ही किया था। उन्होंने कहा कि श्रीमती शीला आर्या वेद की इस आदर्श कसौटी पर खरी उतरती थीं कि माता निर्माता होती है। उन्होंने उत्तम संस्कारों को प्रदान कर अपनी संतानों का निर्माण किया।
आर्य जी ने कहा कि राजेंद्र सिंह आर्य बाबूजी का पूरा परिवार आदर्श, शिक्षित व वैदिक संस्कृति को मानने वाला सभ्य आर्य समाजी परिवार है। आर्य जी के पश्चात राष्ट्र निर्माण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आनन्द कुमार पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक माता का जीवन राष्ट्र के लिए बहुत उपयोगी होता है । जबकि श्रीमती शीला आर्या जी ने विद्यालय के माध्यम से उत्तम संस्कार प्रदान कर अनेक छात्र-छात्राओं को राष्ट्र के लिए श्रेष्ठ नागरिक बनाकर भेजने का प्रसंसनीय कार्य किया। श्री जयकरन सिंह भाटी समाज सेवी ने कहा कि मनु की इस व्यवस्था को आर्य परिवार ने पूरी तरह लागू करके दिखाया है कि जहां नारियों का सम्मान होता है वहां पर देवताओं का निवास होता है। श्रीमती शीला आर्या को आज सारा समाज यदि सम्मान की दृष्टि से देख रहा है तो उसके पीछे आर्य परिवार की इस श्रेष्ठ परंपरा को भी समझने की आवश्यकता है। श्री रहीसराम भाटी (प्रेसिडेंट अंसल सोसायटी) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि माता के प्रति आज की युवा पीढ़ी को अपने आचरण पर विचार करने की आवश्यकता है। परंतु इसके लिए आज की नारी को भी सजग होकर संतान के निर्माण पर ध्यान देना होगा। इसके लिए स्वर्गीय श्रीमती शीला आर्य के जीवन को आदर्श के रूप में माना जा सकता है।
श्री वेदप्रकाश एडवोकेट, श्री राकेश नागर एडवोकेट, श्री मास्टर मौजीराम नागर, स्वामी प्राणदेव महाराज जी, श्री वेदप्रकाश आचार्य जी, देवमुनि जी वअनेक महापुरुषों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए परमात्मा से शोक संतप्त परिवार की शान्ति के लिए प्रार्थना की।
स्वामी प्राण देव जी ने अपने संबोधन में कहा कि माता के दिए हुए संस्कारों से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। माता के संस्कारों से शिवाजी जैसे महापुरुषों का निर्माण हुआ है। इसी प्रकार रामचंद्र जी और श्री कृष्ण जी के जीवन को भी समाज के लिए उपयोगी बनाने में माता का योगदान विशेष रहा है। अन्त में परिवार के मुखिया मेजर वीर सिंह आर्य की ओर से उनके अनुज और सामाजिक गतिविधियों में बहुत अधिक बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले श्री देवेन्द्र सिंह आर्य एडवोकेट ने श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी महानुभावों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी को हार्दिक धन्यवाद दिया । सभी ने दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए २ मिनट का मौन करके शान्ति पाठ करने के पश्चात दिवंगत आत्मा की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करके सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।