कुरान को सर्वप्रथम हिन्दी भाषा में अनुवाद (translate) कराने का श्रेय महर्षि दयानंद को है

dayanand

।।ओ३म्।।

स्वामी दयानन्द पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने सर्वप्रथम अपनी आत्म-कथा लिखी।इस आत्म-कथा के हिन्दी में होने के कारण हिन्दी को ही इस बात का गौरव है कि आत्म-कथा साहित्य का शुभारम्भ हिन्दी व स्वामी दयानन्द से हुआ।
स्वामी दयानन्द के समय तक वेदों का भाष्य-व्याख्यायें-प्रवचन-लेखन-शास्त्रार्थ आदि संस्कृत में ही होता आया था। महर्षि पहले व्यक्ति हैं,जिन्होंने वेदों का भाष्य जन-सामान्य की भाषा संस्कृत सहित हिन्दी में किया।यह घटना जहां वैदिक धर्म व संस्कृति की रक्षा से जुड़ी है,वहीं भारत की एकता व अखण्डता से भी जुड़ी है।

न केवल वेदों का ही उन्होंने हिन्दी में भाष्य किया,अपितु मनुस्मृति एवं अन्य शास्त्रीय ग्रन्थों का अपनी पुस्तकों में उल्लेख करते समय उद्धरणों के हिन्दी में अर्थ भी किए हैं।
उन्होंने वेदों का हिन्दी में भाष्य करके पौराणिक हिंन्दू समाज से ब्राह्मणों के शास्त्राध्ययन पर एकाधिकार को समाप्त करके जन-जन को इसका अधिकारी बनाया।यह कोई छोटी बात नहीं,अपितु बहुत बड़ी बात है,जिसका मूल्याकंन नहीं किया जा सकता।
महर्षि दयानन्द के प्रयासों से ही आज हिन्दू व अन्य समाज की किसी भी जन्मना जाति,मत व सम्प्रदाय का व्यक्ति वेद एवं समस्त शास्त्रों का अध्ययन कर सकता है।

स्वामी दयानन्द के ग्रन्थों को इस बात का गौरव प्राप्त है कि धर्म,दर्शन एवं संस्कृति जैसे कठिन व विशिष्ट विषय को सर्वप्रथम उनके द्वारा हिन्दी में प्रस्तुत कर उसे समस्त मनुष्यों के लिए उपलब्ध कराया गया,जबकि इससे पूर्व इन विषयों पर परिस्थितिवश संस्कृत पर पूर्ण अधिकार न रख सकने वाले ब्राह्मण वर्ग का ही एकाधिकार था,इन्होंने स्वार्थवश या अज्ञानतावश इन विषयों को संकीर्ण एवं संकुचित कर दिया था और जिस कारण वेदों का लाभ जनसाधारण को नहीं मिल रहा था,जिसके कि वह अधिकारी थे।
महर्षि को हिन्दी भाषा के लिये प्रेरित करने वालों में कोई हिन्दी भाषी नहीं,अपितु एक बंगाली सज्जन श्री केशवचन्द्र सेन थे।स्वामी दयानन्द जी को श्री केशवचन्द्र सेन ने सुझाव दिया कि वह संस्कृत के स्थान पर हिन्दी को अपनायें। स्वामी दयानन्द जी ने तत्काल यह सुझाव स्वीकार कर लिया।यह दिन हिन्दी के इतिहास की एक प्रमुख घटना थी कि जब एक 47 वर्षीय गुजराती मातृभाषा के संस्कृत के विश्वविख्यात वैदिक विद्वान स्वामी दयानन्द ने तत्काल हिन्दी को अपना लिया।ऐसा दूसरा उदाहरण इतिहास में अनुपलब्ध है।इसके पश्चात स्वामी दयानन्द जी ने जो प्रवचन किए उनमें वह हिन्दी का प्रयोग करने लगे।

हुआ यूँ था कि स्वामी जी की मातृभाषा गुजराती थी,लेकिन उनका अध्ययन-अध्यापन संस्कृत में हुआ था,इसी कारण वह संस्कृत में ही वार्तालाप,व्याख्यान,लेखन,शास्त्रार्थ तथा शंका-समाधान आदि किया करते थे। 16 दिसम्बर,1872 को स्वामी जी वैदिक मान्यताओं के प्रचारार्थ भारत की तत्कालीन राजधानी कलकत्ता पहुंचे थे और वहां उन्होंने अनेक सभाओं में व्याख्यान दिये।एक सभा में गवर्नमेन्ट संस्कृत कालेज,कलकत्ता के उपाचार्य पं. महेश चन्द्र न्यायरत्न स्वामी दयानन्द के संस्कृत भाषण का बंगला में अनुवाद कर रहे थे।उन्होंने ने अनेक स्थानों पर स्वामी जी के व्याख्यान को सही अनुवादित न कर उसमें स्वार्थवश या अज्ञानतावश अपनी विपरीत मान्यताओं को भी प्रकट किया था,जिससे संस्कृत कालेज के श्रोताओं ने उनका विरोध किया।विरोध के कारण श्री महेश चन्द्र न्यायरत्न को बीच में ही सभा छोड़कर जाना पडा था।इस घटना के बाद स्वामी दयानन्द जी को बंगाल के श्री केशवचन्द्र सेन ने सुझाव दिया कि वह संस्कृत के स्थान पर हिन्दी को अपनायें।जिससे धर्म के प्रचार में तेजी आये,क्योंकि हिन्दी को ज्यादा लोग समझते हैं। स्वामी दयानन्द जी ने इस कारण ही तत्काल यह सुझाव स्वीकार किया था।

स्वामी दयानन्द ने अपने ग्रन्थों में एक स्थान पर लिखा कि आर्यावर्त्त (भारत वर्ष का प्राचीन नाम) भर में भाषा का एक्य सम्पादन करने के लिए ही उन्होंने अपने सभी ग्रन्थों को आर्य भाषा (हिन्दी) में लिखा एवं प्रकाशित किया है।
सन् 1882 में ब्रिटिश सरकार ने डा. हण्टर की अध्यक्षता में एक कमीशन की स्थापना कर उससे राजकार्य के लिए उपयुक्त भाषा की सिफारिश करने को कहा।यह आयोग हण्टर कमीशन के नाम से जाना गया।उन दिनों सरकारी कामकाज में उर्दू-फारसी एवं अंग्रेजी का प्रयोग होता था,स्वामी दयानन्द के सन् 1872 से 1882 तक व्याख्यानों,ग्रन्थों,शास्त्रार्थों तथा आर्य संगठन द्वारा वेद प्रचार एवं उसके अनुयायियों की हिन्दी निष्ठा से हिन्दी सर्वत्र लोकप्रिय हो गई थी।इस हण्टर कमीशन के माध्यम से हिन्दी को राजभाषा का स्थान दिलाने के लिए स्वामी जी ने देश की सभी आर्य समाजों को पत्र लिखकर बड़ी संख्या में हस्ताक्षरों से युक्त ज्ञापन इण्टर कमीशन को भेजने की प्रेरणा की।
स्वामी जी ने अपने जानने वालों को पत्र लिखा,‘‘यह काम एक के करने का नहीं है और अवसर चूके यह अवसर आना दुर्लभ है।जो यह कार्य सिद्ध हुआ (अर्थात् हिन्दी राजभाषा बना दी गई) तो आशा है,मुख्य सुधार की नींव पड़ जावेगी।” स्वामी जी की प्रेरणा के परिणामस्वरुप देश के कोने-कोने से आयोग को बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कराकर ज्ञापन भेजे।कानपुर से हण्टर कमीशन को दो सौ मैमोरियल भेज गए जिन पर दो लाख लोगों ने हिन्दी को राजभाषा बनाने के पक्ष में हस्ताक्षर किए थे।हिन्दी को गौरव प्रदान करने के लिए स्वामी दयानन्द द्वारा किया गया यह कार्य भी इतिहास की अद्वितीय घटना है।
भारतवर्ष के इतिहास में महर्षि दयानन्द पहले व्यक्ति हैं,जिन्होंने पराधीन भारत में सबसे पहले राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता के लिए हिन्दी को सर्वाधिक महत्वपूर्ण जानकर मन,वचन व कर्म से इसका प्रचार-प्रसार किया।उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि हिन्दी शीघ्र लोकप्रिय हो गई।

स्वामी दयानन्द के द्वारा हिन्दी भाषा के लिए 77 वर्ष पूर्व आरम्भ किए गये कार्यों व उनकी पश्चात काम करने वाली प्रेरणा के दीर्घकालीन प्रभाव के कारण ही स्वतंत्र भारत में 14 सितम्बर 1949 को सर्वसम्मति से हिन्दी को राजभाषा स्वीकार किया गया।
इस्लाम की धर्म-पुस्तक कुरआन को हिन्दी में सबसे पहले अनुदित(translate) कराने का श्रेय भी स्वामी दयानन्द जी को है।यह अनुदित ग्रन्थ उनकी उत्तराधिकारिणी परोपकरिणी सभा,अजमेर के पुस्तकालय में आज भी सुरक्षित है।
कुछ लोग स्वार्थवश इतने मूर्ख हैं कि कुरान का खंडन भी करते हैं और महर्षि को गालियाँ भी देते हैं।उन्हें शायद ये भी नहीं पता कि कुरान की वास्तविकता को दुनिया के सामने सबसे पहले महर्षि ही लाये थे।पश्चात जितनी भी पुस्तकें लिखी गई,सबकी शैली महर्षि से प्रेरित ही हैं।

– अरविन्द मलिक आर्य

Comment:

kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti 2026
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
Kolaybet
Kolaybet Giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet Güncel Giriş
hititbet giriş
hititbet
Betorder
betorder giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betorder giriş
betnano
betnano
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla Lenf Drenaj
holiganbet
holiganbet
holiganet
bettilt giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
holiganbet
holiganbet giriş
holiganbet güncel
holiganbet
betgaranti giriş
Teknik Seo
hititbet
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
madridbet
madridbet
betnano güncel giriş
betnano giriş
betgaranti giriş