अनेकेश्वरवाद (Polytheism) की कल्पना एक अंधविश्वास – भाग 1

God-is-one
  • डॉ0 डी. के. गर्ग 

अनेकेश्वरवाद एक ऐसा विश्वास है जिसमे हरेक धर्म मत और संप्रदाय का मानने वाला उलझा हुआ है। ईसाई जीसस को ईश्वर का पुत्र बताने के साथ साथ जीसस , मरियम और क्रॉस को पूजते है , ईश्वर स्तुति से कोई लेना देना नहीं। मुस्लिम अल्ला के साथ साथ मोहम्मद,कब्र को भी इसी श्रेणी में रखते है। सिख अपने गुरुओं की स्तुति, गुरुग्रंथ का पाठ और गुरुग्रंथ से आगे नतमस्तक होने के अलावा एक ओंकार सतनाम ,वाहे गुरु भी कहते है।
हिंदू पंथ ईश्वर के अतिरिक्त हजारों काल्पनिक देवताओं , भगवानों , गुरुओं , अवतारी महापुरुषों को ईश्वर के सामान मान्यता देता है। साथ में ये भी स्वीकार करता है कि ईश्वर एक ही है।

बड़ी उलझन है , अनेकेश्वरवाद में अनेक देवताओं की पूजा की जाती है। अनेकेश्वरवाद में, एक से अधिक ईश्वर होते हैं, और प्रत्येक ईश्वर अलग-अलग भूमिका निभाता है और विभिन्न देवताओं की पूजा और आराधना विभिन्न तरीको से की जाती है।
उदाहरण के लिए –आप किसी मंदिर में जाओ तो आपको एक से अधिक अवतारों या देवताओ की मुर्तिया मिलेंगी जैसे राम ,हनुमान , कृष्ण , साई ,शिव, गणेश ,धर्मगुरु आदि के अतिरिक्त तुलसी , वट ,पीपल आदि की भी पूजा ईश्वर के सामान मानकर होती है । इतना ही नहीं देश में हजारो देवियो के मंदिर है जिनमे कुछ बिलकुल काल्पनिक है , कुछ को अवतार माना जाता है जैसे नीम करोली बाबा और कही कही ईश्वर के गुणों के अनुसार काल्पनिक मुर्तिया भी है जैसे सरस्वती ,लक्समी आदि। जहां एक ही मंदिर में बहुत सी मुर्तिया होती है और भक्त अपनी इच्छा के अनुसार एक या एक से अधिक मूर्तियों के आगे नतमस्तक होता हुआ उनका आशीर्वाद मांगता है। ऐसा भी होता है की भक्त के घर में भी तथाकथित भगवन ,देवताओ की मुर्तिया होती है और घर कके आसपास भी परन्तु चमत्कार के चक्कर में दूर दूर तक देवी देवताओं की मूर्तियों के दर्शन करने जाता है ,जैसे बांग्ला मुखी देवी, तिरुपति मंदिर ,रामेश्वरम आदि।
यदि देखा जाये तो अकेले भारत में ही ऐसे हजारों लाखों देवताओ और भगवानो की पूजा होती है जिनमें हजारों अज्ञात है क्योंकि क्षेत्रवार भगवान,देवता ,उनकी प्रतिमा सब बदल रहे है ।आजतक कोई पूरा विवरण नहीं मिल पाया है। ऐसी मूर्ति पूजा वयक्ति को इतना अंधविश्वासी और मूर्ख बना देती है की वह मुल्लो की पीर मजार के आगे भी सर झुकाने ,अगरबत्ती जलाने से नहीं बाज आता है।

इस विषय में यदि किसी से बात करो तो उसके ये हाजिर जवाब मिलेंगे –

। ईश्वर केवल एक ही है ।
२ ईश्वर सर्वव्यापी है
३ ईश्वर श्रद्धा का विषय है ,ये सिर्फ विश्वास है क्योकि ये मान्यता चलती आयी है
४ मूर्ति पूजा से चित्त के एकाग्रता बनती है।

सच ये है की ये जानते हुए भी की ईश्वर एक ही है , भोले भले लोग स्वाध्याय नहीं करते और अनेकेश्वरवाद के शिकार होकर अधर्म में स्वयं को धकेल रहे है।
जहां तक मूर्ति के आगे चित्त की एकाग्रता का प्रश्न है मैने किसी को एकाग्रचित्त होते नहीं देखा , वहां घंटी बजते है,और मूर्ति के दर्शन करते है तब तक पुजारी वहां से हटा देता है कि लाइन बड़ी लंबी है दूसरे को आने दो।

अनेकेश्वरवाद और एकेश्वरवाद में अंतर:-
अनेकेश्वरवाद में, एक से अधिक ईश्वर होते हैं, जबकि एकेश्वरवाद में, केवल एक ईश्वर होता है।और एक ईश्वर के ये गुण होते है —
1. उसका अस्तित्व है ।
2. वह चेतन है ।
3. वह सब सुखों और आनंद का स्रोत है ।
4. वह निराकार है ।
5. वह अपरिवर्तनीय है ।
6. वह सर्वशक्तिमान है ।
7. वह न्यायकारी है ।
8. वह दयालु है ।
9. वह अजन्मा है ।
10. वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता ।
11. वह अनंत है ।
12. वह सर्वव्यापक है ।
13. वह सब से रहित है ।
14. उसका देश अथवा काल की अपेक्षा से कोई आदि अथवा अंत नहीं है ।
15. वह अनुपम है ।
16. वह संपूर्ण सृष्टि का पालन करता है ।
17. वह सृष्टि की उत्पत्ति करता है ।
18. वह सब कुछ जानता है।
19. उसका कभी क्षय नहीं होता, वह सदैव परिपूर्ण है ।
20. उसको किसी का भय नहीं है ।
21. वह शुद्धस्वरूप है ।
22. उसके कोई अभिकर्ता (एजेंट) नहीं है । उसका अन्य किसी की सहायता के बिना सभी जीवों के साथ सीधा सम्बन्ध है।
एक मात्र वही उपासना करने के योग्य है,

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meybet giriş
meybet giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
meybet
meybet
orisbet giriş
orisbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
interbahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
milanobet giriş
hiltonbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
hiltonbet giriş
milanobet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino giriş
betbox giriş
betsilin giriş
betsilin giriş