Categories
आज का चिंतन युवा शिक्षा/रोजगार

… निश्चित रूप से आप आगे बढ़ेंगे

  • डॉ राकेश कुमार आर्य

एक बीज को आप धरती में बोते हैं तो अनेक ढेले उसके ऊपर आ पड़ते हैं। उन ढेलों की जिद होती है कि हम तुझे बाहर नहीं निकलने देंगे। उधर बीज की प्रतिभा कहती है कि तुम चाहे जितने पहले बैठा लो, मुझे फूट कर बाहर निकलना ही है। बीज मिट्टी के साथ अपना समन्वय बनाता है। बाहर निकलने के लिए अपनी छाती पर बैठे ढेलों के साथ लड़ाई लड़ता है। ले देकर के समझौता हो जाता है। मिट्टी कहती है कि जैसा मेरा रंग है वैसे ही रंग में रंग कर बाहर जाना चाहता है तो निकल जा। मिट्टी के ढेले बाहर निकलते बीज के अंकुरण को रोक नहीं पाते। एक ही साथ जहां मिट्टी के बारीक कण बीज के अंकुरण का साथ दे रहे होते हैं वहीं मिट्टी के ढेले उसे रोकने का हर संभव प्रयास करते हैं। मिट्टी के बारीक कणों और बीज के बीच समझौता होता है। जिसके परिणाम स्वरूप बीज जब अंकुरण के रूप में बाहर निकलता है तो मिट्टी के पीले रंग की चादर ओढ़कर ही बाहर आता है।

बाहर आते ही बीज का अंकुरण अब अपने पहले दोनों स्वरूपों को त्याग देता है। अब वह न तो बीज होता है, न अंकुरण होता है। अब वह संसार के लिए नन्हा सा पौधा बन जाता है। … और वह हरा-भरा होकर आगे बढ़ने लगता है ।
कुछ समय बाद खेत का किसान खेत में पानी लगाता है और ढेलों का अस्तित्व मिट्टी में मिल जाता है। परंतु तब तक बीज एक पौधा बनाकर आगे बढ़ने लगता है।

इसी प्रकार संसार के लोग हैं जो ढेले के रूप में आपके अस्तित्व को रोकने का प्रयास करते हैं । परंतु एक समय आता है कि वह ढेले के रूप में मिट्टी में मिलकर वहीं रह जाते हैं और आप आगे बढ़ जाते हैं। इसलिए अपनी प्रतिभा पर विश्वास कीजिए। अपने अस्तित्व पर विश्वास कीजिए। परमपिता परमेश्वर की अनंत कृपा पर विश्वास कीजिए। आपको वृक्ष बनना है तो आप को कोई रोक नहीं सकता और यदि आपने ‘ ढेलों’ की चुनौतियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया तो आपको मिटाने से भी कोई नहीं रोक सकता। देखना आपको है कि आप वृक्ष बनना चाहते हैं या अपने चारों ओर बिखरे पड़े ढेलों के अस्तित्व में मिट जाना चाहते हैं।
अपने अस्तित्व से संवाद स्थापित कीजिए। अपनी सात्विक मनोवृतियों को अपने अस्तित्व के साथ जोड़िए। अपने अस्तित्व को संवारने का काम करते रहिए।

जैसे ढेलों की चुनौतियों के अर्थात प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच बीज को अनुकूलताओं की सकारात्मक शक्ति के रूप में मिट्टी के बारीक कण ईश्वर की सहायक शक्ति के रूप में मिले और उन्होंने उसे आगे बढ़ने में सहायता प्रदान की, वैसे ही जीवन में देखते रहिए जहां प्रतिकूलताओं के ढेले पड़े होंगे, जमाने के लोग आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए हाथों में लाठियां लिए खड़े होंगे, वहीं कुछ ऐसी अनुकूलताओं के पुष्प भी बिखरे पड़े होंगे जो आपके जीवन को भी महक से भरने में काम आएंगे । इन अनुकूलताओं के पुष्पों को पहचानने का प्रयास कीजिए। यदि कभी पहचानने में सफल हो जाओ तो मानना कि यह ईश्वर की अनुकंपा है। इसी को समझना कि यही मेरे माता-पिता और बड़ों का शुभ आशीर्वाद है। अपने लिए प्रतिकूलताओं को या विपरीत परिस्थितियों को कोसने का काम मत कीजिए। प्रत्येक विपरीत परिस्थिति के आने पर अनुकूलताओं और सकारात्मक ऊर्जा को देखते रहिए। उनका संचयन कीजिए। निश्चित रूप से आप आगे बढ़ेंगे।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
setrabet giriş
setrabet giriş
setrabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
setrabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
restbet giriş
restbet giriş
galabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş