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उगता भारत न्यूज़

बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा का राष्ट्र निर्माण एवं धर्म रक्षा सम्मेलन हुआ आरंभ

महर्षि दयानंद सरस्वती की 200 वीं जयंती एवं आर्य समाज के 150 वें वर्ष पर

‌पटना (विशेष संवाददाता) महर्षि दयानंद सरस्वती जी महाराज की 200 वीं जयंती और आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर यहां स्थित दयानंद कॉलेज मीठापुर में बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा एवं आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि उपसभा के‌ संयुक्त तत्वावधान में विराट आर्य महासम्मेलन राष्ट्र निर्माण एवं धर्म रक्षा सम्मेलन को तरसतिगत रखते हुए आरंभ हुआ। इस महान और ऐतिहासिक कार्यक्रम का शुभारंभ ओ३म ध्वजारोहण के साथ हुआ। जिसे वैदिक जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान एवं संन्यासी स्वामी ओमानंद जी महाराज द्वारा संपन्न किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संरक्षक एवं मेघालय और सिक्किम के राज्यपाल रहे गंगा प्रसाद, भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य और आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान डॉ व्यास नंदन शास्त्री सहित अनेक आर्यजन रहे।

आर्य प्रतिनिधि सभा बिहार के अध्यक्ष डॉ संजीव चौरसिया विधायक, आर्य वीर दल बिहार के संचालक आचार्य संजय सत्यार्थी, आर्य प्रतिनिधि सभा बिहार के मंत्री रमेंद्र कुमार गुप्ता जैसे समर्पित व्यक्तित्वों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के बारे में डॉ व्यास नंदन शास्त्री ने बताया कि इस कार्यक्रम का शुभारंभ विगत 8 अप्रैल को ही विधिवत हो चुका था और उसी दिन से वैदिक यज्ञ का कार्य आचार्या अनामिका शास्त्री एवं आचार्य प्रभामित्र के संयुक्त ब्रह्मत्व में निरंतर चल रहा है। इस यज्ञ के वेदपाठी पाणिनि कन्या महाविद्यालय से उपस्थित हुए हैं।

प्रथम दिवस के सत्र में राष्ट्र रक्षा एवं संस्कृति रक्षा पर गहन चिंतन मंथन किया गया। जिसकी अध्यक्षता गंगा प्रसाद पूर्व राज्यपाल द्वारा की गई। जिसमें महान इतिहासकार एवं भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता डॉ राकेश कुमार आर्य द्वारा अपना संबोधन देते हुए कहा गया कि भारत के राष्ट्रीय झंडे से ओ३म और वंदे मातरम के साथ-साथ भगवा ध्वज को समाप्त करने, संस्कृत को राष्ट्रभाषा घोषित करने से रोकने, धारा 370 को संविधान में स्थापित करने जैसे पाप देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किए गए। जिससे स्वामी दयानंद जी महाराज के सपनों का भारत बनने का आर्यजनों का संकल्प पीछे छूट गया। जिसके लिए आज आर्य समाज को नई ऊर्जा के साथ काम करने की आवश्यकता है। हमें नए भारत के संकल्प के लिए आगे बढ़ना होगा।

अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध सुकवि एवं महोपदेशक ‌ डॉ प्रशस्य मित्र शास्त्री ने महर्षि दयानंद की जयंती एवं आर्य समाज को समर्पित करती हुई कविता सुनाकर जनमानस को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बौद्धिक चिंतन संपन्न लोगों को चुनकर देश के विधान मंडलों में भेजने की आवश्यकता है।

प्रसिद्ध आर्य संन्यासी राष्ट्रीय संत स्वामी ओमानंद जी महाराज ने राष्ट्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक व्याख्या करते हुए लोगों का आवाहन किया कि भारत के सनातन मूल्यों को राष्ट्र के राजनीतिक लोग जिस दिन अपना लेंगे, उसी दिन भारत विश्व गुरु के पद पर आसीन हो जाएगा।

सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान और कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ व्यासनंदन शास्त्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस अवसर पर युवाओं का आवाहन किया कि वह राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि इस समय संपूर्ण संसार भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। हमें आवश्यकता है कि संसार की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए हम अपने वैदिक ऋषियों के सपनों का भारत बनाने के लिए नई क्रांति का सूत्रपात करें।

आर्यों के इस महासम्मेलन के कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक व मेघालय एवं सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद अंत्योदयवाद की भावना पर टिका हुआ है। इसका समाजवादी दृष्टिकोण सारे संसार के लिए स्वीकार्य हो सकता है। क्योंकि संसार की जितनी भर भी राजनीतिक व्यवस्थाएं हैं, वे सारी की सारी इस समय असफल हो चुकी हैं ।अब भारत की बारी है और आज हम इस अवसर पर संकल्प लेते हैं कि भारत के वास्तविक एकात्मक मानववाद को स्थापित कर हम विश्व को नई दिशा देंगे।

इस अवसर पर सायंकालीन बेला में विशाल शोभा यात्रा का भी आयोजन किया गया। जिसमें आर्य वीरों एवं आर्य कन्या विद्यालय मीठापुर, दयानंद विद्यालय मीठापुर, आर्य कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं आर्य पाठशाला नया टोला पटना एवं इंटर स्कूल दानापुर कैंट पटना और कई विद्यालयों के एनसीसी कैडेट्स के साथ साथ अनेक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इन सभी छात्र-छात्राओं को राष्ट्र रक्षा एवं संस्कृति रक्षा का संकल्प दिलवाकर उन्हें इस विशेष अवसर पर दीक्षित किया गया। इस अवसर पर बिहार राज्य के विभिन्न जिलों के जिला प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ-साथ अनेक आर्य जनों ने शोभायात्रा में भाग लिया।

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