हैदराबाद स्टेट में इस्लामिक आतंक के पहले शिकार वेद प्रकाश जी

vedprakash ji krantikari
  • डॉ विवेक आर्य

वेद प्रकाश जी का पूर्व नाम दासप्पा था। दासप्पा संवत् 1827 में गुंजोटी में पैदा हुए। इनकी माता का नाम रेवती बाई और पिता श्री का नाम रामप्पा था। गरीब माता-पिता को इसकी क्या सूचना थी कि उनका बेटा बड़ा होकर हुतात्मा बनेगा और वैदिक धर्म के मार्ग में बलिदानी होकर अमर हो जाएगा। दासप्पा ने मराठी माध्यम से आठवीं श्रेणी तक शिक्षा ग्रहण की। जैसे-जैसे ये बढ़ते गये वैसे-वैसे वे धर्म की ओर आकर्षित होते गये। वे आर्य समाज के सत्संगों में बराबर सम्मिलित होते थे। वैदिक धर्म के आकर्षण ने इन्हें महर्षि दयानन्द का पक्का भक्त बना दिया। आर्य समाजी बनने के बाद यह वेद प्रकाश कहलाने लगे थे। इनका आर्य समाज में असाधारण प्रेम एवं निष्ठा के ही कारण गुंजोटी में आर्य समाज की नींव डाली गयी पर स्थानीय ईर्ष्यालु यवन इन्हें देखकर जलने लगे थे। वेद प्रकाश जी सुगठित शरीर एवं सद्गुण रखते थे और लाठी-तलवार चलाने की विद्या में पर्याप्त दक्ष थे। इनकी यह दक्षता कई भयंकर संकटों के समय इनकी सहायक सिद्ध हुई। कई बार विरोधी दल ने इन पर आक्रमण किये और ये अपने आपको सुरक्षित रखने में सफल हुए।

गुंजोटी का छोटे खां नाम का एक पठान स्त्रियों को गलत निगाहों से देखता था। एक दिन वेद प्रकाश जी ने इसे ऐसा करने से रोका और सावधान किया कि भविष्य में इस प्रकार कुदृष्टि मातृ समाज पर न डालें। यह बात गुण्डों को हृदय ग्राही न थी और सब इनके शत्रु हो गए। वेद प्रकाश जी ने गुंजोटी में हिन्दुओं के लिये पान की एक दुकान खोल दी और चाँद खान पान का एक व्यापारी इनका शत्रु हो गया और भीतर ही भीतर इनके विरुद्ध षड्यंत्र रचने लगा। एक दिन यवनों ने स्थानीय आर्य समाज के मन्त्री के मकान पर अकस्मात् धावा बोल दिया। इसकी सूचना वेद प्रकाश जी को मिली। वे इन आक्रमणकारियों को रोकने के लिए निःशस्त्र ही चले गये। मन्त्री के मकान के समीप दो-तीन मुसलमानों ने इन्हें पकड़ लिया और आठ-नौ व्यक्तियों ने इन्हें नीचे गिरा कर हत्या कर दी। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि उस दिन पुलिस ने वहां के प्रतिष्ठित हिन्दुओं को थाने में बुलाकर बैठा रखा था। आक्रमणकारियों और हत्यारों को पहचान लिया गया और न्यायालय में गवाह भी उपस्थित किये, पर फिर भी हत्यारों को निर्दोष घोषित कर दिया गया। इस्लामिक राज में हिन्दुओं के साथ ऐसा होना कोई अचरज की बात नहीं थीं।

वेद प्रकाश जी का बलिदान हैदराबाद में पहला बलिदान था जो बड़ी निर्दयता के साथ किया गया था और इसके बाद वीर आर्यों के बलिदानों का एक क्रम ही चल पड़ा। अंततः आर्यसमाज को हैदराबाद में हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हैदराबाद आंदोलन करना पड़ा। इस आंदोलन ने संसार धनी व्यक्ति तत्कालीन हैदराबाद के निजाम को झुका दिया और अंततः रजाकारों के आतंक से मुक्ति और हैदराबाद को देश में विलय करवाने के लिए आपरेशन पोलो सरदार पटेल द्वारा चलाया गया था।

हैदराबाद स्वाधीनता आंदोलन के अमर हुतात्मा वेद प्रकाश जी को बलिदान दिवस के अवसर पर विनम्र अभिवादन!! भावपूर्ण श्रद्धांजलि!

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş
Hitbet giriş
millibahis
millibahis
betnano giriş
bahisfair giriş
betnano giriş
bahisfair giriş
bahisfair giriş
bahisfair giriş
betnano giriş
betnano giriş
timebet giriş
timebet giriş
roketbet giriş