मनु महाराज की प्रतिमा संसद के प्रांगण में लगाने की मांग के साथ मनु महोत्सव हुआ संपन्न

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मनुस्मृति का मानवतावादी चिंतन हुआ राजनीति का शिकार : प्रो0 सुरेंद्र कुमार

ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित कन्या गुरुकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेरली ग्रेटर नोएडा में आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के तत्वावधान में चले विश्व के पहले त्रिदिवसीय मनु महोत्सव का समापन हो गया है। तीसरे दिन के समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए मनुस्मृति के भाष्यकार आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान और गुरुकुल कांगड़ी के पूर्व कुलपति रहे प्रो0 सुरेंद्र कुमार ने कहा कि मनुस्मृति की मानवतावादी मान्यताएं और चिंतन राजनीति का शिकार हो गया है। जिस मनुस्मृति का सबसे अधिक विरोध ब्राह्मणों और राजनीतिक लोगों को करना चाहिए था, दुर्भाग्य से उस मनुस्मृति का विरोध वह वर्ग कर रहा है, जिसे सबसे अधिक अधिकार और सुरक्षा उपाय मनुस्मृति द्वारा प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मनु महाराज ने कथित दलित समाज के किसी व्यक्ति के लिए शूद्र होने के कारण सबसे कम दंड का विधान किया है, जबकि ब्राह्मण या राजा होने पर कड़े और अधिक दंड का विधान किया है। इससे स्पष्ट होता है कि मनु महाराज शूद्र विरोधी नहीं अपितु शूद्र के हितों के रक्षक हैं। जबकि आज मनुस्मृति को शूद्र वर्ग विरोधी दिखाया जा रहा है। इस प्रकार की सोच को विकसित करने में राजनीति ने बहुत गलत भूमिका निभाई है। राजनीतिक लोगों ने अपने निहित स्वार्थ में मनु महाराज को अपमानित किया है।

कार्यक्रम के आयोजक एवं आर्य उप प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो0 सुरेंद्र कुमार ने कहा कि मनुस्मृति की गलत व्याख्या करते हुए उसमें बड़े स्तर पर मिलावट की गई है। जिसका कारण केवल एक था कि वैदिक धर्म की वैज्ञानिक मान्यताओं को नष्ट भ्रष्ट कर दूसरे वर्गों की अवैज्ञानिक मान्यताओं को स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में ऐसा मूल रूप में कहीं भी नहीं लिखा गया कि नारी को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है या किसी वर्ग विशेष को अधिकारों से विहीन कर दिया जाए। मनु के नाम पर नारी जाति का शोषण करना मानवता के विरुद्ध अपराध है। निहित स्वार्थ में राजनीतिक लोगों ने मनुस्मृति को कोसना आरंभ किया। जिसका परिणाम यह हुआ कि सारे समाज में मनुस्मृति के विरुद्ध धारणा बनने लगी। अपने संस्मरण बताते हुए उन्होंने कहा कि मैंने स्वामी दयानंद जी महाराज के विशेष परिश्रम से प्रभावित होकर मनुस्मृति पर काम करना आरंभ किया। जिसके चलते विशुद्ध मनुस्मृति का भाष्य संभव हो पाया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ राकेश कुमार आर्य ने इस अवसर पर सभा की ओर से पारित सात प्रस्तावों के बारे में बताया कि आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतम बुद्ध नगर ने मनुस्मृति के मानवतावादी शुद्ध चिंतन को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने और मनु महाराज की प्रतिमा भारतीय संसद के प्रांगण में स्थापित करने की मांग की है। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई है कि मनु महाराज जैसे महर्षि की जयंती प्रतिवर्ष सरकारी स्तर पर मनाई जानी आरंभ की जानी चाहिए। वर्तमान पाठ्यक्रम में मनु को विशिष्ट स्थान प्रदान किया जाना चाहिए।कार्यक्रम के संरक्षक देवेंद्र सिंह आर्य ने इस अवसर पर इतिहास के विशेष संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आज का यह नारी सम्मेलन हमें उन अनेक विदुषी और वीरांगना महिलाओं के बारे में चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और राजनीतिक इतिहास को बनाने में अपना विशेष योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत में ही संभव है जहां गार्गी जैसी विदुषी नारी अपने पति को ही शास्त्रार्थ में पराजित कर देती है। परंतु याज्ञवल्क्य ऋषि भी कितने महान थे, जिन्होंने यह स्पष्ट घोषणा की कि वह शास्त्रार्थ में विजई नहीं बल्कि पराजित हुए हैं । उन्होंने ऐसा केवल सत्य के महिमामंडन के दृष्टिकोण से किया था।

सभा में राजार्य सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह आर्य ने कहा कि वेदों की शुद्ध मानवतावादी सोच को विकृत करने के लिए जिस प्रकार की मिलावट भारत के आर्ष ग्रन्थों में हुई है वह एक अक्षम्य प्रकृति का अपराध है। सभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य करण सिंह ने भी मनुस्मृति की वैज्ञानिक मान्यताओं का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ पौराणिक पंडितों ने जानबूझकर मनुस्मृति में मिलावट करवाई है। जिसे आज विशुद्ध मनुस्मृति के माध्यम से समझा जा सकता है। देव मुनि जी महाराज ने मनु महाराज की मनुस्मृति को देश के सर्वोच्च न्यायालय के लिए आदर्श ग्रंथ के रूप में स्थापित करवाने की मांग की। प्राचार्य गजेंद्र सिंह ने महर्षि दयानंद जी महाराज के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि उन्होंने मनु की वैज्ञानिक बुद्धि का सबसे पहले सही-सही और सटीक अवलोकन करने में सफलता प्राप्त की थी। यदि वह मनु महाराज को सत्यार्थ प्रकाश में स्थापित न करते तो आज हम मनु और मनुस्मृति के बारे में भ्रांतियों का वैसे ही शिकार हो गए होते जैसे शेष समाज शिकार बना हुआ है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कथित जाटव समाज के विद्वान श्री रामप्रसाद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दलित समाज में पैदा होकर भी ब्रह्म पद को सुशोभित करने की खुली छूट प्रदान करना ही वास्तविक मनुवाद है। मैं स्वयं कथित जाटव समाज में पैदा होकर ब्राह्मण के कार्य करता हूं यह शक्ति मुझे आर्य समाज ने ही प्रदान की है। यह केवल तभी संभव हो पाया है जब आर्य समाज ने डिंडिम घोष करते हुए यह मान्यता स्थापित की कि एक निम्न वर्ण के व्यक्ति के घर में पैदा हुआ बच्चा भी अपनी वैज्ञानिक बुद्धि और सोच के कारण ब्राह्मण पद पर विराजमान हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनु महाराज ने कहीं पर भी जातिवाद का समर्थन नहीं किया है , न ही वह जाति का निर्माण कर सकते थे। उन्होंने वैदिक चिंतन के अनुसार वर्ण व्यवस्था का समर्थन करते हुए प्रत्येक वर्ण के धर्म का निर्धारण किया है। आर्य समाज के युवा विद्वान ब्रह्मचारी आर्य सागर ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि आर्य समाज ने जिस हुंकार को इस मनु महोत्सव के माध्यम से इस विद्यालय के प्रांगण से भरा है, उसकी आवाज दूर तक जाएगी और हम इस आवाज के माध्यम से जन क्रांति करने में सफल होंगे।

नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए आर्य जगत की सुप्रसिद्ध विदेशी विदुषी मनु आर्य ने इस अवसर पर कहा कि मनु महाराज ने कहीं पर भी नारियों का उत्पीड़न करने का संकेत तक नहीं दिया है। उनकी मनुस्मृति में मिलावटी श्लोक मिलाकर उन्हें बदनाम करने के लिए कुछ लोगों ने ऐसा कार्य किया है। जिसका निवारण केवल आर्य समाज के पास है। कार्यक्रम का सफल संचालन आर्य प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश नागर एडवोकेट द्वारा किया गया।

तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम में यज्ञ के आयोजन का ब्रह्मत्व पद आचार्य विक्रमदेव शास्त्री और आचार्य वेद प्रकाश जी द्वारा किया गया। दोनों ही आचार्यों ने यज्ञ की सुंदर व्यवस्था बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जबकि गुरुकुल मुर्शदपुर के विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर कार्य किया। इस मनु महोत्सव में ओमप्रकाश फ्रंटियर, जगमाल महाशय, सत्यपाल आर्य और पंडित धर्मवीर सात्विक जी द्वारा भजनों के माध्यम से लोगों का मार्गदर्शन किया गया।

इस अंतिम दिवसीय कार्यक्रम में सरपंच रामेश्वर सिंह ,सतीश नंबरदार, ओमवीर सिंह भाटी, आर्य वीरेश भाटी, मूलचंद शर्मा, पूरन सिंह आर्य, राघवेंद्र सोलंकी, महावीर सिंह आर्य, धर्मवीर सिंह आर्य, आर्य समाज घोड़ी बछेड़ा के प्रधान रविंद्र आर्य व सतीश आर्य, आर्य समाज कोंडली के सदस्य अनार सिंह आर्य, सुशील आर्य,जीत सिंह आर्य, आर्य समाज आकिलपुर के प्रधान चरण सिंह आर्य, लीलू आर्य, आर्य दिवाकर, इंजीनियर श्यामवीर सिंह भाटी, कमल आर्य, अमन आर्य, श्रीमती ऋचा आर्या, श्रीमती मृदुला आर्या , श्रीमती ओमवती आर्य, श्रीमती इंदु शर्मा, जयपुर से चलकर कार्यक्रम में पहुंचे श्री चंद्रशेखर शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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