विदेशों में हिन्दू धर्म स्थलों पर आक्रमणों के पीछे का सच

BAPS temple vandalised
  • ललित गर्ग

खालिस्तानी अलगाववादियों से जुड़े कुछ अराजक तत्वों ने एक बार फिर अमेरिका में कैलिफोर्निया स्थित स्वामी नारायण मंदिर पर हमला किया है, हिन्दुओं वापिस भारत जाओ जैसे आपत्तिजनक संदेश लिखकर मंदिर को क्षति पहुंचायी गई है। हिन्दू मन्दिरों एवं आस्था पर बार-बार हो रहे ये हमने दुर्भाग्यपूर्ण एवं शर्मनाक है। आतंक फैलाने की मंशा से मंदिरों पर हमले की ऐसी घटनाओं का बार-बार होते रहना चिन्ता का सबब है। ऐसे पृथकतावादी तत्व हिंदुओं के खिलाफ विषवमन करके अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं एवं दवाब बनाना चाहते हैं। भारतीय सांझा संस्कृति में मिलजुलकर रहने वाले समाजों को विभाजित करके घृणा, नफरत एवं द्वेष उत्पन्न करने वाले तत्वों को न केवल बेनकाब करने की जरूरत है बल्कि उन्हें नेस्तनाबूंद किया जाना चाहिए। बात केवल खालिस्तानी अलगाववादियों की नहीं है, मुस्लिम आतंकवादी भी विभिन्न देशों में हिन्दू धर्म, मन्दिर, आस्था एवं संस्कृति पर ऐसे ही हमले करके दहशत फैला रहे हैं। हिन्दू समुदाय नफरत के खिलाफ मजबूती से खड़ा है, वह कभी भी नफरत को जड़ नहीं जमाने देंगा। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन व कनाडा सरकारों द्वारा ऐसे मामलों की अनदेखी और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई न करना विडम्बनापूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण है। भारत सरकार को भी कड़े कदम उठाते हुए सख्त संदेश देना चाहिए।अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाए जाने को खालिस्तान समर्थकों से जोड़कर देखा जा रहा है। दक्षिण कैलिफोर्निया के चिनो हिल्स इलाके में स्थित मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे गए अरैर मन्दिर को क्षति पहुंचाई गयी। माना जा रहा है कि खालिस्तान जनमत संग्रह से पहले साजिश के तहत ये हमला किया गया है। कुछ दिन पहले न्यूयार्क में भी स्वामीनारायण मंदिर पर भी हमला हुआ था। 25 सितंबर को कैलिफोर्निया के सेक्रामेंटो स्थित स्वामीनारायण मंदिर को भी निशाना बनाया गया था, तोड़फोड़ की गई और उस पर आपत्तिजनक संदेश भी लिख दिए गए हैं।

आपत्तिजनक यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन व कनाडा में सक्रिय ऐसे तत्वों को इन देशों की सरकारों द्वारा राजनीति के चलते खुला समर्थन देना एवं अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर प्रश्रय दिया जाना बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है, कब तक खामोश रहा जाये? कैलिफोर्निया में स्वामीनारायण मंदिर पर हुई घटना से पहले लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर के गाड़ी के सामने खालिस्तान समर्थकों ने प्रदर्शन किया था, जिसे सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। जो खालिस्तान समर्थक विदेश मंत्री के काफिले तक कूद गया, वह सुनियोजित ढंग से हमला भी कर सकता था। निश्चित तौर पर यह ब्रिटिश पुलिस की कोताही एवं लापरवाही है। उस समय खालिस्तानी उग्रवादी ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ का भी अपमान किया।विडंबना यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन व कनाडा के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश की सरकारें ऐसे हमलों व मंदिरों को अपवित्र करने, उनको नुकसान पहुंचाने, अराजक माहौल खड़ा करने की घटनाओं को अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में रखकर आंखें मूंद लेती हैं या कुछ देश कट्टरतावाद के चलते उन देशों के अल्पसंख्यक समुदायों पर तरह-तरह के हमले होने देती है। यह विडम्बना ही है कि जब दूसरे देशों में उनके धर्म के लोगों के पूजा स्थलों पर हमले होते हैं तो उसे धार्मिक आजादी व मानवाधिकारों का संकट बताने लगते हैं, फिर हिन्दू मन्दिरों एवं आस्था पर हो रहे ऐसे हमलों को लेकर दोहरी मानसिकता एवं दोहरा मापदण्ड क्यों? क्यों भेदभावपूर्ण मानसिकता है? निश्चित रूप से ऐसे ही रवैये से भारत के साथ इन देशों के संबंधों में खटास आती है।

ऐसे ही अलगाववादियों के कृकृत्यों व कनाडा सरकार के अलगाववादियों को संरक्षण देने के चलते ही दोनों देशों के संबंध सबसे खराब दौर में पहुंचे हैं। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हमलों के कारण ही दोनों देशों के संबंध बिगड़ चुके हैं। आतंक से जो जन्मती है, वह संस्कृति नहीं होती है, उसमें पाशविकता होती है, उसमें जानवर विद्यमान होते हैं। ऐसे व्यक्ति, संगठन एवं देश किसी के प्रिय नहीं हो सकते, वे मानवता को त्राण नहीं, संत्रास देते हैं।भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस तरह की कुत्सित कोशिशों की तीव्र निंदा एवं भर्त्सना की है, सवाल यह उठता है कि जब ऐसी आजादी किसी सभ्य समाज के अहसासों से खिलवाड़ करे और दूसरों की धार्मिक आजादी का अतिक्रमण करने लगे तो क्या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करनी चाहिए? दरअसल, ये घटनाक्रम इन देशों के दोगले मापदंड उजागर करते हैं। दूसरे देशों में सांप्रदायिक असहिष्णुता और कथित भेदभाव के आंकड़े जारी करके दबाव बनाने वाले तथाकथित सभ्य देश अपने क्रियाकलापों से बेनकाब हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में करीब एक दर्जन मंदिरों को अपवित्र करने की कुत्सित कोशिश हुई, लेकिन ऐसे तत्वों के खिलाफ दिखावे के लिये भी कार्रवाई नहीं की गई। किसी हमले की जांच भी नहीं हुई। जबकि प्रत्येक संप्रदाय की धार्मिक आजादी की रक्षा करना अमेरिकी सरकार का नैतिक दायित्व है। अमेरिका खुद को धर्मनिरपेक्षतावादी एवं मानवाधिकार का हिमायती मानता है। आखिर अमेरिका जैसे शक्तिसंपन्न राष्ट्र में मंदिरों को सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया करायी जाती? बीते साल भी कनाडा में हिंदू महासभा के मंदिर में हमला करके बच्चों व महिलाओं तक को पीटा गया था। लेकिन ट्रूडो सरकार खामोश रही। लेकिन जैसी करनी वैसी भरनी की कहावत के अनुसार ट्रूडो सरकार बिखर गयी, धराशायी हो गयी।

निश्चित रूप से पश्चिमी देशों की सरकारों को अभिव्यक्ति की आजादी की सीमा व गरिमा तय करनी होगी।लगातार हो रहे इन हमलों के बाद भी हिन्दू समुदाय शांति और करुणा की ही बात करता आया है। पर एक बड़ा सवाल ये है कि आखिर कब तक यह सिलसिला चलेगा? क्या अमेरिकी एवं ब्रिटेन प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम उठाएंगे? हाल ही में ब्रिटिश गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में ऐसे अतिवादियों के उभार को ब्रिटिश कानून व्यवस्था के लिये खतरा बताया गया था। आतंक किसी एक देश नहीं, सम्पूर्ण मानवता के लिये गंभीर खतरा है। लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामलों की अनदेखी की जा रही है। निश्चित तौर पर छोटी घटनाओं को नजरअंदाज करने से कालांतर में बड़ी हिंसक गतिविधियों को ही प्रश्रय मिलता है। प्रतिबंधित आतंवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस कनाडा सहित कई देशों में लगातार भारत विरोधी अभियान चला रहा है। 17 नवंबर 2024 को न्यूजीलैंड में भी ऐसा ही अभियान चलाने की कोशिश की गई और भारत विरोधी नारे लगाते हुए खालिस्तान का झंडा लहराया गया। लेकिन न्यूजीलैंड के नागरिकों ने इसका विरोध किया और खालिस्तान समर्थकों के मनसूबों को सफल नहीं होने दिया।भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत के बढ़ते कदमों को रोकने के लिये आतंकी संगठन और दुश्मन देश आतंक का सहारा ले रहे हैं। सरकार की नीति, सशक्त सुरक्षा व्यवस्था, सरकार की सतर्कता के चलते ही आतंकवादी संगठन एवं आतंकवादी अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। अधिक सावधान एवं सख्त होने की अपेक्षा है, अन्यथा भारत की सारी प्रगति को आतंकवाद खा जायेगा। क्योंकि लगातार असफलता से खीझे एवं बौखलाये हुए आतंकी कोई-न-कोई नई और अधिक खौफनाक आतंकी घटना को अंजाम देने में जुटे रहते हैं, हमारी सुरक्षा एजेंसियों को अधिक सतर्कता बरतने की अपेक्षा है। दुनिया के शक्तिसंपन्न राष्ट्र भी मंथन करें आतंक रूपी विष और विषमता को समाप्त करने का, शांतिपूर्ण दुनिया निर्मित करने का।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
mavibet giriş
mavibet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
realbahis giriş
realbahis giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino
vaycasino giriş
gobahis giriş
gobahis giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
meritking giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betasus giriş
betasus giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meritking giriş
nitrobahis
nitrobahis
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş