personality development

जीवन में विकास तो होना ही चाहिए। परंतु वास्तविक विकास किसे कहते हैं, यह विचार करना आवश्यक है।

व्यक्ति जो कुछ भी करता है, वह सुख की प्राप्ति तथा दुख की निवृत्ति के लिए करता है। विकास किए बिना व्यक्ति न तो सुख की प्राप्ति कर सकता है, और न ही दुख की निवृत्ति। इसलिए जीवन में व्यक्ति को विकास करना आवश्यक है। इस विकास का आधार है संगठन। यदि परिवार में, समाज में, देश में संगठन नहीं है, तो कोई विकास नहीं होने वाला।

चलिये, आज युवा पीढ़ी को केंद्र में रखकर परिवार में संगठन की बात करते हैं। यदि आपके परिवार में आज संगठन है, और आगे भी यदि बना रहे, तब तो वास्तविक विकास कहलाएगा। और ऐसा विकास करना उपयोगी एवं सुखदायक सिद्ध होगा।
यदि तथाकथित विकास करके (देश या विदेश में कुछ पढ़ाई कर के और कुछ धन कमा कर के) आपके परिवार का संगठन टूटता है, परस्पर प्रेम शांति आनंद घट जाता है, दुख समस्याएं और परस्पर दूरियां बढ़ जाती हैं। व्यक्ति एक दूसरे के सुख दुख में काम नहीं आता, तो वह वास्तविक विकास नहीं है। विकास के नाम पर सिर्फ दिखावा है, और केवल स्वार्थ सिद्धि है। आज अधिकतर ऐसा ही हो रहा है।

विकास का उद्देश्य ही जब सुख शांति है, सुख की वृद्धि और दुख का क्षय है, तो उस तथाकथित विकास से लाभ क्या हुआ, जिसमें आपके परिवार का संगठन ही टूट जाए, सुख शांति ही खो जाए, आपसी प्रेम ही नष्ट हो जाए। आपस में दूरियां बढ़ जाएं। साथ में आप मिल कर बैठ नहीं पाते, एक दूसरे के साथ अपने सुख दुख बांट नहीं पाते, साथ में बैठकर भोजन नहीं खा पाते। परिवार का कोई सदस्य देश में रहता है, कोई विदेश में रहता है। कहीं संपत्ति के नाम पर झगड़े हो जाते हैं, और पारिवारिक संगठन टूट जाते हैं। भाइयों में परस्पर प्रेम नहीं रहता। अनेक बार विवाह के बाद बहुएं आकर परिवार में झगड़े करा देती हैं, आदि आदि किन्हीं भी कारणों से यदि आपका परिवार टूटता या बिखर जाता है, लोग दूर दूर चले जाते हैं, तो परिवार में सुख शांति कैसे हो सकती है? ‘वहाँ वास्तविक विकास हुआ,’ यह कैसे कह सकते हैं? नहीं कह सकते।

परिवार में वास्तविक विकास तो तभी कहलाता है, जब परिवार के सदस्य एक घर में रहते हों। साथ में बैठकर खाना खाते हों, आपस के सुख-दुख बांटते हों, एक दूसरे की समस्याओं को समझते हों, उन्हें बैठ कर आपस में सुलझाते हों, ऐसे परिवार में उत्साह संगठन सुख शांति समृद्धि एवं आनंद होता है। इसी का नाम वास्तविक विकास है।

अब बहुत से परिवारों में देखा यह जाता है, कि वहाँ के युवक लगभग 20 वर्ष तक भारत में पढ़ लिख कर विदेश चले जाते हैं। वे वहाँ आगे की पढ़ाई या नौकरी करने के लिए जाते हैं। ऐसे जो युवक विदेश में जाकर रहने लगते हैं, वे वहीं के निवासी बन जाते हैं। कभी कभार 2/3 वर्ष में एक, दो या तीन सप्ताह के लिए भारत आते हैं, फिर वापस विदेश लौट जाते हैं। माता-पिता भारत में, बच्चे विदेश में। यह क्या विकास हुआ? यह क्या संगठन हुआ? इस तरह से तो परिवार ही टूट गया. क्या करेंगे ऐसी संपत्ति का, जो परिवार को ही तोड़ दे? आपस का सुख ही समाप्त कर दे? इसका नाम *”विकास नहीं,” “विनाश है”. अपने परिवार का विनाश न करें।

जो भारतीय माता-पिता यह सोचते हैं, कि हमारे बच्चे विदेश में जाकर खूब धन कमाएंगे और खूब आनंद से जिएंगे, उनका जीवन सफल हो जाएगा। वे बहुत सुखी हो जाएँगे। यह उनकी भ्रांति और भयंकर भूल है। वे बच्चे विदेश में अकेले पड़ जाएंगे। आपके बिना वे वहाँ सुखी नहीं हो पाएँगे। क्योंकि आपके जीवन के अनुभव का लाभ उन्हें वहां नहीं मिल पाएगा। आपका सहयोग और आशीर्वाद उन्हें विदेश में नहीं मिल पाएगा।
और न आप यहाँ भारत में सुखी हो पाएँगे। क्योंकि आपके भारतीय बच्चे विदेशों में जाकर धन जरूर कमाएंगे, परन्तु आपके बुढ़ापे में यहां भारत में आपकी सेवा करने के लिए नहीं आएँगे। यदि ऐसा हुआ, (जो कि प्रायः होता ही है), तो आपने क्या कमाया? विदेश भेजकर आपने तो अपने बच्चे ही खो दिए!  अपना बुढ़ापा ही बिगाड़ लिया। कृपया ऐसी भूल न करें।

परिवार में सुख तो तब होता है, जब बच्चों को बड़ों के अनुभव का लाभ और आशीर्वाद मिले। तथा बड़ों को बच्चों की ओर से सेवा मिले। तब वह परिवार वास्तव में विकसित सफल और सुखी माना जाता है।
भारत में भी करोड़ों व्यक्ति रहते हैं, और उन्हें भोजन वस्त्र मकान, खाना-पीना आदि सब सुविधाएं मिलती हैं। “इसके अतिरिक्त, भारतीय सभ्यता संस्कृति के अंतर्गत जीवन जीना, अधिक चरित्र से युक्त तथा अधिक सुखदायक है।” “जो भारतीय बच्चे विदेश में चले जाते हैं, वे वहां जाकर अधिकतर भोगी विलासी बनते हैं। अपने व्यक्तिगत जीवन का भी नाश करते हैं। वे वहां रहकर भारतीय वैदिक अध्यात्म विद्या से भी वंचित हो जाते हैं, और अपने माता पिता आदि पारिवारिक जनों की सेवा आदि न कर पाने से, माता पिता आदि परिवार जनों के लिए भी कोई विशेष उपयोगी सिद्ध नहीं हो पाते। केवल अपना भौतिक स्वार्थ ही सिद्ध करते रहते हैं।”

“और एक बात, 20 वर्ष तक भारत में रहकर उन भारतीय बच्चों ने, भारत की जनता तथा अपने माता-पिता की तन मन धन की सेवा ली। अपने माता-पिता का उन्होंने लाखों और एक डेढ़ दो तीन करोड़ रुपए तक खर्चा भी करवाया। इसलिये उन पर भारत की जनता का भी ऋण होता है। और अपने माता-पिता का भी। भारत के डॉक्टरों किसानों इंजीनियरों अध्यापकों विद्वानों मजदूरों आदि देश भर के करोड़ों व्यक्तियों का ऋण उन बच्चों पर होता है, जिनकी सेवाओं से उन्होंने 20 वर्ष तक भारत में सब प्रकार का लाभ उठाया। और आज योग्य बनने के बाद, जब ऋण चुकाने का अवसर आया, तो वे विदेश चले गए।” आज उनकी सेवाओं का लाभ भारत की जनता को मिलना चाहिए था, जिसने 20 वर्ष तक अपनी सेवाओं से उन भारतीय बच्चों को लाभ पहुंचाया। विदेश में जाकर रहने से, और भारतीय जनता को उनकी सेवाओं का लाभ न मिलने से, वे बच्चे जीवन भर भारतीय जनता के कर्जदार भी बने रहेंगे। यह दोष भी उनको लगेगा।” “केवल अपने ही थोड़े से भौतिक स्वार्थ को देखना, अपने देशवासियों और माता पिता का ऋण न चुकाना, यह कोई देश भक्ति नहीं है। यह पितृभक्ति नहीं है। यह मनुष्यता नहीं है। ऐसे बच्चों को अगले जन्मों में यह सारा ऋण चुकाना पड़ेगा। ईश्वर उन्हें बैल घोड़ा हाथी आदि प्राणी बनाकर उनसे खूब मजदूरी करवाएगा, और पूरा ऋण वसूल करेगा।”

“इसलिए भारतीय माता-पिता के लिए, अपने बच्चों को भारत देश में ही रखना और अपने परिवार में ही रखना अधिक विकासयुक्त और सुखदायक है।” “भले ही भारत में अपने परिवार में रहकर बच्चे कुछ कम पढ़ पाएं, धन कुछ कम कमा पाएं, तो भी विदेश जाने और परिवार टूटने से तो यही अच्छा है। इससे कम से कम परिवार संगठित और वास्तव में आनंदित तो रहेगा!”

“आशा है आप लोग इस विषय में गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे। और विचार कर के सबके हित में सही निर्णय लेंगे।”

– स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक
निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।

Comment:

Latest Posts

betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Runtobet Giriş
betpark giriş
betgaranti
Runtobet Giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
kolaybet
bettilt
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
runtobet 2026
hititbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant
casinolevant
casinolevant
sahabet giriş
runtobet giriş
sahabet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
betlivo giriş
betlivo giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
bettilt
celtabet giriş
celtabet giriş
casinolevant giriş
bettilt giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
casibom giriş
casibom giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
otobet giriş
otobet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
otobet giriş
otobet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
fixbet giriş
betsat giriş
betsat giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom giriş
otobet giriş
otobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betbox giriş
betbox giriş
betbox giriş
betbox giriş
restbet giriş
restbet giriş