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इतिहास के पन्नों से

क्या आप सरदार पटेल पर.. मुस्लिमों के जानलेवा हमले के बारे में जानते हैं..?

क्या आप सरदार पटेल पर.. मुस्लिमों के जानलेवा हमले के बारे में जानते हैं..? बिल्कुल नहीं.. क्योंकि यह स्कूलों के शिक्षाक्रम से निकाल दिया गया है.. क्योंकि इससे भाईचारे वाले मजहब की सच्चाई सामने आती है..! आज भी कहीं दंगे होते हैं.. तो दंगा करने वाले समाज का नाम प्रकाशित करने पर पाबंदी है.. क्या इस तरह सच्चाई को.. छुपाया जा सकता है..?

यह तो लाउडस्पीकर पर चिख चिख कर बताया जाता है.. नाम.. गांव.. जात.. धर्म समेत किताबों में भी पढ़ाया जाता है.. कि महात्मा गांधी की हत्या.. नाथूराम गोडसे ने कि.. किंतु यह कभी नहीं पढ़ाया गया कि.. 14 मई 1939 को भावनगर में.. सरदार पटेल पर जानलेवा हमला.. और उनकी हत्या की कोशिश किसने किया.. और कितने अपराधियों को फांसी और आजीवन कारावास की सजा अदालत ने सुनाई गई..!

14 मई और 15 मई 1939 को.. भावनगर में भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में.. भावनगर राज्य प्रजा परिषद का पांचवा अधिवेशन होने वाला था.. सरदार वल्लभभाई पटेल भावनगर आए.. और रेलवे स्टेशन से खुली जीप में उनकी भव्य शोभा यात्रा निकली.. सरदार पटेल खुली जीप में बैठकर.. सड़क के दोनों तरफ खड़े लाखों महिला, पुरुष और बच्चों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे..!

अपार जन समूह के कारण.. बहुत धीमी गति से बढ़ते हुए.. जब यह यात्रा खार गेट चौक पहुंची.. तब वहां नगीना मस्जिद में छुपे हुए 57 शांतिप्रिय, भाईचारा समझाने वाले मजहब के लोगों ने.. तलवार, भाले लेकर जीप को चारों ओर से घेर लिया.. दो नौजवान बच्चू भाई पटेल और जाधव भाई मोदी की नजर उन पर पड़ी.. उन्होंने चारों ओर से सरदार पटेल को घेर कर.. ढाल की तरह पूरा जानलेवा हमला खुद पर झेल लिया.. वह सरदार पटेल का सुरक्षा कवच बन गए..!

हमलावरों ने वल्लभ भाई पटेल पर तलवार भाले से कई हमले किए.. जिसको इन साहसी नौजवान लड़कों ने आगे बढ़कर अपने ऊपर झेल लिया.. किंतु इस भयानक हमले में बच्चू भाई पटेल घटनास्थल पर ही वीरगति को प्राप्त हुए.. जबकि जाधव भाई मोदी अस्पताल में वीरगति को प्राप्त हुए.. जहां पर यह दोनों वीर नवयुवक वीरगति को प्राप्त हुए.. वहां पर उनकी मूर्ति भी लगी है.. इस घटना की अंग्रेज सरकार ने बहुत अच्छे तरीके से जांच कि.. और एक विशेष कोर्ट बनाई..!

57 आरोपी पकड़े गए.. इसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की सुरक्षा में लगाए गए.. सिपाही आजाद अली, रुस्तम अली को सजा ए मौत यानी फांसी दिया गया..

और कासम डोसा घांची, लतीफ मियां काजी, मोहम्मद करीम सिपाई, सय्यद हुसैन सिपाही, चांद गुलाब सिपाई, हाशम सुमरा संधि, लोहार मूसा अब्दुल्ला, अली मियां अहमद मियां सैयद, अली मामद सुलेमान, मोहम्मद सुलेमान कुंभार अबू बकर अब्दुल्ला लोहार अहमदिया मोहम्मद मियां काजी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई..!

इन्होंने अदालत में अपने बयान में कहा.. कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने कोलकाता में.. मुस्लिम लीग के खिलाफ भाषण दिया था.. उसी कारण उनके हत्या की साजिश रची गई थी.. किंतु अफसोस और शर्म की बात यह है कि.. इतिहास की यह महत्वपूर्ण घटना नेहरू सरकार ने.. सरदार पटेल जी के मृत्यु के बाद किताबों से हटा लिया.. ताकि भविष्य में यह कोई जान न सके.. कि सरदार पटेल के ऊपर जानलेवा हमला और उनके हत्या की साजिश कभी शांतिप्रियों भाईचारा वाले मजहब के लोगों ने रची थी..!

क्या सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ.. भाईचारा शांतिप्रिय मजहब वाले लोगों द्वारा की गई.. इस सत्य घटना को.. वर्तमान पीढ़ी को बताना जरूरी नहीं है..? इसीलिए हम भारत सरकार से निवेदन करते हैं कि.. भारत के नकली इतिहास को बदलकर.. निष्पक्ष इतिहासकारों की उपस्थिति में.. खोजबीन कर भारत का सत्य इतिहास लिखा जाए.. आपसे भी निवेदन है कि.. यदि आपको यह सही लगता है तो.. आप इसका समर्थन करो.. प्रसारण करो.. प्रचार प्रसार करो..! जय श्री राम 🚩🙏🙏

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