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कविता

नाम अनेक – वह ‘एक’ है

तारक है, निस्तारक है,
वाहक है , संवाहक है ।
वह जगत नियंता परमेश्वर,
नायक और नियामक है।।

वही पालन कर्ता ,सुखकर्ता ,
दु:ख हर्ता भी कहा जाता,
सृष्टि कर्ता परमेश्वर ही ,
न्यायाधीश कहा जाता।।

ब्रह्मा विष्णु महेश वही है,
गायत्री हमें बताती है।
भू: भुव: स्व:- कहकर,
सही अर्थ हमें समझाती है।।

वरणीय स्वरूप उसी का जग में,
हर साधक उसको ध्याता है।
बुद्धि – प्रदाता वही है सबका,
यह वेद हमें बतलाता है।।

नाम अनेक – वह ‘ एक’ है,
यह शाश्वत सत्य जगत का है।
गुण कर्म स्वभाव अनेक देखकर,
कई नामों से उसे पुकारा है।।

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