ब्याज दरों में अब कमी होनी ही चाहिए

ब्याज दर

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास ने अपने वर्तमान कार्यकाल का अंतिम मुद्रा नीति वक्तव्य (मोनेटरी पॉलिसी स्टेट्मेंट) दिनांक 06 दिसम्बर 2024 को प्रातः 10 बजे जारी किया है। इस मुद्रा नीति वक्तव्य में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं करते हुए इसे पिछले 22 माह से (अर्थात 11 मुद्रा नीति वक्तव्यों से) 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। यह संभवत: भारतीय रिजर्व बैंक के इतिहास में सबसे अधिक समय तक स्थिर रहने वाली रेपो दर है। इस बढ़ी हुई रेपो दर का भारत के आर्थिक विकास पर अब विपरीत प्रभाव होता हुआ दिखाई दे रहा है क्योंकि वित्तीय वर्ष 2024-25 की द्वितीय तिमाही में भारत में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर घटकर 5.4 प्रतिशत तक नीचे आ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रत्येक दो माह के अंतराल पर मुद्रा नीति वक्तव्य जारी किया जाता है, परंतु पिछले 11 मुद्रा नीति वक्तव्यों में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। जबकि, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति की दर कुछ समय तक तो लगातार 6 प्रतिशत के सहनीय स्तर से नीचे बनी रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित औसत मुद्रा स्फीति के अनुमान को 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया है। इसका आश्य यह है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रा स्फीति की दर संभवत: वित्तीय वर्ष 2024-25 की तृतीय तिमाही में भी अधिक बनी रह सकती है। इसके पीछे खाद्य पदार्थों (विशेष रूप से फल एवं सब्जियों) की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि, एक मुख्य कारण जिम्मेदार हो सकता है। परंतु, क्या ब्याज दरों में वृद्धि कर खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है? उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रा स्फीति की दर को आंकने में खाद्य पदार्थों का भार लगभग 40 प्रतिशत है। यदि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रा स्फीति में से खाद्य पदार्थों के भार को अलग कर दिया जाय तो यह आंकलन बनता है कि कोर पदार्थों की मुद्रा स्फीति की दर नियंत्रण में बनी हुई है। खाद्य पदार्थों की कीमतों को बाजार में फलों एवं सब्जियों की आपूर्ति बढ़ाकर ही नियंत्रित किया जा सकता है, न कि ब्याज दरों में वृद्धि कर। इस वर्ष मानसून का पूरे देश में विस्तार ठीक तरह से नहीं रहा है, कुछ क्षेत्रों में बारिश की मात्रा अत्यधिक रही है एवं कुछ क्षेत्रों बारिश की मात्रा बहुत कम रही है, जिसका प्रभाव खाद्य पदार्थों की उत्पादकता पर भी विपरीत रूप से पड़ा है, जिससे अंततः खाद्य पदार्थों की कीमतों में उच्छाल देखा गया है।

बाद के समय में, अच्छे मानसून के पश्चात भारत में आने वाली रबी मौसम की फसल बहुत अच्छी मात्रा में आने की सम्भावना है क्योंकि न केवल फसल के कुल रकबे में वृद्धि दर्ज हुई है बल्कि पानी की पर्याप्त उपलब्धता के चलते फसल की उत्पादकता में भी वृद्धि होने की पर्याप्त सम्भावना है। इन कारकों के चलते आगे आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रा स्फीति की दर निश्चित ही नियंत्रण के रहने की सम्भावना है। इससे, निश्चित ही रेपो दर को कम करने की स्थिति निर्मित होती हुई दिखाई दे रही है। साथ ही, अमेरिका सहित यूरोप के विभिन्न देशों में भी ब्याज दरों को लगातार कम करने का चक्र प्रारम्भ हो चुका है, जिसका प्रभाव विश्व के अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़े बिना नहीं रहेगा।

दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में सकल घरेलू उत्पाद में होने वाली वृद्धि दर के अनुमान को 7.2 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। क्योंकि, यह वृद्धि दर द्वितीय तिमाही में घटकर 5.4 प्रतिशत की रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की द्वितीय तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के कम रहने के कई विशेष कारण रहे हैं। देश में लोकसभा चुनाव के चलते केंद्र सरकार को अपने पूंजीगत खर्चों एवं सामान्य खर्चों में भारी कमी करना पड़ी थी। इसके बाद विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनावों के चलते इन राज्यों द्वारा किए जाने वाले सामान्य खर्चों में अतुलनीय कमी की गई थी। जिससे अंततः नागरिकों के हाथों में खर्च करने लायक राशि में भारी कमी हो गई। दूसरे, इस वर्ष भारत में मानसून भी अनियंत्रित सा रहा है जिससे कृषि क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित हुआ एवं ग्रामीण इलाकों में नागरिकों की आय में कमी हो गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों में अस्थिरता बनी रही, जिसके कारण भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात प्रभावित हुए। इस अवधि में विनिर्माण के क्षेत्र एवं माइनिंग के क्षेत्र में उत्पादन भी तुलनात्मक रूप से कम रहा। उक्त कारकों के चलते भारत में वित्तीय वर्ष 2024-25 की द्वितीय तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर बहुत कम रही है। इस द्वितीय तिमाही में विभिन्न कम्पनियों के वित्तीय परिणाम भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं। इनकी लाभप्रदता में आच्छानुरूप वृद्धि दर्ज नहीं हुई है। कम्पनियों के वित्तीय परिणाम उत्साहजनक नहीं रहने के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से सितम्बर, अक्टोबर एवं नवम्बर माह में 1.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि निकाली है। जिससे भारतीय शेयर बाजार के निफ्टी सूचकांक में 3000 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज हुई है, निफ्टी सूचकांक अपने उच्चत्तम स्तर 26,400 से गिरकर 23,200 अंकों तक नीचे आ गया था। हालांकि अब यह पुनः बढ़कर 24,700 अंकों पर आ गया है और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक बार पुनः भारतीय शेयर बाजार पर अपना भरोसा जताते हुए अपने निवेश में वृद्धि करना शुरू कर दिया है।

अब देश में कुछ महत्वपूर्ण राज्यों में विधान सभा चुनावों एवं लोक सभा चुनाव के सम्पन्न होने के बाद केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा अपने पूंजीगत खर्चों एवं सामान्य खर्चों में वृद्धि की जाएगी। साथ ही, भारत में त्यौहारी मौसम एवं शादियों के मौसम में भारतीय नागरिकों के खर्चों में अपार वृद्धि होने की सम्भावना है। त्यौहारी एवं शादियों का मौसम भी नवम्बर एवं दिसम्बर 2024 माह में प्रारम्भ हो चुका है। एक अनुमान के अनुसार नवम्बर माह में मनाए गए दीपावली एवं अन्य त्यौहारों पर भारतीय नागरिकों ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि का व्यय किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के जनवरी 2025 माह (13 जनवरी) में प्रयागराज में कुंभ मेला भी प्रारम्भ होने जा रहा है जो फरवरी 2025 माह (26 फरवरी) तक चलेगा। यह कुम्भ मेला प्रत्येक 12 वर्षों में एक बार प्रयागराज में लगता है। एक अनुमान के अनुसार इस कुम्भ मेले में प्रतिदिन एक करोड़ नागरिक पहुंच सकते हैं। इससे देश में धार्मिक पर्यटन में भी अपार वृद्धि होगी। उक्त सभी कारणों के चलते, भारत में उपभोक्ता खर्च में भारी भरकम वृद्धि दर्ज होगी जो अंततः सकल घरेलू उत्पाद में पर्याप्त वृद्धि को दर्ज करने के सहायक होगी। साथ ही, अक्टोबर 2024 माह में भारत से विविध उत्पादों एवं सेवा क्षेत्र के निर्यात में भी बहुत अच्छी वृद्धि दर दर्ज हुई है। इससे अंततः भारत के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ऊपर बने रहने की प्रबल सम्भावना बनती नजर आ रही है।

साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक ने नकदी रिजर्व अनुपात में 50 आधार बिंदुओं की कमी करते हुए इसे 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया है। इससे 1.16 लाख करोड़ रुपए की राशि भारतीय रिजर्व बैंक से बैकों को प्राप्त होगी एवं इस राशि से बैंकिंग क्षेत्र में तरलता में सुधार होगा एवं बैंकों की कर्ज देने की क्षमता में भी वृद्धि होगी। अधिक ऋणराशि की उपलब्धता से व्यापार एवं उद्योग की गतिविधियों को बल मिलेगा जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि करने में सहायक होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर के लगातार मजबूत होने से बाजार में रुपए की कीमत लगातार गिर रही है और रुपए की कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक को बाजार में डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अमेरिकी डॉलर को बेचना पड़ रहा है। जिससे, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 70,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर के उच्चत्तम स्तर से नीचे गिरकर 65,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के निचले स्तर पर आ गए हैं। साथ ही, रुपए की कीमत गिरकर 84.63 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर आ गई है। अतः यदि देश में व्यापारिक गतिविधियों में सुधार होता है एवं सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर्ज होती है तो विदेशी निवेश भी भारत में पुनः वृद्धि दर्ज करेगा एवं विदेशी मुद्रा भंडार भी अपने पुराने उच्चत्तम स्तर को प्राप्त कर सकेंगे। कुल मिलाकर भारत में अब ब्याज दरों में कमी करने का समय आ गया है।

– प्रहलाद सबनानी

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
hititbet
hititbet
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
hititbet
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betnano
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betnano
betnano
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betnano
betnano
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet