वेदों के आविर्भाव विषयक महर्षि दयानन्द जी के मन्तव्य •

IMG-20241117-WA0002

[भूमिका : 1882 में उदयपुर में स्वामी दयानन्द जी का मौलवी अब्दुर्रहेमान से एक शास्त्रार्थ हुआ था। यह शास्त्रार्थ स्वामी जी के शास्त्रार्थ संग्रह में एवं जीवनचरित्र में उपलब्ध है। ईश्वर वेद के माध्यम से ज्ञान एवं भाषा दोनों का आविर्भाव करता है, यह बात स्वामी जी ने प्रतिपादित की है। इस शास्त्रार्थ के एक-दो अंश यहां प्रस्तुत किए जाते हैं। वेद के आविर्भाव को समझने में ये अंश उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं – भावेश मेरजा]
स्वामी जी – आदि सृष्टि में इसके [वेदों के] सुनने वाले चार ऋषि थे, जिनके नाम अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा थे। चारों ने ईश्वर से शिक्षा पाकर दूसरों को सुनाया।
मौलवी – इन चारों को ही विशेष रूप से क्यों सुनाया?
स्वामी जी – वे चार ही सबमें पुण्यात्मा और उत्तम थे।
मौलवी – क्या इस बोली को वे जानते थे?
स्वामी जी – उस जनाने वाले [ईश्वर] ने उसी समय उनको भाषा भी जना दी थी अर्थात् उस शिक्षक ने उसी समय उनको का भाषा का ज्ञान दे दिया।
मौलवी – इसको आप किन युक्तियों से सिद्ध करते हैं ?
स्वामी जी – बिना कारण के कार्य कोई नहीं हो सकता।…
मौलवी – पढ़ाना मानसिक प्रेरणा के द्वारा था अथवा शब्द, अक्षर आदि के द्वारा जो वेद में लिखे हुए हैं अर्थात् क्या शब्द-अर्थ-सम्बन्ध सहित पढ़ाया ?
स्वामी जी – वही अक्षर, जो वेद में लिखे हुए हैं, शब्द-अर्थ-सम्बन्ध सहित पढ़ाये गये।
मौलवी – शब्द बोलने के लिए मुख, जिह्वा आदि साधनों की अपेक्षा है। शिक्षा देने वाले में ये साधन हैं या नहीं?
स्वामी जी – उसमें ये साधन नहीं हैं, क्योंकि वह निराकार है। शिक्षा देने के लिए परमेश्वर अवयवों तथा बोलने के साधन आदि से रहित है।
मौलवी – शब्द कैसे बोला गया?
स्वामी जी – जैसे आत्मा और मन में बोला, सुना और समझा जाता है।
मौलवी – भाषा को जाने बिना शब्द किस प्रकार उनके मन में आये ?
स्वामी जी – ईश्वर द्वारा डालने से; क्योंकि वह सर्वव्यापक है।
मौलवी – इस सारे वार्तालाप में दो बातें अनुमान (तर्क विरुद्ध) हैं। प्रथम यह कि ब्रह्म ने केवल चार ही मनुष्यों को उस भाषा में वेद की शिक्षा दी जो किसी देश अथवा जाति की भाषा नहीं। दूसरे यह कि उच्चारित शब्द जो पहले से जाने हुए न थे, मन में डाले गए और उन्होंने ठीक समझे। यह बात यदि स्वीकार की जावे तो सब मतों की समस्त अनुमान(तर्क) विरुद्ध बातें, चमत्कार आदि सत्य स्वीकार, करनी चाहिएं।
स्वामी जी – ये दोनों बातें अनुमान (तर्क) विरुद्ध नहीं क्योंकि ये दोनों ही सच्ची हैं। जो कुछ जिह्वा से अथवा आत्मा से बताया जावे वह शब्दों के बिना नहीं हो सकता। उसने जब शब्द बतलाये तो उनमें ग्रहण करने की शक्ति थी। उसके द्वारा उन्होंने परमेश्वर के ग्रहण कराने से अपनी योग्यतानुसार ग्रहण किया और बोलने के साधनों की आवश्यकता बोलने और सुनने वाले के अलग-अलग होने पर होती है, क्योंकि जो वक्ता मुख से न कहे और श्रोता के कान न हों तो न कोई शिक्षा कर सकता है और न कोई श्रवण। चूंकि सर्वव्यापक है इसलिए उनके आत्मा में भी विद्यमान था, पृथक् न था। परमेश्वर ने अपनी सनातन विद्या के शब्दों को उनके अर्थात् चारों के आत्माओं में प्रकट किया और सिखाया। जैसे किसी अन्य देश की भाषा का ज्ञाता किसी अन्य देश के अनभिज्ञ मनुष्य को जिसने उस भाषा का कोई शब्द नहीं सुना, सिखा देता है, उसी प्रकार परमेश्वर ने जिसकी विद्या व्यापक है और जो उस विद्या की भाषा को भी जानता था, उनको सिखा दिया। ये बातें अनुमान (तर्क) विरुद्ध नहीं। जो इनको अनुमान-विरुद्ध कहे वह अपने दावे को युक्तियों द्वारा सिद्ध करे।

#dayanand200

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino güncel giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hitit medya
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet güncel adres
hititbet 2026
hititbet giriş
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
solobet giriş
hititbet giriş
kralbet
otobet giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
otobet giriş
otobet giriş
otobet giriş
betyap giriş
betyap giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
maksibet giriş
betnano
betnano
betnano
kralbet
kralbet
kralbet
setrabet
setrabet
kralbet
betpark giriş
hititbet
hititbet
Tuzla Cilt Bakım
İstanbul Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet Giriş
Hititbet Giriş
betgaranti giriş
betpark giriş