परमात्मा किस प्रकार एक सर्वव्यापक यज्ञ कर रहें हैं?

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परमात्मा किस प्रकार एक सर्वव्यापक यज्ञ कर रहें हैं?
इस सर्वव्यापक यज्ञ में भाग लेने वाले व्यक्ति से क्या आशा की जाती है?
नोधाः कौन है?

वृष्णे शर्धाय सुमखाय वेधसे नोधः सुवृक्तिं प्र भरा मरुद्भयः।
अपो न धीरो मनसा सुहस्त्यो गिरः समंजे विदथेष्वा भुवः।।
ऋग्वेद मन्त्र 1.64.1 (कुल मन्त्र 733)

(वृष्णे) वर्षा करने वाला (प्रसन्नता और सुख-सुविधाओं की), परमात्मा (शर्धाय) सभी शक्तियों का शक्ति पुंज, परमात्मा (सुमखाय) सारी सृष्टि का यज्ञ की तरह प्रबन्ध करने वाला, परमात्मा (वेधसे) इस सृष्टि का निर्माता, परमात्मा (नोधः) परमात्मा की प्रशंसा में वाणियाँ धारण करने वाला (सुवृक्तिम्) उत्तम गतिविधियों के कर्त्ता बनो (प्र भर) पूरी तरह से धारण करता है (मरुद्भयः) वायु की संगति, प्राण (अपः) कार्य (न) जैसे कि (धीरः) धैर्यवान, सहनशील (मनसा) मन से (सुहस्त्यः) उत्तम हाथों, कला, योग्यताओं के साथ (गिरः) वाणियाँ (समंजे) मैं प्रगट करता हूँ (विदथेषु) ज्ञान के यज्ञ में (आ भुवः) सभी विषयों और परिस्थितियों में।

व्याख्या:-
परमात्मा किस प्रकार एक सर्वव्यापक यज्ञ कर रहें हैं?
इस सर्वव्यापक यज्ञ में भाग लेने वाले व्यक्ति से क्या आशा की जाती है?

परमात्मा प्रसन्नताओं और सुख-सुविधाओं की वर्षा करने वाले हैं। वे सभी शक्तियों के शक्ति पंुज हैं। वे समूची सृष्टि का प्रबन्धन एक यज्ञ की तरह करते हैं। वे सृष्टि के निर्माता हैं। जो व्यक्ति परमात्मा की प्रशंसा में वाणियों को धारण करता है, उससे यह अपेक्षित होता है कि वह वायु, प्राणों की संगति को पूरी तरह से धारण करे, जिससे वह उत्तम गतिविधियों का करने वाला बन सके। उसके कार्य धैर्यशील और सहनशील विशेषज्ञ की तरह होने चाहिए जो उत्तम हाथों, कला, योग्यता तथा उत्तम मन के साथ करता है।
परमात्मा ऐसे व्यक्ति के लिए वैदिक विवेक की वाणियाँ प्रकट करते हैं जिससे वह उनका प्रयोग सभी विषयों और परिस्थितियों में ज्ञान के यज्ञ की तरह कर सके।

जीवन में सार्थकता: –
नोधाः कौन है?

जो व्यक्ति सृष्टि के यज्ञ में नोधाः की तरह भाग लेता है, सदैव परमात्मा की प्रशंसा करते हुए, उसे महान् और दिव्य वाणियाँ समर्पित की जाती हैं जिससे वह सामान्य लोगों के लिए वैदिक विवेक का विकास कर सके। यह दिव्य अमीरी है और नोधाः बनने की दिव्य महानता है जिसमें एक व्यक्ति दिव्य वाणियों को धारण करते हुए परमात्मा के व्यापक समष्टि यज्ञ में भाग लेता है। वह सार्थक रूप से परमात्मा का अनुष्ठान कर्त्ता माना जाता है।


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