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फर्श से अर्श का दौर, कैप्टन गुंजन बनी सिरमौर।

निरंतर प्रयास करते रहने से लक्ष्य की प्राप्ति अवश्य ही होती है। जब व्यक्ति के भीतर प्रतिभा का सागर उछाले मारता है तो वह आसमान में भी सुराख करने में सफल हो जाता है। कहा यह भी जाता है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और कहा यह भी जाता है कि जब परमपिता परमेश्वर की कृपा होती है तथा व्यक्ति निरंतर अपनी साधना के पथ पर आगे बढ़ता रहता है तो वह अद्भुत कार्य कर दिखाता है। यही बात कैप्टन गुंजन दुआ द्वारा चरितार्थ की गई है। इसके विषय में आर्य समाज के सुप्रसिद् विद्वान और शिक्षा जगत के प्रति जीवन को समर्पित कर चुके प्राचार्य गजेंद्र सिंह आर्य जी इस लेख के माध्यम से हमें इस प्रतिभा के विषय में विशेष जानकारी दे रहे हैं।

संपादक

प्रिय गुंजन दुआ का जन्म रेवाड़ी हरियाणा में एक सामान्य परिवार में पिताश्री सुशील कुमार (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सहायक कमांडेंट), माता श्रीमती लक्ष्मी रानी (शिक्षिका) के यहां रेलवे कालोनी में हुआ । उनके भीतर बचपन से ही कागज के टुकड़ों से हवाई जहाज बनाकर उड़ाने का सात्विक उत्साह था। अंत में उसी श्रृंखला में शिक्षा प्राप्त कर उड़न परी हो गईं। गुरुग्राम के द्रोणाचार्य विश्वविद्यालय से B.Tech(Computer science) और MBA(Operations) कर भारतवर्ष से ८५०० किलोमीटर दूर दक्षिण अफ्रीका की राजधानी जोहान्सबर्ग से कमर्शियल पायलट (Commercial Pilot) का प्रशिक्षण प्राप्त कर वहीं पायलट ट्रेनर के रूप प्रशिक्षक बनीं।

माता श्रीमती लक्ष्मी रानी और पिता श्री सुशील कुमार जी की इकलौती पुत्री की गूंज बड़ी प्रभु के आशीर्वादों से प्राप्त हुई और नामकरण संस्कार भी गुंजन दुआ प्राप्त हुआ। आज कै. गुंजन दुआ ने अपनी प्रथम सीढ़ी से अपनी यात्रा प्रारंभ कर उच्चतम सीढ़ी की ओर अपना सशक्त कदम बढ़ा दिया है ।

कै. गुंजन दुआ आज एविएशन उद्योग की एक प्रमुख चरित्र अथवा किरदार(Character) हैं। वह प्रेरणादायक यात्रा में महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। उनके जीवन और कैरियर से अनुभव सीखने के लिए युवा उन्हें उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में मान रहे हैं। उन्होंने साधारण और बहुत ही साधारण परिवार से उठकर हवाई यात्रा के क्षेत्र में अनेकानेक पायलट प्रशिक्षित कर परचम फहराया है‌। अपने १५ वर्ष के ट्रेनर के काल में कैप्टन गुंजन आर्य ने १००० से अधिक पायलट और इतने ही एयर होस्टेस को भी प्रशिक्षण देकर, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर स्वावलंबी बना कर अपने दायित्व को पूरा किया है।

वनस्थली विद्यापीठ विश्वविद्यालय निवाई, राजस्थान में ५ वर्ष तक शिक्षा के क्षेत्र में पायलट प्रशिक्षण देकर आपने अप्रितम और अद्भुत कार्य किया है। भारत के अग्रणी एविएशन एकेडमी स्काईरीच एविएशन (Skyreach Aviation, Jaipur) की संस्थापक, संचालक एवं निदेशक कैप्टन गुंजन दुआ को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए “भारत विभूषण पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाली विभूतियों को “नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स” (National Book of Records) की ओर से शिक्षा के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जाता है।

कैप्टन गुंजन दुआ ने दक्षिण अफ्रीका से यात्रा प्रारंभ कर अनवरत १५ वर्षों से पायलट प्रशिक्षण दे रही हैं। आज १५०० पायलट को तैयार कर, आज विश्व की गौरवशाली एयरलाइंस में प्लेन उड़ा रहे हैं। कैप्टन गुंजन को दक्षिण अफ्रीका में कई बेहतरीन रोजगार के अवसर मिले परंतु “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” के विचार को सार्थक करने के लिए अपनी मातृभूमि भारत भूमि को ही अच्छी शिक्षा देने के लिए कार्य क्षेत्र और केंद्र “वीर प्रसूता वसुंधरा” राजस्थान जयपुर को चुना। कैप्टन गुंजन को विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर पुरस्कृत किया गया। वर्ष २००८ में हरियाणा सरकार के “विद्युत, वन एवं पर्यावरण मंत्री” कै. अजय यादव ने उन्हें “लीडिंग लेडी ऑफ एवियशन” (Leading Lady of Aviation) पुरस्कार से सम्मानित किया।

कै. गुंजन की अद्वितीय यात्रा २००९ में प्रारंभ हुई जब दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ भारत में उड़ान भरने के लिए कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) प्राप्त किया। दक्षिण अफ्रीका में उड़ान भरने के बाद असाधारण प्रतिभा ने उन्हें पायलट के साथ-साथ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (Flying Instructor) बनने का अवसर प्रदान किया। कैप्टन गुंजन दुआ कभी रुकी नहीं, कभी थकी नहीं। पायलटों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ वे ग्राउंड इंस्ट्रक्टर और सेफ्टी मैनेजर (Ground Instructor & Safety Manager) भी बनी। कै. गुंजन की प्रतिभा को कई प्रकार की मान्यता मिली। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के AUAA (Africa Union Aviation Academy) में क्रॉसकंट्री (Cross-country) उड़ान प्रतियोगिता जीती और बेस्ट नेविगेशन इंस्ट्रक्टर (Navigation Instructor) का पुरस्कार भी प्राप्त किया। भारत में उनकी अनुपस्थिति में भी कैप्टन गुंजन ने भारत माता को गर्वित किया।

कैप्टन गुंजन को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब उन्होंने न केवल उड़ान, बल्कि नाइजीरिया, ईरान, मिस्र, भारत, यूएई, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, तंजानिया के अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को एविएशन के विषय भी पढ़ाकर प्रशिक्षित किया।
कै. गुंजन को वाग्दान संस्कार (गोद-चुन्नी मुद्रिका कार्यक्रम) पर उनके श्वसुर श्री गजेंद्र सिंह आर्य ने सत्यार्थ प्रकाश के साथ गृहस्थ धर्म से संबंधित पांच पुस्तकें भेंट की, परन्तु हिंदी कमजोर होने के कारण सत्यार्थ प्रकाश को समझना कठिन हो गया। विवाहोपरान्त उन्होंने अंग्रेजी भाष्य सत्यार्थ प्रकाश (The Light of Truth) दिया। इसको पढ़ने के बाद उनके जीवन में ऐसा परिवर्तन आया कि यहां तक पहुंचने का श्रेय कै. गुंजन महर्षि दयानंद लिखित सत्यार्थ प्रकाश को देती हैं।
कै. गुंजन आर्य परिवार की प्रिय बहू हैं, यथा संभव आर्य परंपराओं पर चलने का सार्थक प्रयास कर रही हैं। सदाचार आर्य जीवन की आधारशिला है। कै. गुंजन ने, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की भारत भारती कविता को चरितार्थ किया है:-

मेहनत कर मेहनत कर कदम मिलाकर चल।
मंजिल स्वागत करेगी तेरा आज नहीं तो कल ।।

अन्य पुरस्कारों की श्रंखला विशेष:
(१) राजस्थान सिने अवार्ड्स २०२३ जयपुर में सम्मानित
(२) ०९वें एजू लीडर्स समिट जयपुर द्वारा २०२३ उच्च शिक्षा नेता पुरस्कार

आज तक यह कार्यक्रम अनवरत चल रहा है। कैं. गुंजन के पति आर्येंद्र (आर्यन सोलंकी)हैं, जो स्काईरीच एविएशन एकेडमी के जनसंपर्क अधिकारी हैं और कै. गुंजन को सदैव उत्साहवर्धन कर पथ-प्रदर्शक का कार्य करते हैं। कै. गुंजन का एक पुत्र अथर्व आर्य है। सत्यार्थ प्रकाश के दिव्य प्रकाश में आगे बढ़ने का संकल्प लेकर चलने वाली गुंजन आज दिव्यता की प्रतिमूर्ति बन चुकी है क्योंकि वह अगली पीढ़ी को भी सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से ही जीवन निर्माण की पगडंडी पर बढ़ा रही है।

शुभेच्छु
गजेंद्र सिंह आर्य (वेदिक प्रवक्ता, पूर्व प्राचार्य)
धर्माचार्य जेपी विश्वविद्यालय, अनूपशहर
बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)
चल दूरभाष – ९७८३८९७५११

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