नियत में खोट, प्रतिष्ठा पर चोटडॉ.शशि तिवारी कहते है मन चंगा तो कठोती में गंगा’, लेकिन मन अत्यधिक चंचल होता है पल में हां और पल में न कहतेे एवं एक पाले से दूसरे पाले में ढुंलकते देर भी नहीं लगनी लक्ष्मी भी चंचल होती हैं, मन और लक्ष्मी किस पर कृपा बरसा दे ठीक-ठीक […]
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बहुत सो चुके, अब तो जगें
जागरण का समय आ ही गया है। जाने कितनी बार नए संकल्पों और नई भोर के साथ जागरण का संदेश देने वाले पर्व-त्योहार और नए-नए अवसर हमारे सामने आते रहते हैं। पर हम इतने आलसी हैं कि हर बार कल्पनाओं में खो जाते हैं, संकल्प लेते हैं, लक्ष्यों में खुद को बाँधते हैं, कुछ नया […]
काले धन की जड़ों में मट्ठा
30 अक्टूबर 2014 : सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को उन लोगों के नाम सौंप दिए हैं, जिनके खाते विदेशों में हैं। यह कार्य स्वागत योग्य है लेकिन विडंबना है कि इसका श्रेय सरकार को नहीं मिलेगा। इसका श्रेय उन न्यायाधीशों को है, जिन्होंने सरकार को सीधी फटकार लगाई। उन्होंने वही कहा, जो राम जेठमलानी कह […]
यह दुनिया विश्वास और अविश्वास के ध्रुवों के बीच चलायमान है। इसमें इंसान की स्थिति उस पेण्डुलम की तरह है जिसमें उसे खुद को यह भरोसा नहीं होता कि सही क्या है। किस पर विश्वास करे और किस पर नहीं। कुछ लोग विश्वास के सहारे जीते हैं, कुछ इससे भी […]
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर, 2014। राजस्थान के जयपुर जिले में नागरिक सुरक्षा द्वारा पूरे देश में उत्कृष्ट कार्य किये जाने के फलस्वरूप गुरूवार को नागपुर में जयपुर को पहले राष्ट्रीय लीडरशिप अवार्ड से नवाजा गया है। राष्ट्रीय लीडरशिप अवार्ड जयपुर जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, आई.ए.एस. को नागपुर में […]
ऐसा दोहरा मापदण्ड क्यों ?
रेल यात्रा और क़ानून का यह दोहरा मापदंड ! निर्मल रानी कहने को तो हमारे देश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान कानून बनाए गए हैं। परंतु यदि इस बात की धरातलीय पड़ताल की जाए तो कई ऐसे विषय हैं जिन्हें देखकरयह कहा जा सकता है कि या तो वर्ग विशेष कानून की धज्जियां उड़ाने […]
जीत से बढ़ती जिम्मेदारी
डा. शशि तिवारी विश्वास आदमी को बांधता है लेकिन विश्वास से उपजा विश्वास जब टूटता है तो आदमी न केवल […]
प्राकृतिक आपदाओं से हमारा रिश्ता ज्यादा से ज्यादा गहरा होता जा रहा है। ज्यों-ज्यों हम प्रकृति को उत्तेजित करते हैं, शोषण के मनोभावों से नैसर्गिक संपदा का अंधाधुंध दोहन करते हैं, त्यों-त्यों प्रकृति हमसे कुपित होती है। कई सारी आपदाएं प्राकृतिक हैं और ढेरों ऎसी हैं जो मानव निर्मित हैं। मानव में जब से स्वार्थ […]
पुण्य प्रसून वाजपेयी ठीक 25 बरस पहले वीपी सिंह स्विस बैंक का नाम लेते तो सुनने वाले तालियां बजाते थे। और 25 बरस बाद नरेन्द्र मोदी ने जब स्विस बैंक में जमा कालेधन का जिक्र किया तो भी तालियां बजीं। नारे लगे। 1989 में स्विस बैंक की चुनावी हवा ने वीपी को 1989 में पीएम […]
रेहाना ! हमें माफ़ करना…
-फ़िरदौस ख़ान एक लड़की जो जीना चाहती थी… अरमानों के पंखों के साथ आसमान में उड़ना चाहती थी, लेकिन हवस के भूखे एक वहशी दरिन्दे ने उसकी जान ले ली. एक चहकती-मुस्कराती लड़की अब क़ब्र में सो रही होगी… उसकी रूह कितनी बेचैन होगी… सोचकर ही रूह कांप जाती है… लगता है, उस क़ब्र में […]