दिनेश चंद्र त्यागीलोकसभा में सबसे अधिक मुस्लिम सांसद इंदिरा गांधी के समय थे। 1977 में केन्द्र की सत्ता से किनारे लगाये जाने बाद इंदिरा गांधी 1980 के लोकसभा चुनाव में फिर सत्ता में आ गयी।उस 1980 के लोकसभा चुनाव में 49 मुस्लिम जीतकर लोकसभा में पहुंचे थे।इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव […]
Category: राजनीति
देश का युवा राहुल के नही मोदी के साथ
राकेश कुमार आर्य भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित रैली ने उनकी अब तक की पूर्व की रैलियों के अनुसार एक बार फिर सिद्घ कर दिया है कि देश का युवा कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी की ओर आकर्षित न होकर मोदी की ओर आकर्षित हो […]
न्यायपालिका के पंख कुतरने की कोशिश
“यह आरोप मेरी बढ़ती लोकप्रियता के कारण विरोधियों ने साजिश के तहत लगाया है” – ”मुझे भारत की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है” – आदि आदि —पिछले २-३ दशकों से आरोपी रहनुमाओं के ऐसे खोखले बयान सुन सुनकर हम सभी आजिज हो गए हैं। जब जब न्यायालय द्वारा देशहित में कोई महत्वपूर्ण फैसला दिया है जो तथाकथित ”रहनुमाओं” के […]
मोदी किस मर्ज की दवा हैं ?
वीरेन्द्र सिंह परिहार आखिर में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने संसदीय बोर्ड की सहमति से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर ही दिया। राजनाथ सिंह ने गोवा में चल रही कार्यकारिणी में जब नेरन्द्र मोदी को भाजपा की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष घोषित कर […]
आदरणीय आडवानी बाबा, सादर परनाम ! आगे समाचार इ है कि नीतिश कुमार के तरह-तरह के विरोध के बाद भी नरेन्दर मोदिया बिहार में भी लोकप्रिय होता जा रहा है। बिहार के लोगबाग नरेन्दर का इन्तज़ार बड़ी बेसब्री से कर रहा है। नीतीश तो आपके ही मानस पुत्र हैं। जब जरुरत थी तो सांप्रदायिक भाजपा […]
विष्णुगुप्त मुजफ्फ रनगर का दंगा सत्ता प्राप्त करने की घिनौनी राजनीति का दुष्परिणाम है। अगर ऐेसा नहीं होता तो एक महिला के साथ छेड़खानी पर हुई मजहबी हिंसा को पूरी छूट ही क्यों दी गयी? सरकार और प्रशासन द्वारा मजहबी हिंसा पर रोक लगाने की जरूरत क्यों नहीं समझी गयी? मजहबी हिंसा के पीड़ित परिवार […]
प्रो. देवेन्द्र स्वरूप संविधान सभा में पंचायत पर हुई बहस को पढ़ने के बाद अनेक भ्रम दूर हो जाते हैं। उस बहस में करीब 50 सदस्यों ने भाग लिया। वे सब स्वतंत्रता संग्राम के जाने.माने नाम हैं। यह कितनी विचित्र बात है कि संविधान सभा ने जिन समितियों के माध्यम से काम किया उन समितियों […]
सिद्धार्थ मिश्र स्वतंत्रविश्व के कुशल अर्थशास्त्रियों में शामिल हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का मौन अक्सरहां पूरे राष्ट्र को अखर जाता है। बात चाहे घोटालों, न्याय व्यवस्था,महिला सुरक्षा या भ्रष्टाचार की हो मनमोहन जी अक्सर ही बातों को ख़ामोशी से टाल जाते हैं।कुल मिला-जुलाकर यदि उनकी इस प्रवृत्ति का निष्पक्ष होकर आकलन करें तो ये […]
रज्जाक अहमद विवादित संत आसाराम बापू के साथ एक और शर्मनाक विवाद जुड़ गया। इस बार का मामला इतना संगीन व घिनौना है कि जिसे सुनकर हर सभ्य व्यक्ति को ऐसे लोगों से नफरत होने लगती है। लेकिन दुख की बात यह है कि अभी विवाद की जांच शुरू भी नही हुई थी कि मामले […]
खाद्य सुरक्षा बिल की खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा कानून बनने से देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता अनाज मिलेगा। मौजूदा वक्त में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को 7 किलो गेहूं 4.15 रुपये प्रति किलो और चावल 5.65 रुपये प्रति किलो के आधार पर हर महीने मिलता है। […]