बारिश की नन्ही बूंदों से, तपती धरती कुछ शांत हुई,जीवों को जीवनदान मिला, चहुं ओर खुशी की बात हुई। सूखे मुरझाये पौधों में, नव प्राणों का संचार हुआ,सूखी माटन्ी भी महक उठी, कण-कण में जीवन वास हुआ। वर्षा की खुशी में नाच उठे, मैढक, मोर, किसान,बादल देख पपीहा बोले, पीहू पीहू की तान। खेतिहार मजदूर […]
Category: कविता
बार-बार आती है मुझको, मधुर याद बचपन तेरी।गया, ले गया, तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी।।चिंता सहित खेलना सजा वो फीका निर्भय स्वच्छंद।कैसे मुल्क जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद।।ऊंच-नीच का ज्ञान नही था, छुआछूत किसने जानी।बनी हुई थी झोंपड़ी और चिंछड़ों में रानी।।रोना और मचल जाना थी, क्या आनंद दिखाते थे।बड़े बड़े […]
नहरें नहरें हमको पानी देकर, सबकी प्यास बुझाती हैं।इनका पानी पीकर ही तो, फसलें भी लहराती हैं। चंदा मामा पापा! हम भीचंदा मामा, से मिलने को जाएंगे।आसमान की सैर करेंगे, तोड़ के तारे लाएंगे। साईकिल पापा! एक साईकिल ला दो, उस पर पढऩे जाएंगे।छुट्टी वाले दिन पार्क में, उसको खूब चलाएंगे। -धर्मेन्द्र गोयल