उड़ते-उड़ते जाती है,बच्चों के चेहरों पर खुशी लाती है,लहलहाते खेतों पर,तितली मुस्कुराते हुए उड़ जाती है।चेहरों पर खुशी लाकर,फूलों को अपने पंखों से सजाकर,खुशी देते हुए आसमान में,तितली मुस्कुराते हुए उड़ जाती है।अपनी जिंदगी को गवांकर,दूसरों के चेहरों पर खुशियॉ लाकर,खुले पन्ने की तरह,तितली आसमान में मुस्कुराते हुए उड़ जाती है।
Category: प्रमुख समाचार/संपादकीय
प्रमोद भार्गवसामंती युग में जिस तरह से देश के वजूद के प्रतीक दुर्ग हुआ करते थे और दुर्ग पर हमले का मतलब राष्ट्र पर हमला माना जाता था,उसी तरह किसी भी प्रजातांत्रिक देश में राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक संसद भवन होते हैं। संसद पर हमले के सीधे-सीधे मायने देश पर हमला है। मसलन संसद पर […]
देश-द्रोह का बदला-3
शांता कुमारगतांक से आगे….स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद खुदीराम का स्मारक बनाया गया। बिहार के सभी नेताओं ने उसके निर्माण में भाग लिया, परंतु श्री जवाहरलाल नेहरू ने उसमें भाग लेने से इनकार कर दिया था। शायद उनकी देशभक्ति की सूची में इस बाल शहीद को कोई स्थान प्राप्त नही। महात्मा गांधी से पूर्व भारत के […]
राकेश कुमार आर्यभारत में ध्वजा शब्द झंडे का पर्यायवाची है, प्राचीन काल में राज्यकर्मियों द्वारा उठाकर ले जाने वाली ध्वजा को राजा या सेना के प्रतीक रूप में परिभाषित किया गया है। शुद्घ शाब्दिक रूप में ध्वजा से तीन चीजों का बोध होता है-1. पताका (हवा में फहराने वाला कपड़े या किसी अन्य वस्तु का […]
हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। लेकिन हमारी जनता आजाद गुलाम की मानिंद जिन्दगी बसर करने मजबूर है। और यह सब हमारी सरकार की कुनीतियों एवं अनदेखी का परिणाम है। हमारे थाने अंग्रेजों के समय के थानों से भी खतरनाक है वो इसलिए क्योंकि अंग्रेजों की लाठी खाने पर कम से कम अपने […]
देश-द्रोह का बदला-2
शांता कुमारखुदीराम रात भर भागते रहे। बिना खाए पीए 17 वर्ष का बालक अंधेरी रात में भाग रहा था। किसलिए? क्या उसके दिमाग में कुछ खराबी थी? क्या प्राणों का मोह उसे न था? अपनी जवानी की उमंगें क्या उसके हृदय में उथल पुथल न मचाती थीं? सब कुछ था परंतु अपने देश बांधवों पर […]
रोड शो / रीयल शो
शो रहा है रो क्योंकि वो थियेटर व सिनेमा घरों सेनिकलकर रोड पर आ गया है नेता को शो और शो को नेता भा गया है, तभी तो नेताचुनावी दौर में, रोड शो में व्यक्त रहते हैं।जोड़ तोड़ और भाषण देने में मस्त रहते हैंजनता भी चालाक है झांसे में नही आती हैनेताओं को सबक […]
भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी अपने आप में पूर्णत: वैज्ञानिक भाषा है। कंप्यूटर के लिए संस्कृत को सबसे उपयुक्त भाषा आज के वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया है। हिंदी इस भाषा (संस्कृत) की उत्तराधिकारी भाषा है। संस्कृत ने जिन अक्षरों का प्राचीन काल में आविष्कार कर भाषा विज्ञान को विकसित किया उसे हिंदी ने बड़े ही गौरवमयी […]
राहुल गांधी ने अपने अब तक के मंझे हुए और सधे हुए भाषण से कांग्रेस के जयपुर चिंतन शिविर को यादगार बना दिया है। उन्होंने नये नेतृत्व के रूप में कांग्रेस में अपने लिए न्यायाधीश की भूमिका को पसंद किया है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में अपनी दादी इंदिरा गांधी, पिता राजीव गांधी और […]
आओ देखें:भारत में ‘सजातीय’ कौन हैंभारत की सांस्कृतिक परंपराओं को समझने जानने और मानने में हमने भारी चूक की है। फलस्वरूप देश में सामाजिक विसंगतियों ने जन्म लेकर अपनी जड़ता में हमें जकड़ लिया है। हमारे देश में बुद्घिजीवी और विधिशास्त्री भी हमारी बहुत सी प्राचीन मान्यताओं को समझने, जानने और मानने में असफल रहे […]