महाभारत के शांतिपर्व में भीष्म पितामह युधिष्ठर को राजधर्म का उपदेश देते हुए बताते हैं-‘‘जो बुद्घिमान, त्यागी, शत्रुओं के छिद्रों (दोषों) को जानने में तत्पर, देखने में सुंदर, सभी वर्णों के न्याय और अन्याय को समझने वाला, शीघ्र कार्य करने में समर्थ, क्रोधविजयी, आश्रितों पर कृपालु, महामनस्वी, कोमल स्वभाव युक्त, उद्योगी, कर्मठ, और आत्मप्रशंसा से […]
Categories