प्रमोद भार्गव ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने और बदले में तेहरान को प्रतिबंधों से छूट देने के लक्ष्य से दुनिया के छह शक्तिशाली देशों और ईरान के बीच आखिरकार समझौता हो ही गया। ईरान पिछले 13 साल से परमाणु बम बनाने की जिद पर अड़ा था। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति अहमदी ने तो […]
Author: अमन आर्य
मायावाद का उत्कर्ष
आध्यात्म रहित होने के कारण, झुलसा निज आमर्ष में। थे सात प्रकार के यान यहां, जो बारूद तेल से चलते थे। चुंबक शक्ति, हीरे, पारे, रवि किरणों से भी चलते थे। हम अंतरिक्ष में उड़ते थे, पहुंचे थे लोक लोकांतर में। था भूतल का नही कोना शेष, जहां पहुंचे न अल्पांतर में। परमाणु बम की […]
जीवन को सदा गति देती है-सुमति
ललित गर्ग जिस तरह कण-कण में भगवान हैं, ठीक उसी तरह कण-कण में जीवन भी समाया है। संगीत की स्वर-लहरियों, पंछियों की चहचहाहट, सागर की लहरों, पत्तों की सरसराहट, मंदिर की घंटियों, मस्जिद की अजान, कोयल की कूक, मयूर के नयनाभिराम नृत्य, लहलहाते खेत, कृषक के मुस्कराते चेहरे, सावन की रिमझिम फुहार, इंद्रनुषी रंगों, बादलों […]
प्रमोद भार्गव वैदिक कालीन नदी सरस्वती के अस्तित्व और उसकी भूगर्भ में अंगड़ाई ले रही जलारा को लेकर भूगर्भशास्त्री, पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों में लंबे समय से मतभेद बना है। यह मतभेद सैटेलाइट मैंपिग के बावजूद कायम रहा। यहां तक कि 6 दिसंबर 2004 को भारत सरकार के मानव संसान विकास मंत्री ने संसद में भी […]
डा0 कुलदीप चन्द अग्निहोत्री प्रो0 अमत्र्य सेन नालन्दा विश्वविद्यालय के कुलापिति पद की अपनी सेवा अव िपूरी हो जाने पर मुक्त हो गये । इसको लेकर सेन अभी भी विवाद चला रहे हैं । अभिनय जगत के गजेन्द्र चौहान को पुणे की एक सरकारी संस्था फि़ल्म व टैलीविजन संस्थान का चेयरमैन नियुक्त किया गया है […]
सदियों पुरानी कमजोरी
हिंसक जीवों से डरता था, जब रहता था कभी मांद में।अब डरता क्यों निज साये से, जब पहुंच चुका तू चांद में। इन सब का है मूल एक, निज तेरा ही व्यवहार।जीत सका नही अब तक भी, निज मन के छहों विकार। भौतिकता में उन्नत मानव, हो गया तू संपन्न।आध्यात्म रूप से हुआ कहीं, पहले […]
भाषा को लेकर भी होती रही है एक राजनीति
संजय द्विवेदी अब जबकि भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन सितंबर महीने में होने जा रहा तो एक बार यह विचार जरूर होना चाहिए कि आखिर हिंदी के विकास की समस्याएं क्या हैं? वे कौन से लोग और तत्व हैं जो हिंदी की विकास बाधा हैं? सही मायनों में हिंदी के मान-अपमान का संकट राजनीतिक ज्यादा […]
खौफभरे लम्हों की कलमबंद स्मृतियां
डॉ. सुभाष रस्तोगी विभाजन निस्संदेह इस उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी भयावह त्रासदी थी, जिसमें लगभग डेढ़ करोड़ लोग उजड़े, आठ से दस लाख लोग नृशंस कत्लोगारत का शिकार हुए। इन्सानियत इतनी शर्मसार हुई कि उसे मुंह तक छिपाने के लिए ठौर नहीं मिला। प्रत्येक धर्म, संप्रदाय, मजहब की इसमें बराबर की भागीदारी थी। भारतीय उपमहाद्वीप […]
भूमि विधेयक पास कराये विपक्ष
देवेन्द्र सिंह आर्य बहुत देर से चर्चा का विषय बना भूमि विधेयक को लेकर अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। सरकार और विपक्ष दोनों के लिए यह विधेयक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है। विपक्ष इस विषय में पीछे हटने को या सरकार का साथ देने को तैयार नही लगता, यद्यपि सरकार इस […]
भारतवर्ष है देश हमारा, कर रहा विश्व प्रकाशित हमारा।हिमगिरि जहॉ का श्ीाश मुकुट है, जंगल सारे हरे विकट है।।शेर चीता अरू दुर्लभ प्राणी, जंगल में करते मनमानी।नही यहॉ उन्हे कोई डर है, भारत न्यारा देश अमर है।। गंगा जैसी नदियॉ बहती, बनो निडर यह सब को कहती।भारत की है न्यारी शान, झंडा तिरंगा इसकी आन।।शेर, […]